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गणतंत्र दिवस परेड : पहली बार सेना ने कराई 'प्रलय' और 'संजय' की मुंह दिखाई

Wed, 29 Jan 2025 04:17 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Wed, 29 Jan 2025 04:17 PM IST
सार

Republic Day 2025: पहले चर्चा प्रलय मिसाइल की। प्रलय मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। यह सतह से सतह पर मारने वाली मिसाइल है, जिसे मोबाइल लॉन्च पैड से छोड़ा जा सकता है।

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Republic Day 2025: Sanjay surveillance system to Pralay tactical missile Displayed In Republic Day
Republic Day 2025 - फोटो : PTI

विस्तार

नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में दो ऐसे स्वदेशी घातक हथियारों की सेना ने मुंह दिखाई कराई, जो दुश्मनों की नींद उड़ा रहे हैं। पहला हथियार अर्द्ध बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' और दूसरा युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली 'संजय' है। स्वदेशी प्रलय मिसाइल इतनी घातक है कि दुश्मन को सोचने का मौका तक नहीं देती है, जबकि संजय की अचूक नजरों से दुश्मन बच नहीं पाता है। दोनों हथियारों को लेकर दुनिया में कौतूहल बना हुआ है। अस्त्र निर्माण को लेकर भारत की यह लंबी छलांग है।

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पहले चर्चा प्रलय मिसाइल की। प्रलय मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। यह सतह से सतह पर मारने वाली मिसाइल है, जिसे मोबाइल लॉन्च पैड से छोड़ा जा सकता है। वैसे तो प्रलय की मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर के बीच है, लेकिन इसकी असली ताकत गति में छिपी हुई है। यह 1960 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार यानी मैक 1.6 से दुश्मन इलाके में जाती है। प्रलय से 500 से 1000 किलोग्राम तक वारहेड ले जाया जा सकता है। 
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भारत के पास सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल भी है, जिसे रूस के सहयोग से बनाया गया है। ब्रह्मोस कैसे दुश्मनों के होश उड़ा रही है, इसको एक पुरानी घटना समझा सकता है, मार्च 2022 में हरियाणा से एक ब्राह्मोस मिसाइल गलती से लॉन्च हो गई थी और चंद मिनटों में पाकिस्तान के पंजाब राज्य में मियां चन्नू कस्बे में जा गिरी थी।
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ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी सेना को सोचने का समय तक नहीं दिया था। दरअसल, पिछले कुछ सालों से भारत स्वदेशी तकनीक के आधार पर सुपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2014 में सत्ता में आने के तुरंत प्रलय मिसाइल पर कार्य प्रारंभ हो गया था। बहुत अधिक समय न लेते हुए मात्र 4 साल में इसे सेना में शामिल कर लिया गया।

अप्रैल 2023 में 7500 करोड़ रुपए में 250 प्रलय मिसाइल का ऑर्डर सेना दे चुकी है। 7.5 से 11 मीटर लंबी प्रलय मिसाइल की खास बात यह है कि इसे युद्ध के मैदान में मात्र 10 मिनट में लॉन्चिंग के लिए तैयार कर लिया जाता है। फिर यह मिसाइल दुश्मन के इलाके में प्रलय लाती दिखेगी। प्रलय की खास बात यह भी है कि यह हवा में कलाबाजियां करती है और इंटरसेप्टर मिसाइलों को चकमा दे देती है। हवा में अपना रास्ता बदल लेती है।  

Republic Day 2025: Sanjay surveillance system to Pralay tactical missile Displayed In Republic Day
Republic Day 2025 - फोटो : अमर उजाला

कर्तव्य पथ पर एक और शक्तिशाली आधुनिक उपकरण जो दिखा, वो संजय (युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली) व्हीकल है। इसे महाभारत के संजय, जो धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल बताते थे, का नाम दिया किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह स्वचलित प्रणाली सेंसर के जरिए दुश्मन की जानकारी एकत्रित कर लेती है। संजय पूर्णतः स्वदेशी है। इसे भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इसी साल मार्च से अक्टूबर के बीच तीन चरणों में संजय को भारतीय सेना में शामिल कर लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हथियारों और रक्षा उपकरणों को लेकर मेक इन इंडिया पर जोर दे रहे हैं। भारत न केवल स्वयं हथियार विकसित कर रहा है, बल्कि निर्यातक देशों की सूची में शामिल हुआ है। वर्ष 2023-24 के वित्तीय वर्ष में भारत ने 21 हजार करोड़ रुपए के हथियार 85 देशों को निर्यात किए। भारत अफ्रीकी और एशियाई देशों को हथियार बेचने पर जोर दे रहा है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-2025 की पहली तिमाही में हथियारों के निर्यात में 78 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। भारत की इस तरक्की ने दुनिया को हैरान किया है। 

पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देश आपस में युद्ध में उलझे हुए हैं। यूक्रेन व रूस के अलावा इजराइल का हमास, लेबनान व ईरान के साथ भिड़ंत को दुनिया ने देखा है। हम रूस और इजराइल जैसे हथियारों के निर्यातक देशों को जूझते देख रहे हैं। यदि युद्ध थोड़ा लंबा खींचता है तो बड़े-बड़े देशों में हथियारों की कमी हो जाती है। यदि कोई देश हथियारों को लेकर केवल दूसरे देशों पर निर्भर होता है तो युद्ध में उसकी हार निश्चित होती है। भारत पूर्व में ऐसे संकट से गुजर चुका है। पिछले एक दशक से भारत की रणनीति यही रही है कि दूसरे देशों से हथियार लेने की निर्भरता को न केवल कम किया जाए, बल्कि स्वदेशी तकनीक से स्वयं के हथियार विकसित किए जाएं। गणतंत्र दिवस परेड में संजय और प्रलय ने भारत की इसी इच्छाशक्ति को प्रदर्शित किया।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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