अगर घास के मैदान या लहराते हुए खेतों में आपको एक गहरे लाल रंग की छोटी सी गेंद एक सरकंडे से दूसरे पर फुदकते हुए दिखाई देती है, तो निश्चित रूप से आप लाल मुनिया को देख रहे हैं। उसकी तरफ बढ़ने के लिए कदम उठाते ही यह चिड़िया इतनी तीव्र गति से उड़ान भरती है मानों, जैसे हवा में कहीं गायब हो गई हो।
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मादा मुनिया लाल रंग की न होकर भूरे रंग की होती है और उनके शरीर पर सफेद धब्बे भी केवल पंखों पर होते हैं।
- फोटो : Bhaarat Vyas
हिमालय की तलहटी से लेकर कन्याकुमारी तक लगभग पूर्ण भारतवर्ष में पाए जाने वाले ये पक्षी गौरैया के आकार के होते हैं। लाल रंग की चोंच और शरीर, गहरे रंग के पंख और ऊपर साफ दीखते हुए सफेद धब्बे इनकी आकृति का अभिनन्दन करते हैं। मादा मुनिया लाल रंग की न होकर भूरे रंग की होती है और उनके शरीर पर सफेद धब्बे भी केवल पंखों पर होते हैं।
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बारिश के मौसम से पहले यह मुनिया घास के सरकंडों में गोलाकार घोंसला बनाती है।
- फोटो : Bhaarat Vyas
झुण्ड में रहने वाली ये मुनिया जलाशय आदि के आर्द्र स्थान के पास पाई जाती हैं, जहां लम्बी घास, नरकुल, सरपत आदि की बहुतायत हों। इसके इलावा झाड़ियों व घास के मैदानों में भी इन्हे देखा जा सकता है। मई महीने में इनकी चोंच लाल होनी शुरू हो जाती है और शीत ऋतू के साथ गहरे रंग की हो जाती है। अप्रैल तक यह चोंच काले रंग की हो जाती है। बारिश के मौसम से पहले यह मुनिया घास के सरकंडों में गोलाकार घोंसला बनाती है। यह चिड़िया एक बार में पांच से छह अंडे दे सकती है।
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लाल अवडावट, स्ट्रॉबेरी फिंच व अन्य नामों से जाने वाली यह चिड़िया का नाम गुजरात के शहर अहमदाबाद से लिए गया है।
- फोटो : Bhaarat Vyas
मुख्य खुराक में बीज व अनाज के साथ-साथ यह मुनिया को कभी-कभी कीट और कीड़े भी खाते हुए देखा जा सकता है। इनकी तेज स्वर में 'टीई' की धुन्न सब जगह गूंजती है। लाल अवडावट, स्ट्रॉबेरी फिंच व अन्य नामों से जाने वाली यह चिड़िया का नाम गुजरात के शहर अहमदाबाद से लिए गया है, जहां से इन पक्षियों को पूर्व समय में पालतू व्यापार में निर्यात किया जाता था।
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