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Manipur Violence: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन वक्त की जरूरत

Fri, 21 Jul 2023 04:16 PM IST
Kunal Verma कुणाल वर्मा
Updated Fri, 21 Jul 2023 04:16 PM IST
सार

आज सरकार अपील कर रही है कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करें। पर क्या सरकार यह जवाब दे सकती है कि अगर सोशल मीडिया की ताकत नहीं होती तो क्या प्रधानमंत्री आज बयान देने सामने आते? क्या सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की गंभीरता का पता चल पाता? क्या पूरा देश यह जान पाता कि मणिपुर में स्थिति कितनी भयावह है?

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Manipur Violence: Is President's rule in Manipur the need of the hour?
सरकार अपील कर रही है कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करें। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर में महिलाओं के साथ शर्मनाक और दरिंदगी भरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वहां की राज्य सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है। सोशल मीडिया की शक्ति ही है कि आज प्रधानमंत्री को मणिपुर पर शर्मशार होना पड़ा और राज्यसभा के मानसून सत्र से पहले बयान देना पड़ा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जो भी गुनहगार होंगे उन्हें किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। गुनहगार कौन हैं? कैसे उनका गुनाह तय होगा? उन्हें क्या सजा मिलेगी? यह तो आने वाला समय बताएगा। फिलहाल क्या मणिपुर को बचाने के लिए सरकार वहां राष्ट्रपति शासन नहीं लगा सकती? मणिपुर की बीरेन सरकार अपने दायित्वों को पूरा करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। ऐसे में वहां के लोगों में विश्वास पैदा करने का एकमात्र उपाय राष्ट्रपति शासन है।

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खड़े हो रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल है कि जिस घटना ने प्रधानमंत्री को द्रवित कर दिया, जिस शर्मनाक घटना ने सुप्रीम कोर्ट तक को सकते में डाल दिया क्या उस घटना को मणिपुर सरकार ने अब तक दबाए रखा था? यह सवाल इसलिए लाजमी है क्योंकि घटना 4 मई की है। इसकी एफआईआर भी घटना के करीब दो हफ्ते बाद दर्ज है। उस एफआईआर में विस्तार से पूरी घटना को बताया गया है। ऐसे में यह तो कतई संभव नहीं कि वहां की पुलिस और प्रशासन सहित राज्य सरकार को पूरी घटना की जानकारी न हो।
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आज सरकार अपील कर रही है कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करें। पर क्या सरकार यह जवाब दे सकती है कि अगर सोशल मीडिया की ताकत नहीं होती तो क्या प्रधानमंत्री आज बयान देने सामने आते? क्या सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की गंभीरता का पता चल पाता? क्या पूरा देश यह जान पाता कि मणिपुर में स्थिति कितनी भयावह है?
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सीधा जबाव है - नहीं। राज्य सरकार ने मणिपुर में हिंसा शुरू होते ही राज्य में इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी थी। ऐसे में बहुत कुछ ऐसा है जो वक्त की गर्त में दफन है। आने वाले समय में जैसे-जैसे वहां के लोग बाहर आएंगे, इंटरनेट की सुविधा मिलनी शुरू होगी कई और भी खौफनाक वीडियो सामने आने की आशंका है। हालात अभी वहां सामान्य नहीं हुए हैं। हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना वाजिब है।

क्या इतना भर काफी?

वीडियो वायरल होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह बयान दे रहे हैं कि पीड़ित महिलाओं के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वे बयान ऐसे दे रहे हैं मानो एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर बहुत बड़ा काम कर दिया हो। सवाल पूछा जाना चाहिए कि इतने दिनों से सरकारी तंत्र क्या कर रहा था। क्या वीडियो वायरल होने का इंतजार हो रहा था? या इस बात का इंतजार हो रहा था कि जब पूरा देश खुद को शर्मशार होता देख ले तब हम गिरफ्तारी करेंगे?

केंद्र ने हिंसा शुरू होते ही वहां अपने आब्जॉर्बर नियुक्त कर दिए थे। दिल्ली से अधिकारियों को कमान संभालने के लिए भेज दिया गया था। उन अधिकारियों से भी सवाल पूछा जाना चाहिए कि उन्हें इस हृदय विदारक घटना की जानकारी थी या नहीं? अगर थी तो उसे केंद्र सरकार को क्यों नहीं बताया गया। गृहमंत्री लगातार मणिपुर मामले में बैठक कर रहे हैं, ऐसे में क्या गृहमंत्रालय को भी वास्तविकता से दूर रखा गया?

अब जब सबकुछ सामने है। पूरा देश देख रहा है कि मणिपुर में विभत्स से विभत्स क्या हो सकता है। केंद्र सरकार को और भी कड़ा कदम उठाना चाहिए। राज्य की बीरेन सरकार, उनकी पुलिस और प्रशासनिक अमले पर आरोप लगते आ रहे हैं कि अधिकतर लोग मैतेई समुदाय से ही आते हैं इसीलिए सरकार ने उन्हें खुली छूट दे रखी है। ये आरोप अब हकीकत लगने लगे हैं क्योंकि जिन महिलाओं के साथ यह घटना हुई है वे कुकी समुदाय से आती हैं। उन्हें पुलिस कस्टडी से छुड़ा लेने के बाद निर्वस्त्र घुमाया गया था। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज है।

Manipur Violence: Is President's rule in Manipur the need of the hour?
मणिपुर के लोगों ने हिंसा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। - फोटो : PTI

एफआईआर के अनुसार यह घटना कुकी-जोमी समुदाय से जुड़ी महिलाओं के साथ चार मई को मैतेई बहुल थोबल जिले में हुई थी। यह राजधानी इंफाल से मात्र 35 किलोमीटर दूर है। मणिपुर पुलिस ने महिलाओं के बयान के आधार पर 18 मई को कांगपोकपी जिले में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मामला संबंधित पुलिस थाने में भेज दिया गया। वीडियो में दो महिलाएं ही दिख रही हैं जबकि पीड़िताओं ने बताया है कि एक 50 वर्षीय महिला का भी चीरहरण हुआ था। वीडियो में जो दो महिलाएं दिख रही हैं उनमें से एक की उम्र करीब 20 वर्ष और दूसरी महिला की उम्र 40 वर्ष बताई जा रही है।

पीड़िताओं ने बताया है कि तीन मई को आधुनिक हथियारों से लैस करीब एक हजार लोगों ने उनके गांव पर हमला कर दिया। घरों में आग लगा दी गई थी। दो महिलाएं और युवा महिला अपने पिता और भाई के साथ जंगलों की ओर भागे। पुलिस इन महिलाओं को बचाने में कामयाब भी हुई। पुलिस इन लोगों को थाने लेकर जा रही थी लेकिन थाने से दो किलोमीटर पहले ही भीड़ ने उन्हें रोक लिया।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इन महिलाओं को पुलिस से छीन लिया। युवा महिला के पिता को मौके पर ही मार दिया गया। महिलाओं को भीड़ ने निर्वस्त्र होकर चलने के लिए विवश किया और युवा महिला के साथ सरेआम गैंगरेप किया गया। एफआईआर के मुताबिक जब इस महिला के 19 वर्षीय भाई ने उसे बचाने की कोशिश की तो उसे भी मार दिया गया।

यह तो एक एफआईआर है। अभी न जाने कितने एफआईआर और दरिंदगी की कहानी दफन होगी। चाहे कुकी समुदाय हो या मैतेई समुदाय। आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई है। वैमनस्य की खाई इतनी बड़ी हो चुकी है कि उसे भरने में वर्षों लग जाएंगे। क्या दरिंदगी की इस पराकाष्ठता को देखने के बाद यह जरूरी नहीं कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के खिलाफ कदम उठाए?

जिस राज्य की पुलिस महिलाओं की रक्षा नहीं कर सकी, जिस सरकार के ऊपर जिम्मेदारी है, वह वीडियो वायरल होने के बाद कड़े कदम उठाने का बयान दे रही है। वैसी सरकार पर कैसी मेहरबानी? भारतीय जनता पार्टी के नेता कह रहे हैं कि इस मामले को राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है।

बिल्कुल सही है राजनीति से ऊपर उठकर देखते हुए ही केंद्र सरकार को मणिपुर की भाजपा शासित सरकार को बर्खास्त करते हुए वहां राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए ताकि मैतेई और कुकी दोनों ही समुदाय में विश्वास की थोड़ी उम्मीद जगे। अब जब प्रधानमंत्री सहित सुप्रीम कोर्ट ने भी मणिपुर मामले को गंभीरता से लिया है ऐसे में देश को उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द कोई न कोई हल जरूर निकलेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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