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वर्षा में खिली प्रकृति: मॉनसून और पक्षियों की अनोखी दुनिया

Fri, 27 Sep 2024 03:05 PM IST
vikas pawar विकास पवार
Updated Fri, 27 Sep 2024 03:05 PM IST
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monsoon season nature and Rain Quail and odkf in india shades and colours of nature
इन पक्षियों की चहचहाहट से नम हवा गूंज उठती है। - फोटो : विकास पवार

मॉनसून का भारतीयों से एक गहरा संबंध है। मॉनसून सिर्फ एक मौसम का बदलाव नहीं है; यह हमारे विविध देश की जीवनरेखा है। कई लोगों के लिए, बारिश की बूंदों की आवाज़ और गीली मिट्टी की खुशबू खुशी, बचपन और जीवन की यादें ताजा कर देती है। कश्मीर की धुंध भरी घाटियों से लेकर केरल के हरे-भरे वन तक, मॉन्सून भारत को एक प्राकृतिक स्वर्ग में बदल देता है.

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मॉनसून के आने से भारत की वनस्पति और जीव-जंतुओं में भी अद्भुत बदलाव देखने को मिलता है। कई पक्षी तथा जानवर इस मौसम की खुशी में झूम उठते हैं। मोर के नृत्य और खेलते हुए हिरण, की खुशी के दृश्य मॉन्सून के मनमोहक रूपों में से कुछ हैं। और पक्षियों की बात करें तो कई प्रजातियाँ ऐसी हैं जो केवल बारिश के मौसम में और कुछ विशेष क्षेत्रों में ही दिखाई देती हैं।

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इन पक्षियों की चहचहाहट से नम हवा गूंज उठती है। बारिश के मौसम में ही इनकी मधुर आवाजें सुनाई देती हैं, जैसे कि चातक (Jacobin Cuckoo) और कोयल (Asian Koel)।

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बारिश बटेर, जिसे अंग्रेजी में रेन क्वेल (Rain Quail) कहा जाता है, मॉनसून के मौसम का एक अनोखा और प्रतीकात्मक पक्षी है। यह पक्षी बेहद शर्मीला होता है, लेकिन इसकी एक विशिष्ट मुद्रा है—आकाश की ओर देखकर अपनी मधुर आवाज में पुकारना। बारिश बटेर का यह आकाश की ओर देखना और पुकारना मॉनसून की छटा को और भी मनमोहक बना देता है।


यह पक्षी मुख्य रूप से भारत के लगभग हर हिस्से में देखा जा सकता है। यह घास के मैदानों, खुले खेतों, और गीली जमीनों पर रहना पसंद करता है, खासकर उन जगहों पर जहां बारिश के बाद हरियाली होती है। बारिश बटेर अपने छोटे आकार, धब्बेदार पंखों, और तेज़ आवाज़ के कारण पहचाना जाता है। बारिश बटेर का अस्तित्व यह दर्शाता है कि मॉनसून ने वातावरण को कितना प्रभावित किया है, और इसके आवाज से यह बताता है कि वर्षा ऋतु अपने पूरे वैभव में है।

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इनकी घोंसला बनाने की प्रक्रिया भी बेहद अनोखी होती है। - फोटो : विकास पवार

मॉनसून के दौरान सक्रिय होने वाला एक और रंग-बिरंगा पक्षी है ओरिएंटल ड्वार्फ किंगफिशर (ODKF)। यह समय उनके लिए घोंसला बनाने और अपने चूजों को भोजन खिलाने का होता है। यह खूबसूरत पक्षी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के घने जंगलों और गीली भूमि वाले क्षेत्रों में देखा जाता है। इनका आहार मुख्य रूप से छोटे कीड़े-मकोड़ों, और जलीय जीवों पर निर्भर होता है।

इनकी घोंसला बनाने की प्रक्रिया भी बेहद अनोखी होती है। यह पक्षी नदी किनारे नमी वाली मिट्टी में सुरंग खोदकर घोंसला बनाते हैं, जिसमें वे अपने अंडे देते हैं और बाद में अपने चूजों का पालन-पोषण करते हैं। हम फोटोग्राफर अक्सर ODKF को विशेष स्थलों पर देखने और उनके जीवन का आलेखन करने का अवसर तलाशते हैं। आम तौर पर इन्हें अपने चूजों को खाने के लिए छिपकलियाँ और केकड़े लाते हुए देखा जाता है, और यही दृश्य इनके जीवन का सबसे सुंदर और अनमोल क्षण बन जाता है।

मॉनसून और Biodiversity का एक अटूट संबंध है, जिसे बारिश बटेर और ODKF जैसे पक्षियों की उपस्थिति खूबसूरती से दर्शाती है। ये पक्षी न केवल मॉन्सून की आहट लाते हैं, बल्कि हमारे प्राकृतिक परिवेश की समृद्धि को भी दर्शाते हैं।

हमारे राष्ट्रीय ध्वज में हरा रंग इस समृद्धि और Biodiversity का प्रतीक है, जो हमें अपनी जैवविविधता की रक्षा के महत्व की याद दिलाता है। इसलिए, हम सभी का दायित्व है कि हम अपने पर्यावरण और इसकी अनमोल धरोहरों को संरक्षित करें, ताकि मॉन्सून का यह उत्सव हर वर्ष इसी तरह जीवंत बना रहे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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