राजस्थान: 'राजनीतिक अनदेखी' से बाहर निकलेंगी वसुंधरा राजे!
पार्टी नेतृत्व की ओर से केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जयपुर आए थे। शाम के समय मुख्यमंत्री के नाम का एलान होना था। झालावाड़ से विधायक वसुंधरा राजे भी बैठक में मौजूद थीं। मंच पर राजनाथ सिंह के साथ बैठी थीं। मुख्यमंत्री के नाम की पर्ची वसुंधरा राजे ने ही खोली थी, जिसमें सांगानेर से पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा का नाम था।
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रविवार का दिन था। मानसून की हल्की फुहारों के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास से बमुश्किल 500-600 मीटर दूर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पहुंचे। दोनों के बीच पूरा एक घंटा गहन मंत्रणा हुई। क्या बातचीत हुई? यह तो किसी को पता नहीं। इस मुलाकात को लेकर न वसुंधरा राजे और न ही भजनलाल शर्मा की ओर से सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट आई। न मुलाकात का फोटो या वीडियो जारी हुआ। क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कदम को भाजपा की ओर से वसुंधरा राजे को मनाने का संकेत माना जाना चाहिए। ऐसा हो सकता है। यह जरूर कहा जा सकता है कि वसुंधरा राजे की राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सक्रियता बढ़ने वाली है।
पिछले साल दिसंबर में जब राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो भारतीय जनता पार्टी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। उस समय मुख्यमंत्री को लेकर कई नाम हवा में तैर रहे थे। इनमें एक नाम वसुंधरा राजे का भी था। सबसे अधिक हलचल उनके सिविल लाइंस स्थित बंगले पर थी। 80 से ज्यादा चुनकर आए विधायक वसुंधरा राजे से मिलने पहुंचे थे। वसुंधरा राजे का आत्मविश्वास भी साफ झलक रहा था। भाजपा हाईकमान को राजस्थान में निर्णय लेने में अधिक समय भी लगा। सबसे अंत में राजस्थान में मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हुआ। वो 12 दिसंबर 2023 की तारीख थी।
उस दिन जयपुर में सर्द हवाओं के बीच भाजपा प्रदेश कार्यालय में सियासी पारा चढ़ा हुआ था। पार्टी नेतृत्व की ओर से केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जयपुर आए थे। शाम के समय मुख्यमंत्री के नाम का एलान होना था। झालावाड़ से विधायक वसुंधरा राजे भी बैठक में मौजूद थीं। मंच पर राजनाथ सिंह के साथ बैठी थीं। मुख्यमंत्री के नाम की पर्ची वसुंधरा राजे ने ही खोली थी, जिसमें सांगानेर से पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा का नाम था। उस समय वसुंधरा राजे की बॉडी लैंग्वेज को लेकर बहुत कुछ कहा गया।
वसुंधरा राजे वर्ष 2003 से 2008 और वर्ष 2013 से 2018 तक राजस्थान की मुख्यमंत्री रही हैं। वर्ष 2014 में उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी ने राजस्थान की 25 की 25 सीटें जीती थीं। वर्ष 2018 में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पार्टी जरूर राजस्थान में विधानसभा चुनाव हार गई थी, लेकिन उसका प्रदर्शन बहुत खराब नहीं रहा था। हालांकि, वर्ष 2019 में एक बार फिर पार्टी ने राज्य की सभी 25 सीटें जीत ली थीं।
निश्चित रूप से दोनों बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्माई चेहरा था। हालांकि, कुछ श्रेय वसुंधरा राजे को भी मिला। फिर धीरे से वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर राजस्थान की राजनीति से दूर करने की कवायद शुरू हुई। वसुंधरा राजे ने भी पार्टी में सक्रियता को लेकर अपना दायरा सीमित कर लिया। उनको पार्टी में खास तवज्जो नहीं मिल रही थी। यह बात साफ-साफ दिख भी रही थी। यही कारण था कि उन्होंने पार्टी के अधिकांश कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी।
वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर वसुंधरा राजे को ऑक्सीजन दी है, क्योंकि पार्टी की राजस्थान की 25 में से 11 सीटों पर हार हुई। ऐसा माना गया कि यदि वसुंधरा राजे केवल अपने बेटे दुष्यंत सिंह की सीट झालावाड़-बारां तक स्वयं को सीमित नहीं रखतीं और प्रदेश भर में पार्टी के लिए प्रचार करतीं तो परिणाम अच्छे हो सकते थे।
इन परिणामों को लेकर पार्टी में आत्ममंथन, आत्मचिंतन और आत्मावलोकन के दौर चल रहे हैं। हालांकि, अब तक कोई ठोस कारण निकल कर नहीं आया है। यह भी संभव है कि पार्टी किसी ठोस कारण पर स्वयं पहुंचना भी नहीं चाह रही है।
फिर अपने तीसरे कार्यकाल में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत पहले जैसी नहीं है। अब जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वसुंधरा राजे के आवास पहुंचे हैं तो कोई न कोई संदेश या संकेत के साथ वहां गए होंगे। कारण जो भी हो, लेकिन वसुंधरा राजे की स्थिति राजस्थान में एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है।
बहुत संभव है कि भजनलाल सरकार के आने वाले दिनों में निर्णयों में वसुंधरा राजे की सहमति या सलाह हो। वसुंधरा राजे ने दो बार राजस्थान की कमान संभाली है। उनके अनुभव की इस समय राजस्थान को सख्त आवश्यकता है। विशेषकर अनुभवहीन भजनलाल शर्मा को। स्पष्ट दिख रहा है कि वसुंधरा राजे की और अधिक अनदेखी शायद अब मुश्किल है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।