फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   mahakumbh mela sangam leading every road packed and railway station closed

MahaKumbh Traffic Jam: महाकुंभ में जाम और अव्यवस्थाओं का जिम्मेदार कौन?

Mon, 10 Feb 2025 12:20 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:20 PM IST
सार

24 जनवरी के आसपास एकाएक श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती चली गई। यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी। सरकारी आंकड़ों पर विश्वास करें तो 80 लाख से अधिक श्रद्धालु रोजाना आने शुरू हो गए थे, जो मौनी अमावस्या से एक दिन पहले 4 करोड़ से अधिक हो गए।

विज्ञापन
mahakumbh mela sangam leading every road packed and railway station closed
महाकुंभ जाने वाले रास्तों पर भारी जाम। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रयागराज इन दिनों श्रद्धालुओं से पटा पड़ा है। चारों तरफ जाम की स्थिति है। 10-10 घंटे तक लोगों को सड़कों पर फंसे रहना पड़ रहा है। प्रयागराज जाने वाले सभी रूट जाम से जूझ रहे हैं। सबसे बुरी स्थिति स्वयं प्रयागराज शहर की है। आखिर इस जाम और फैली अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन है? यह गंभीर प्रश्न है, क्योंकि उत्तर सरकार ने दावा किया था कि उसकी तैयारी 100 करोड़ लोगों के आने को लेकर है, लेकिन जिस तरह से व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं, सवाल उठाने लाजमी हैं।

विज्ञापन


कुंभ कब शुरू हुआ? इसकी निश्चित तिथि ज्ञात नहीं है। ऐसा माना जाता है कि यह मेला आदिकाल से चला रहा है, जो नक्षत्रों के एक विशेष योग पर प्रत्येक 12 वर्ष पर भारत के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में आयोजित होता है। प्रयागराज में कुंभ सबसे बड़े क्षेत्रफल में लगने वाला मेला है।
विज्ञापन


कुंभ के आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं। प्रयागराज महाकुंभ की तैयारियां योगी सरकार ने डेढ़ से दो साल पहले शुरू कर दी थीं। एक टीम तय कर उसे प्रयागराज में तैनात किया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


योगी सरकार को अंदाजा था कि प्रचार-प्रसार के बढ़े संसाधनों और सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते महाकुंभ में इस बार बहुत अधिक श्रद्धालु आने वाले हैं। यही कारण था कि भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक तैयारियां सरकार ने शुरू कीं। आईसीसीसी यानी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया।

4200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मेला क्षेत्र में 2700 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिटेंस (एआई) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। आईसीसीसी से पुलिस की पूरे मेला क्षेत्र और शहर पर नजर रहती है। 

भीड़ नियंत्रण प्रबंधन से जुड़ी पुलिस-प्रशासन टीम को यह पता होता है कि शहर में कहां और कितने लोग जमा हैं? मेले में कितने लोगों का प्रवेश, किस स्थान से हो रहा है? इस बार महाकुंभ मेले की शुरुआत में 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा और 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर स्नान के बाद सरकार ने अपनी तैयारियों की समीक्षा की और पाया कि सब सही दिशा में चल रहा है। फिर सरकार का पूरा फोकस मौनी अमावस्या पर था, जो सबसे बड़ा स्नान है, जिसकी तैयारियां जोर-शोर से मेला प्रशासन कर रहा था। 

24 जनवरी के आसपास एकाएक श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती चली गई। यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी। सरकारी आंकड़ों पर विश्वास करें तो 80 लाख से अधिक श्रद्धालु रोजाना आने शुरू हो गए थे, जो मौनी अमावस्या से एक दिन पहले 4 करोड़ से अधिक हो गए।

मौनी अमावस्या पर 8 करोड़ ने संगम में डुबकी लगाई। हालांकि, भगदड़ में कई को जान गंवानी पड़ी। मौनी अमावस्या पर पुलिस-प्रशासन का मैनेजमेंट गड़बड़ा गया। मौनी अमावस्या के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने महाकुंभ आने की योजना बदल ली। सबको बसंत पंचमी के बाद की तारीखों का इंतजार था।

बसंत पंचमी के बाद एकाएक महाकुंभ में बाहरी लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। वाहनों का प्रवेश प्रयागराज में बढ़ गया। प्रशासन यह कहता रहा कि प्रयागराज के स्थानीय वाहनों को छोड़कर अन्य स्थानों की गाड़ियां शहर से बाहर पार्क होंगी, लेकिन धरातल पर स्थितियां बदतर होती चली गईं।

आखिर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने पर कैसे उसे नियंत्रित किया जाए? यह सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने होती है। भीड़ के मनोविज्ञान को समझने में कहीं न कहीं प्रशासन से चूक हुई है।

जैसे-जैसे प्रयागराज में भीड़ बढ़ी और जाम की स्थिति उत्पन्न होने लगी, श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा स्थानीय बाइक वाले उठने लगे। चंद किलोमीटर के हजार- हजार या उससे भी अधिक रुपए वसूले जा रहे हैं। आखिर इस लूट का जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन को पता नहीं होगा कि धरातल पर ऐसा चल रहा है।

सबसे विकट स्थिति यह है कि ट्रैफिक कंट्रोल में लगे पुलिस वाले असहाय नजर आते हैं। वो केवल लोगों को परेशान होते देख रहे हैं। अधिकांश पुलिसकर्मियों के बाहरी जिलों के होने के कारण वो लोगों का सहयोग नहीं कर पा रहे हैं। 

श्रद्धालुओं के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए था कि जिन पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में लगती है, उन्हें अच्छे व्यवहार की ट्रेनिंग भी दी जाए। खासकर ऐसे पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए, जिन्हें मेले का भूगोल पता हो।

कुंभ मेले का विस्तार, मेले में सुविधाएं, टेक्नोलॉजी आदि तो ठीक है, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञों की पूर्व की सलाहों को लागू करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि सरकार प्रयागराज महाकुंभ मेले से सबक लेगी और भविष्य में मेला अधिक व्यवस्थित होगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed