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सिंधिया को भाजपा ही सुरक्षित ठिकाना क्यों नजर आता है?

Atul Sinha Atul Sinha
Updated Wed, 11 Mar 2020 01:43 AM IST
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नरेंद्र मोदी-ज्योतिरादित्य सिंधिया
नरेंद्र मोदी-ज्योतिरादित्य सिंधिया

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कुछ साल पहले कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड की देशभर में खासी चर्चा थी। राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जितिन प्रसाद, मिलिंद देवड़ा से लेकर तमाम युवा चेहरों के पार्टी में बढ़ते दबदबे के बीच एक नई कांग्रेस की रूपरेखा बनाए जाने की बात कही जा रही थी, यहां तक कि भाजपा में भी इस युवा नेतृत्व को एक चुनौती की तरह देखा जाने लगा था।
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लेकिन कुछ ही सालों में यह यूथ ब्रिगेड अपनी ही आंधी में बह गई। 2014 चुनाव से पहले राहुल गांधी और उनकी यूथ ब्रिगेड खूब सक्रिय रही, गांव गांव घूमी, जमीनी राजनीति और जनता के सवालों पर धुआंधार प्रचार किया, लेकिन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।




अगले पांच साल इसी उधेड़बुन में निकल गए कि मोदी की आंधी और भगवा लहर को कैसे रोकें। अमित शाह की चाणक्य नीति से कैसे लड़ें। राहुल गांधी यूथ ब्रिगेड के नेता बने रहे, लेकिन उनके बाकी सिपहसालार धीरे धीरे दरकिनार होते रहे।  
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