रखाइन संकट: म्यांमार के रखाइन मोर्चे पर जुंटा की हार, मिजोरम सीमा पर बढ़ी सुरक्षा और शरणार्थी चिंता
अराकान आर्मी चिन राज्य के पलेत्वा टाउनशिप पर जनवरी 2024 से नियंत्रण रखती है। पलेत्वा मिजोरम के लॉन्ग्त्लाई जिले से सटा महत्वपूर्ण क्षेत्र है और भारत की प्रमुख कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है। इस परियोजना में सित्वे बंदरगाह से कलादान नदी के रास्ते पलेत्वा तक जल मार्ग और फिर पलेत्वा से मिजोरम के जोरिन्पुई तक सड़क मार्ग शामिल है।
विस्तार
गुवाहाटी से सत्यनारायण मिश्र
म्यांमार की सैन्य सरकार (जुंटा) रखाइन राज्य के सित्वे और पौक्टॉ क्षेत्रों में विद्रोही संगठन अराकान आर्मी (एए) के खिलाफ चलाए गए बड़े आक्रामक अभियान में भारी नुकसान झेल रही है। सितंबर 2026 की शुरुआत में जुंटा की ‘ऑपरेशन 4926’ जैसी कोशिशों में कई कॉलमों को तैनात करने के बावजूद वे पीछे हटने को मजबूर हुए। अधिकारी सूत्रों के अनुसार कई जगहों पर दर्जनों (100 के लगभग) जुंटा सैनिक मारे गए या घायल हुए, शव और घायल छोड़कर वापसी हुई। कमांडर स्तर के नुकसान की भी खबरें हैं। मैग्वे, बागो और आयारवाडी क्षेत्रों में भी एए और सहयोगी समूहों के साथ झड़पें जारी हैं। अराकान आर्मी अब रखाइन के 17 में से 14 टाउनशिप पर प्रभावी नियंत्रण रखती है; सित्वे, क्योकफ्यू और मनाउंग जैसे कुछ ही इलाके जुंटा के पास बचे हैं।
यह घटनाक्रम मिजोरम की सीमा से सीधे जुड़ा है। अराकान आर्मी चिन राज्य के पलेत्वा टाउनशिप पर जनवरी 2024 से नियंत्रण रखती है। पलेत्वा मिजोरम के लॉन्ग्त्लाई जिले से सटा महत्वपूर्ण क्षेत्र है और भारत की प्रमुख कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है। इस परियोजना में सित्वे बंदरगाह से कलादान नदी के रास्ते पलेत्वा तक जल मार्ग और फिर पलेत्वा से मिजोरम के जोरिन्पुई तक सड़क मार्ग शामिल है। परियोजना का अधिकांश म्यांमार खंड अब अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले इलाकों से होकर गुजरता है।
मिजोरम के प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्रों पर प्रभाव
मिजोरम म्यांमार के साथ लगभग 510 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। मुख्य क्रॉसिंग पॉइंट जोखाव्थर (चम्फाई जिला) है, जो तियाऊ नदी के पार म्यांमार के रिखव्दर से जुड़ा है। यहां से चिन राज्य के शरणार्थी समय-समय पर आते रहे हैं। 2025 और 2026 में चिन राज्य में जुंटा और स्थानीय सशस्त्र समूहों के बीच झड़पों तथा हवाई हमलों के बाद कुल मिलाकर करीब 40 हजार चिन शरणार्थी जोखाव्थर, वाफाई और आसपास के गांवों में पहुंचे या रह रहे हैं। कुछ सीमावर्ती गांवों में स्थानीय आबादी से शरणार्थियों की संख्या अधिक हो गई है। हाल में फालाम टाउनशिप में हवाई हमलों के बाद नए समूह भी आए।
लॉन्ग्त्लाई जिले का जोरिन्पुई-पलेत्वा सड़क मार्ग कलादान परियोजना का अंतिम और सबसे संवेदनशील हिस्सा है। अराकान आर्मी ने यहां चेकपॉइंट स्थापित कर वाणिज्यिक यातायात पर करीब 5 प्रतिशत टैक्स वसूली की व्यवस्था बना रखी है। मिजोरम सरकार ने अनौपचारिक सीमा व्यापार और ईंधन-खाद्य पदार्थों की आवाजाही को लेकर चिंता जताई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार म्यांमार सरकार अब इन इलाकों पर नियंत्रण नहीं रखती; ये इलाके अराकान आर्मी के कब्जे में हैं और मिजोरम राज्य सरकार उनके साथ अच्छे संबंध बनाए हुए है, ताकि परियोजना आगे बढ़ सके।
रखाइन मोर्चे पर जुंटा की विफलता और अराकान आर्मी के दबाव से चिन राज्य में संघर्ष और बढ़ सकता है। इससे जोखाव्थर जैसे क्षेत्रों में नए शरणार्थी प्रवाह, सीमा पार गोलियों की आवाज और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। असम राइफल्स और मिजोरम पुलिस सीमा पर सतर्कता बढ़ा चुकी हैं। फ्री मूवमेंट रिजीम को विनियमित रूप में सीमित कर दिया गया है और सीमा बाड़ लगाने की योजना आगे बढ़ रही है, फिर भी छिद्रपूर्ण सीमा और चिन समुदाय से मिजोरम के जातीय संबंधों के कारण पूर्ण नियंत्रण चुनौती बना हुआ है।
सुरक्षा और रणनीतिक आयाम
म्यांमार सेना के कथित तौर पर नगा उग्रवादी गुटों से संबंधों की पुरानी खबरें पूर्वोत्तर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय रही हैं। हालांकि ये गुट मुख्य रूप से सगाइंग क्षेत्र में सक्रिय हैं, सीमा पार नेटवर्क और हथियार तस्करी के रास्ते मिजोरम-मणिपुर सीमा को प्रभावित कर सकते हैं।
कलादान परियोजना भारत की एक्ट ईस्ट नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। सित्वे बंदरगाह और पलेत्वा जेट्टी पूरे हो चुके हैं, लेकिन पलेत्वा-जोरिन्पुई सड़क का निर्माण संघर्ष के कारण बाधित है। 2027 तक परियोजना को पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अराकान आर्मी के नियंत्रित क्षेत्रों में स्थिरता जरूरी है। भारत सरकार और मिजोरम प्रशासन दोनों सीमा निगरानी, शरणार्थी सहायता और द्विपक्षीय सहयोग पर फोकस बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार रखाइन में जुंटा की सैन्य कमजोरी मिजोरम सीमा पर दोहरी चुनौती पैदा कर रही है। एक तरफ शरणार्थी और मानवीय दबाव, दूसरी तरफ कनेक्टिविटी परियोजनाओं की सुरक्षा।
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