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एवरेस्ट फतह के जुनून से हिमालय पर मंडरा रहा पहाड़ सा संकट

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Tue, 02 Jul 2019 06:48 PM IST
इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई के अभियानों में मरने वालों की संख्या 18 तक पहुंच गई 
इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई के अभियानों में मरने वालों की संख्या 18 तक पहुंच गई  - फोटो : social media
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एक समाचार के अनुसार इस साल के पर्वतारोहण सीजन में एवरेस्ट पर चढ़ाई के अभियानों में मरने वालों की संख्या 18 तक पहुंच गई और इनमें से 10 मौतें केवल ट्रैफिक जाम के कारण हुईं। हाल ही में ट्रैफिक जाम से समय से वापस न लौट पाने और ऑक्सीजन समाप्त होने के कारण मरने वालों में ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक के साथ ही दो भारतीय पर्वतारोही भी थे।
 
बहरहाल, ये हालत जब दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन चोटी की है तो बाकी चोटियों पर चढ़ाई के लिए हिमालय की संवेदनशील ऊंचाइयों पर उमड़ रही भीड़ की सहज ही कल्पना की जा सकती है। इतने बड़े पैमाने पर दुनिया के इस युवा पर्वत के पारितंत्र पर मानव दबाव का असर हम बदलते मौसम चक्र पर तो देख ही रहे हैं लेकिन इससे आपदाओं का खतरा भी काफी बढ़ गया है जिसका उदाहरण हम 2013 की केदारनाथ त्रासदी में देख चुके है, क्योंकि हिमालय भारत का भाल ही नहीं बल्कि ऐशिया का मौसम का नियंत्रक भी है और करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित भी करता है।  
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आखिर एवरेस्ट को लेकर क्यों मची है होड़ 
समुद्रतल से 8,848 मीटर ऊंची ऐवरेस्ट की चोटी पर पहली बार 1953 में एडमण्ड हिलैरी और शेरपा तेन्जिंग नोर्गे द्वारा सफल आरोहण के बाद दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई करने की ऐसी होड़ लगी कि वहां अब तक 4000 से अधिक लोग उस पर चढ़ कर झंडे गाड़ चुके हैं। आज हालत यह है कि इस सबसे दुर्गम पर्वत पर अत्यधिक भीड़ के कारण ट्रैफिक की ऐसी समस्या खड़ी हो गई जैसी कि दिल्ली जैसे शहरों में आम है।

काठमाण्डू से न्यूयॉर्क टाइम्स में भारत शर्मा और मुजीब माशल की एक रिपोर्ट (26 मई 2019) के अनुसार इस पर्वतारोहण सीजन में माउण्ट ऐवरेस्ट जिसे नेपाल में सागरमाथा कहा जाता है, पर पर्वतारोहण के लिए नेपाल सरकार ने 381 परमिट जारी किए हैं जिनमें से 250 से लेकर 300 तक चढ़ाई के लिए तैयार हैं और कई अभियान शुरू कर पूरा भी कर चुके हैं।

एवरेस्ट अभियानों पर पैनी दृष्टि रखने वाले ब्लाॅगर एलन आर्नेट के ब्लॉग अनुसार 1953 से लेकर 2018 तक ऐवरेस्ट पर कुल 8,306 अभियान चले जिनमें से 5,280 नेपाल की ओर से तथा 3,026 अभियान तिब्बत की और से चले, जिनमें कुल 4,333 लोगों ने एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने में सफलता हासिल की इन अभियानों में 288 पर्वतारोहियों को जानें गंवानीं पड़ी।
 
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