आस्था से टकराई सियासत, बिहार में बवाल: छठ पर बयान राहुल की सियासत पर ग्रहण, ये बयान मोदी के लिए तोहफा
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लंबे अंतराल के बाद आखिरकार राहुल गांधी बिहार आए। रैलियां की और हमला बोला, लेकिन अपने मूल मुद्दे वोट चोरी से खुद ही किनारा कारते दिखे। अलबत्ता, छठ पर दिया गया उनका बयान बिहार के सियासी अखाड़े को सरगर्म कर गया। चुनाव के सबसे निर्णायक दौर में "छठ और मोदी का ड्रामा" वाले बयान पर राहुल के बयान पर भाजपा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को छठी का दूध याद दिलाने की तैयारी कर ली है। राहुल गांधी ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर और दरभंगा में जनसभाएं की। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे निशाने पर लिया, लेकिन उनके बयानों को भाजपा ने गुजरात की तर्ज पर 'सांस्कृतिक अस्मिता' से जोड़कर ध्रुवीकरण का हथियार बना लिया है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए उन्हें 'दिखावे का सौदागर' बताने की कोशिश की, लेकिन उनके शब्दों ने बिहार के सबसे पवित्र पर्व पर सवाल खड़ा कर दिया। राहुल ने यह ढीली सियासी गेंद ऐसे समय में फेंकी है, जब गुरुवार को ही मोदी भी बिहार आ रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह भी यहीं हैं। राहुल के छठ वाले बयान के बाद एनडीए के खेमे में उत्साह है। उन्हें लग रहा है कि इसके बाद महागठबंधन को घेरने में उन्हें और आसानी होगी। वहीं महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल राजद के नेता भी राहुल के इस बयान से असहज हैं।
राहुल ने यहां रैलियों में कहा, "मोदी वोट के लिए स्टेज पर आकर डांस भी कर लेंगे। फिर अंबानी के यहां शादी में दिखाई देंगे। एक तरफ मां यमुना बह रही हैं, जो प्रदूषित हैं। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी के लिए पानी भरा गया। यह सब इसलिए किया गया क्योंकि मोदी को ड्रामेबाजी करनी थी।"
रोचक तथ्य है कि जिस वोट चोरी के मुद्दे को राहुल बना रहे थे, उस पर उन्होंने अब ज्यादा जोर नहीं दिया। इसका कारण था कि महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे और राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे से 'रणनीतिक दूरी' बना ली थी। राहुल ने 'वोट चोरी' का सीधा आरोप लगाने के बजाय, इसका जिक्र केवल संविधान की आड़ लेकर किया और कहा कि "आरएसएस के लोगों को मोदी तमाम पदों पर बैठा रहे हैं।"
महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने शुरू से ही 'एसआईआर' से रणनीतिक दूरी बनाए रखी है। राजद नेतृत्व यह भली-भांति समझता है कि बिहार में यह मुद्दा कहीं भी जमीन पर काम नहीं कर रहा है और मतदाताओं का ध्यान रोजी-रोटी से हटा सकता है।
वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने बेगूसराय की रैली में राहुल-तेजस्वी पर घुसपैठियों के संरक्षक होने के आरोपों को चस्पा किया। उन्होंने कहा कि "पहले राहुल गांधी आए थे 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' निकालने। क्या बिहार की मतदाता सूची में घुसपैठिये होने चाहिए? ये लालू-राहुल दोनों बांग्लादेशी घुसपैठियों के संरक्षक बने हैं। लेकिन मैं आपसे वादा करके जाता हूं कि बिहार की भूमि से एक-एक घुसपैठिये को निकालने का काम करूंगा।"
पटना में जब राहुल के बयान पर आम लोगों के बीच खासी प्रतिक्रिया देखी गई। लोगों से बातचीत करने में समझ में आया कि राहुल गांधी ने मोदी पर व्यक्तिगत और आक्रामक हमला करने के प्रयास में, बिहार की अटूट आस्था पर अप्रत्यक्ष वार कर दिया। जिस तरह गुजरात में 'मौत का सौदागर' का बयान भारी पड़ा था, उसी तरह छठ पर यह बयान महागठबंधन के लिए आत्मघाती हो सकता है।
तेजस्वी यादव ने बड़ी मुश्किल से चुनाव को 'रोजगार' के मुद्दे पर केंद्रित किया था, लेकिन राहुल का ये 'सियासी अतिरेक' न केवल उस मुद्दे की धार कुंद कर रहा है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी को भावनात्मक और धार्मिक आधार पर मतदाताओं को फिर से लामबंद करने का सीधा मौका दे रहा है। मोदी अपने रैलियों में छठ के महत्व को समझाकर और राहुल पर सीधा हमला करके, आसानी से इस 'लूज बॉल' को बाउंड्री से बाहर फेंकने का सामर्थ्य रखते हैं। कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर जहां कुछ बोलने को तैयार नहीं है, वहीं भाजपा सूत्रों का कहना है कि मोदी रैलियों में छठ माई पर जब राहुल को जवाब देंगे तो समझ में आएगा कि कांग्रेस नेता कितनी बड़ी भूल कर गए।