मूमल मेहर: सोशल मीडिया पर छाई बाड़मेर की बेटी, क्रिकेट प्रतिभा के मुरीद हुए सचिन
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सोशल मीडिया पर इन दिनों पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक रेगिस्तानी गांव की बेटी मूमल मेहर सुर्खियां बटोर रही है। मूमल का एक वीडियो जमकर शेयर किया जा रहा है, जिसमें वह नंगे पैर क्रिकेट खेलती और चौक्के-छक्के लगाती नजर आ रही है। जबरदस्त शॉट लगा रही मूमल का यह वीडियो क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने भी ट्वीट किया और लिखा- उन्हें बच्ची की बैटिंग देखकर वाकई मजा आया।
मूमल का वीडियो वायरल होने के बाद कुछ स्थानीय नेताओं ने उसे क्रिकेट किट उपलब्ध करा दी है, लेकिन मूमल को अब राहुल गांधी के ट्वीट का इंतजार है, ताकि राजस्थान सरकार उसे वही सुविधाएं दिलवाए, जो पिछले साल जुलाई में राजस्थान के ही 16 वर्षीय गेंदबाज भरत सिंह को मिली हैं।
Kal hi toh auction hua.. aur aaj match bhi shuru? Kya baat hai. Really enjoyed your batting. 🏏👧🏼#CricketTwitter #WPL @wplt20
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(Via Whatsapp) pic.twitter.com/pxWcj1I6t6 — Sachin Tendulkar (@sachin_rt) February 14, 2023
14 वर्षीय मूमल मेहर बाड़मेर जिले के शिव शेरपुरा कानासर गांव की रहने वाली है और सरकारी विद्यालय में 8वीं की छात्रा है। मूमल के पिता एक किसान हैं और घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। मूमल के अलावा घर में उसकी सात बहनें और दो भाई हैं, लेकिन क्रिकेट को लेकर उसका जुनून ऐसा है कि वह मां का घर में हाथ बंटाने के अलावा परिवार की बकरी चराकर मदद करती है और रोजाना 4 घंटे क्रिकेट की प्रेक्टिस भी करती है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
दो दिन पहले जैसे ही मूमल का वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से लेकर केंद्र सरकार में मंत्री कैलाश चौधरी, जो बाड़मेर से सांसद भी हैं, दिल्ली की महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल, भाजपा के पाली सांसद पीपी चौधरी समेत अनेक नेताओं ने मूमल का वीडियो शेयर किया। यहां तक की सतीश पूनिया ने फोन पर मूमल से बातचीत की और उसे यह तक वादा कर दिया कि क्रिकेट पिच सहित विभिन्न संसाधनों को लेकर वह विधानसभा में मांग उठाएंगे। जितनी हो सके, उसकी मदद करेंगे। सतीश पूनिया ने क्रिकेट किट भी मूमल के लिए भिजवाया।
अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहीं प्रतिभाएं यूं ही सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के आगे आती हैं। पिछले साल जुलाई में राजस्थान के राजसमंद जिले के भरत सिंह ने तब सनसनी फैला दी थी, जब भरत का मछली के जाल का नेट लगाकर बॉलिंग की प्रेक्टिस करने का वीडियो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया था। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भरत सिंह का सपना साकार करने में सहायता की अपील की थी।
राहुल गांधी का ट्वीट आते ही सरकार दौड़ी-दौड़ी भरत सिंह के पास पहुंची थी और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही आनन-फानन में भरत सिंह को जयपुर में क्रिकेट अकादमी में प्रशिक्षित करने का वादा कर दिया गया। स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भरत सिंह से मिले थे। बाद में भरत सिंह को सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर की क्रिकेट अकादमी में जगह दिला दी गई।
ताकि मिल सके भरत सिंह जैसी सुविधाएं
मूमल को भी अब राहुल गांधी के ट्वीट का इंतजार है, ताकि उसकी प्रतिभा को भी निखारा जा सके। यदि राहुल गांधी मूमल की मदद की अपील राजस्थान सरकार से करेंगे तो यह निश्चित है कि जो जल्दबाजी भरत सिंह को आगे लाने के लिए राज्य सरकार ने दिखाई थी, वैसा ही कुछ मूमल को भी मिल जाए।
हालांकि, यह देखा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जो भी प्रतिभाएं आगे आती हैं, वह कुछ अंतराल के बाद कहीं खो जाती हैं। उन्हें कुछ दिन की तो प्रसिद्धि मिलती है, लेकिन फिर लोग उन्हें भूला देते हैं। मूमल और भरत सिंह जैसी युवा प्रतिभाओं को केवल थोड़े समय के लिए सिर आंखों पर न बिठाएं। ऐसी प्रतिभाओं के उज्जवल भविष्य के लिए खेल संस्थाएं भी आगे आएं और एक दीर्घकालीन योजना बनाई जाए।
सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ियों को भी ऐसी प्रतिभाओं को संवारने में मदद कराने जरूरत है। भारत रत्न तेंदुलकर केवल मूमल के वीडियो को देखकर आनंदित न हों, वो मूमल और उस जैसे दूसरे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के खिलाड़ियों की मदद भी कराएं।
भारतीय क्रिकेटरों पर नजर डालें तो महेंद्र सिंह धोनी, जिनके पिता चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, पृथ्वी शॉ, जिनके पिता परचून की दुकान चलाते थे, झूलन गोस्वामी, जो पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव से आती हैं, रवींद्र जड़ेजा, जिनके पिता चौकीदार थे, उमेश यादव, जिनके पिता कोयला खनन में मजदूर थे, हरभजन सिंह, जिन्होंने ट्रक ड्राइवर बनने की सोची थी, ताकि परिवार की आर्थिक मदद हो सके। ऐसे अनेक उदाहरण हैं।
सही राह और प्रशिक्षण मिले तो क्या पता मूमल कल टीम इंडिया की दूसरी शेफाली वर्मा बन जाए, जिनके नेतृत्व में भारतीय वूमन अंडर-19 टीम ने वर्ल्ड कप जीता है।
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