इमरान खान ! बोलने से पहले परवेज मुशर्रफ की भी सुन लीजिए
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शुक्रवार को इमरान खान सिंध में थे। एक रैली में उन्होंने कहा ,पाकिस्तान की जमीन से आतंकवाद को संरक्षण नहीं मिलता न ही उसे कभी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी दलों की बैठक के बाद इस पर सहमति बनी है। इमरान पहले भी कई बार यह बात कह चुके हैं। उन्होंने पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं की बेहतर हालत और हिफाजत का भी दावा किया। अलबत्ता उन्होंने इस बात पर खामोशी ओढ़ कर रखी कि 1947 में जो आबादी 22 फीसदी थी, वह घटकर एक फीसदी क्यों रह गई ? उनका सफाया हुआ अथवा उनका जबरिया धर्म परिवर्तन किया गया। बेहतर होता कि वे इस बात की भी पड़ताल कर लेते कि पाकिस्तान में हिन्दुओं के अलावा, सिखों और ईसाईयों की कितनी दुर्गति है। उन्हें कितने जुल्मों का शिकार होना पड़ा है। बहरहाल अल्पसंख्यकों की स्थिति पर आगे कभी। फिलहाल आतंकवाद के बारे में उनके बयान की पड़ताल।
दरअसल शुक्रवार को ही पाकिस्तान के फौजी तानाशाह और राष्ट्रपति रहे जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक मीडिया साक्षात्कार में खुलासा किया कि बरसों से पाकिस्तान की धरती पर ये आतंकवादी समूह पनपते रहे हैं और आज भी हैं। परवेज मुशर्रफ ने इस साक्षात्कार में यह भी कहा है कि जैश ए मोहम्मद ने तो दो बार उन्ही की जान लेने की कोशिश की थी। जैश आतंकवादी समूह है। यह पाकिस्तान के अपने लोगों की जान भी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे भारत बलूचिस्तान में आतंकवादियों को समर्थन देता है ,वैसे हम भी कश्मीर में देते हैं। मियां मुशर्रफ यहीं नहीं रुके। उन्होंने लश्कर ए तैयबा को आतंकवादी नहीं मुजाहिदीन संगठन करार दिया। बोले कि यह कश्मीर में 20 साल से अपनी गतिविधि चला रहा है। उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
लश्कर के लोग कश्मीरियों की मदद कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार उन्हें उकसाती नहीं। अभी भी हजारों नौजवान लश्कर में भरती के लिए कतार में हैं। पाकिस्तान की हुकूमत उन्हें नहीं रोक सकती। एक ही दिन। पाकिस्तान के दो शिखर पुरुषों के बयान। एक तरफ इमरान खंडन करते हैं। दूसरी तरफ मुल्क का राष्ट्रपति, आईएसआई और आर्मी का सर्वेसर्वा रहा व्यक्ति खुल्लमखुल्ला इस सच्चाई को स्वीकार कर रहा है। वह कहता है कि बलूचिस्तान को भारत समर्थन दे रहा है। क्या परवेज मुशर्रफ को याद है कि बलूचिस्तान के अपने ही लोगों को उनके जमाने में किस तरह गाजर - मूली की तरह फौज ने काटा था। क्या बलूचिस्तान के लोगों की आवाज उन्हें नहीं सुनाई देती ? वे सिर्फ ताकत के दम पर उसे पाकिस्तान के साथ मिलाए रखना चाहते हैं। अभी तो नहीं, जिस दिन भारत बलूचिस्तान के समर्थन में खड़ा होगा, उसे बांग्लादेश की तरह आजाद होने में एक सप्ताह भी नहीं लगेगा।
कश्मीर में उन्हें मानव अधिकारों का हनन दिखाई देता है ,लेकिन बलूचिस्तान में नहीं। यह पाकिस्तान के अस्तित्व की सबसे बड़ी विफलता है। इमरान खान ने सिंध के भाषण में कश्मीर पर कुछ नहीं बोला। पेंच तो यही है। कश्मीर में आतंकवाद को वह आजादी का आंदोलन मानता है। उसे समर्थन बंद करने के बारे में इमरान कुछ नहीं कहते। अर्थात कश्मीर में जो चल रहा है , उसे पाकिस्तान की धरती से खाद - पानी मिलता रहेगा। समस्या की जड़ तो यही है। वैधानिक तौर पर कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। वह एक दूसरे देश का हिस्सा है , जिसमें वह आतंकवाद फैलाता रहेगा। इस हकीकत को पाकिस्तान डंके की चोट पर कह रहा है।
सारे इस्लामी देश, योरपीय देश, पश्चिमी देश, अमेरिका चाहे जो भी कहते रहें - कोई फर्क नहीं पड़ता। अब तो चीन के हाथ भी पाकिस्तान में हवन करते झुलसने लगे हैं । उसके 60 बिलियन डॉलर इस देश में डूब चुके हैं। चीन ने दस लाख मुसलमानों को कैद कर रखा है। वह इमरान खान को नहीं दिखाई देता? वहां कोई मुस्लिम समुदाय उनके समर्थन में नहीं आता। न हाफिज सईद और न मसूद अजहर। पाकिस्तान अपने पाले भस्मासुरों से बचे तो आगे सोचे। भारत को तो इस देश के लिए कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। अपनी अकाल मौत के रास्ते पर यह देश चल पड़ा है।