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दूसरा पहलू: नेपाल का रामायण से अटूट संबंध है... भानुभक्त कृत रामायण इस देश का रामचरित मानस है

Mon, 14 Jul 2025 08:29 AM IST
N Arjun एन अर्जुन
Updated Mon, 14 Jul 2025 08:29 AM IST
सार

भानुभक्त आचार्य ने सबसे पहले रामायण का नेपाली भाषा में अनुवाद किया। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। भानुभक्त कृत रामायण वस्तुत: नेपाल का 'रामचरित मानस' है। यह पद्य शैली में है, जो बरबस ही सबका मन मोह लेती है।

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Nepal and unbreakable Ramayana connection Bhanubhakta acharya translation Ramcharitmanas of this country
भानुभक्त आचार्य कृत रामायण - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / ग्राफिक्स

विस्तार

रामायण की कथा, चरित्र और आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने हजारों साल पहले थे। यही कारण है कि पूरे विश्व में 50 से अधिक भाषाओं में दुनिया के सबसे प्राचीनतम महाकाव्य रामायण  का अनुवाद हो चुका है। ऐसे में हमारा पड़ोसी देश नेपाल कैसे पीछे रह सकता था, जिसका रामायण  से अटूट संबंध है।

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भारत में भगवान राम की अयोध्या है, तो नेपाल में मां जानकी का जनकपुर है। मां जानकी की धरती पर 13 जुलाई, 1814 में नेपाल के तनहु जिले के चुंदी राम्घा गांव में, धनंजय आचार्य और धर्मावती आचार्य के घर भानुभक्त आचार्य का जन्म हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने दादा से संस्कृत में प्राप्त की और उच्च शिक्षा वाराणसी में प्राप्त की।
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भानुभक्त आचार्य नेपाली लेखक, कवि और अनुवादक थे। उन्होंने ही सबसे पहले रामानंद कृत अध्यात्म रामायण का सरल और सुंदर ढंग से नेपाली भाषा में पद्य रूप में अनुवाद किया। उनके रामायण का अनुवाद करने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है।
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कहते हैं कि भानुभक्त आचार्य का परिवार काफी धनाढ्य था। इसलिए उन्होंने कभी गरीबी का अनुभव नहीं किया। एक दिन वह गांव में घूम रहे थे कि एक घास काटने वाला मिला। जब उन्होंने उससे घास काटने की वजह पूछी, तो उसने बताया कि इसके पैसों से वह लोगों के लिए एक कुआं खुदवाएगा, ताकि लोगों और राहगीरों को पीने के लिए पानी मिल सके।

यहीं से भानुभक्त के मन में लोकसेवा की भावना जागी और उन्होंने लोकसेवा के लिए रामायण का नेपाली भाषा में अनुवाद शुरू किया। भानुभक्त आचार्य ने भगवान राम की कथा को जनभाषा में प्रस्तुत किया, जिससे आम नेपाली भाषी लोगों को रामकथा को समझने और पढ़ने में सरलता हुई।

इस रचना को भानुभक्त आचार्य की रामायण के नाम से भी पुकारा जाता है। यह कार्य 1887 ई. में पूर्ण हुआ। इस अद्वितीय कृति ने खस-पहाड़ी भाषा (जो बाद में नेपाली बनी) को समृद्ध किया। इस कार्य ने उन्हें नेपाल के 'आदिकवि' की उपाधि दिलाई। भानुभक्त कृत रामायण वस्तुत: नेपाल का रामचरित मानस है। इसका पाठ पद्य रूप में किया जाता है, जो बरबस ही सबका मन मोह लेता है।


नेपाली भाषा के इस आदिकवि ने 1868 में इस संसार से विदा ली। उनके जीवन में उनकी रचनाएं अप्रकाशित रहीं, जिसकी वजह से तब उन्हें अपनी कृतियों का यश नहीं मिला। लेकिन 1887 में कवि मोतीराम भट्ट ने आचार्य की कृतियों का पता लगाकर वाराणसी से प्रकाशित करवाया, तब जाकर उनके अद्भुत कार्य का पता चला। आचार्य ने जो उपकार नेपाली भाषा-भाषियों पर किया है, वह अकल्पनीय, अविस्मरणीय और वंदनीय है।

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