विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020 : अफ्रीका में जब हुआ एलीफैंट बुल से सामना..!
अफ्रीकी एलीफैंट बुल एक स्वछंद विचरण करने वाला नर हाथी होता है जिसे बजाए झुंड में रहने के अकेले घूमने में आनंद आता है। एक नर हाथी अपने झुंड में करीब 15 साल तक रहता है और उसके बाद उसके सामने अमूमन दो रास्ते होते हैं।
पहला या तो वह अपने इसी झुंड में रहता रहे या फिर किसी ऐसे झुंड में चला जाए जिसके सारे सदस्य नर हाथी हों। लेकिन, एक तीसरी पसंद भी होती है और वह होती यायावर हो जाने की, स्वछंद विचरण करने वाले नर हाथी को ही वन्यजीव विज्ञान में बुल कहते हैं।
एक वयस्क बुल 10 से 13 फीट के करीब ऊंचा होता है और इसका वजन होता है छह हजार से लेकर आठ हजार किलो तक। हाथी इंफ्रासोनिक आवाजें और स्वर निकालकर आपस में संवाद करते हैं जिन्हें सुनने में इंसानों के कान असमर्थ होते हैं।
बुल का स्वभाव प्रचंड स्वतंत्रता का होता है और उसकी आदत होती है अपनी ताकत और अपने नियंत्रण को प्रदर्शित करते रहने की।
कुछ समय पहले की बात है कि मैं अपनी बेटी के परिवार के साथ उनके फोर बाई फोर वाहन में पिलान्सबर्ग पार्क गया था। दक्षिण अफ्रीका की मशहूर सनसिटी के पास स्थित ये पार्क जोहानिसबर्ग से ज्यादा दूर नहीं है। दोपहर बाद हम पार्क में खूब घूमे और हमने तमाम तरह की चिड़ियां और जानवर देखे भी।
हम लोग पार्क के बीच में रहे होंगे, मेन गेट से यही कोई 15 किमी करीब कि हमें एहसास हुआ कि पार्क का गेट बंद होने का समय करीब है। हमने तय किया कि हमें लौट जाना चाहिए।
हमने पीछे मुड़कर देखा तो हमारे पीछे भी वाहनों की कतार चल रही थी...
हमने अपनी गाड़ी पार्क के सबसे नजदीकी निकास की तरफ मोड़ ली। मेरे दामाद विकास गाड़ी चला रहे थे और मैं उनके बगल में था। अपने निकॉन डी4 कैमरे पर 70-200 का लेंस चढ़ाए हुए, इस बात से पूरी तरह अनजान कि हमारे सामने अभी क्या होने वाला है।
हम अपने लिए अनुकूल निकास द्वार की तरफ बढ़ ही रहे थे कि हमने एक बात नोटिस की। सामने से कोई वाहन आ ही नहीं रहा था। ये थोड़ा अस्वाभाविक था। हालांकि, जल्द ही इसकी वजह भी हमारे सामने थी।
हमारी तरफ बढ़ता चला आ रहा था एक एलीफैंट बुल, सड़क के बीचोबीच चलते हुए और उसके पीछे चल रहा था सैकड़ों कारों का एक काफिला। हमने पीछे मुड़कर देखा तो हमारे पीछे भी वाहनों की कतार चल रही थी।
एक फोटोग्राफर के तौर पर मेरे लिए ये दिल खुश कर देने वाला दृश्य था, लेकिन दूसरों की तो सांस अटक गई थी। अब ये बुल हमसे सिर्फ 20 फीट की दूरी पर था। उसे इस बात का पूरा एहसास था कि वह क्या कर रहा है। जब एक फॉरेस्ट रेंजर की गाड़ी ने उसके बगल से निकले की कोशिश की तो वह जान बूझकर उसी तरफ घूमा और गाड़ी के आगे निकलने का रास्ता बंद हो गया।
बुल ने हमारे ऊपर अपनी दबंगई और धमकी का पूरा दबाव बनाकर रखा...
दोनों तरफ वाहनों की कतार लंबी होती जा ही है और सैकड़ों वाहन व उनके भीतर बैठी सवारियों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था। यहां उस दिन की जो तस्वीरें मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं, उसमें आपको इसके आसपास खूब हरियाली भी दिख रही है, लेकिन उसे इससे कोई मतलब नहीं। वह तो हमारे भय और अपनी दबंगई पर खुश हो रहा था।
उस दिन हम कोई पांच किमी. रिवर्स गीयर में गाड़ी डालकर चलते रहे और इस बुल ने हमारे ऊपर अपनी दबंगई और धमकी का पूरा दबाव बनाकर रखा। आखिरकार हमें एक छोटी सी सड़क इस रास्ते से मुड़ती दिखाई दी और हम लोग उससे होकर दूसरे निकास द्वार की तरफ चले गए।
इस बात को कुछ साल हो गए हैं लेकिन जब भी मैं इस दिन के बारे में और इन हालात के बारे में सोचता हूं तो सिहर जाता हूं।
( लेखक एल सी सिंह, अंतर्राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी निहिलेंट के कार्यकारी उपाध्यक्ष और शौकिया फोटोग्राफर हैं.)
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