फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   loksabha election result 2019 pm modi nda congress rahul gandhi

ना प्लानिंग ना रणनीति, मोदी के इस नये तरीके ने भाजपा को दोबारा दिलाई सत्ता

Thu, 23 May 2019 07:17 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Thu, 23 May 2019 07:17 PM IST
विज्ञापन
loksabha election result 2019 pm modi nda congress rahul gandhi
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

अब ये कहना बेमानी होगा कि चुनाव आयोग पर पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान गंभीर सवाल उठाना कितना जायज़ था। लेकिन जिस तरह नतीजों के ऐलान में चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ने तमाम चैनलों को भी पीछे छोड़ दिया, उससे साफ है कि तकनीक के मामले में इस बार आयोग ने पहले से ही जबरदस्त तैयारियां कर रखी थीं। माना ये जा रहा था कि वीवीपैट और ईवीएम के मिलान करने की प्रक्रिया की वजह से इस बार नतीजे देर से आ सकते हैं, लेकिन हुआ इसका उल्टा।

विज्ञापन


रुझानों से ज्यादा तेज नतीजे 
इस बार रुझानों से ज्यादा तेज़ नतीजे देखने को मिल गए। हालत ये हो गई कि तमाम चैनलों ने अपने सूत्रों और एजेंसियों को छोड़कर चुनाव आयोग की वेबसाइट का सहारा लिया और हालत ये हो गई कि कई बार आयोग की वेबसाइट खुलनी ही बंद हो गई। तो क्या ये मान लिया जाए कि एग्जिट पोल के नतीजों के साथ ही चुनाव आयोग ने उसी तर्ज़ पर अपने आंकड़े तैयार कर लिए थे?
विज्ञापन


बहरहाल, आयोग पर सवाल उठाने और संवैधानिक संस्थाओं पर मोदी सरकार के कब्ज़े जैसी शिकायतों को लेकर इसबार विपक्ष के नेता भी सामने नहीं आए। इन नतीजों ने मानो सबकी बोलती बंद कर दी। कांग्रेस दफ्तर सन्नाटे में डूबा रहा। नेताओं के पास नतीजों पर बोलने के लिए शब्द नहीं थे। बस ज्यादातर लोग यही कहते पाए गए कि इस बार मोदी की ऐसी लहर का अंदाजा किसी को नहीं था। शाम को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेहद संक्षिप्त प्रेस कांफ्रेंस में जीत के लिए मोदी को बधाई दी, लेकिन कार्यकर्ताओं से बस इतना कहा कि घबराएं नहीं, और इस विचारधारा की लड़ाई में साथ दें। अमेठी में हार को भी उन्होंने जनता का फैसला करार देकर स्मृति ईरानी को भी बधाई दे दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

loksabha election result 2019 pm modi nda congress rahul gandhi
अक्सर ये कहा जाता है कि जंग (चुनाव) जीतने के लिए सबकुछ जायज़ है। महाभारत काल से जीत के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति को जायज़ बताया गया है। - फोटो : PTI

बीजेपी ने ऐसा क्या कमाल किया? 
पिछले कुछ सालों से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और मोदी के अहंकार की भी खूब चर्चा रही और अनौपचारिक बातचीत में बीजेपी के निचले स्तर के कार्यकर्ता भी इसे कबूल करते पाए गए। यहां तक कि ये भी आशंका जताई गई कि अगर मोदी दोबारा आ गए तो सभी संवैधानिक संस्थाओं की बची खुची अस्मिता और स्वतंत्रता भी खत्म हो जाएगी। लेकिन इन नतीजों ने इन सारी आशंकाओं को निर्मूल साबित कर दिया। अगर आप वोट प्रतिशत के आंकड़े देखें तो भी ताज्जुब करेंगे कि आखिर बीजेपी ने ऐसा क्या कमाल किया कि उसका वोट प्रतिशत 50 फीसदी के पार पहुंच गया। यानी आधा देश उसने अपने साथ खड़ा कर लिया।

अक्सर ये कहा जाता है कि जंग (चुनाव) जीतने के लिए सबकुछ जायज़ है। महाभारत काल से जीत के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति को जायज़ बताया गया है। अगर ऐसे में बीजेपी ने वह रास्ता भी अपनाया तो भी इतनी बंपर जीत के बाद आप उसपर ये आरोप भी नहीं लगा सकते। तो क्या पिछले पांच सालों में जनता के मन में मोदी जी के ‘मन की बात’ इस कदर बैठ गई या उनके भाषणों का अंदाज़ या ‘देशभक्ति’ का उनका तरीका लोगों को इतना पसंद आ गया कि उन्हें देश ने फिर से पहले से भी मज़बूती के साथ सत्ता दे दी? या फिर कांग्रेस या विपक्ष अपनी मौत खुद मारा गया?

देखना होगा गौर से? 
अब अगर आप विश्लेषण करें तो साफ हो जाएगा कि मोदी के लिए राहुल का राफेल राग फायदेमंद साबित हो गया। राहुल राफेल में उलझे रह गए और मोदी को बहस की चुनौती देते रह गए, लेकिन मोदी ने चुप्पी साधते हुए उन्हें उसी मुद्दे में उलझे रहने देना बेहतर समझा। मोदी और अमित शाह को ये पता है कि इस देश की जनता के लिए राफेल मुद्दा नहीं हो सकता और न ही इस देश की जनता अपने प्रधानमंत्री के लिए बार बार सार्वजनिक मंच से ‘चोर’ जैसा शब्द सुन सकती है। मोदी जब सत्ता में पहली बार आए थे तबसे ही उन्होंने 2024 तक की बात करना शुरू कर दिया था। इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी पहले दिन से शुरू कर दी थी। 

loksabha election result 2019 pm modi nda congress rahul gandhi
इन नतीजों ने इतना तो तय कर ही दिया है कि आने वाले पांच सालों के लिए देश एक बार फिर कुछ बड़े फैसलों, नीतियों और मुद्दों के साथ आगे बढ़ेगा। - फोटो : Social media

‘मोदी है तो मुमकिन है’
इसके लिए उन्होंने आकाशवाणी और प्रसार भारती के मंचों का इस्तेमाल किया, अपने तमाम देशी विदेशी कार्यक्रमों को इवेंट की तरह करते हुए लोगों के घरों में और दिमाग में लगातार बने रहे और तमाम मीडिया संस्थानों को इसके लिए मजबूर कर दिया कि वे उनके और उनकी योजनाओं के साथ चलें। नीति आयोग से लेकर चुनाव आयोग तक, तमाम अकादमियों से लेकर सरकारी संस्थाओं तक में उन्होंने अपने तरीके की कार्य संस्कृति को विकसित किया। इसी का ज़िक्र कांग्रेस और विपक्ष बार-बार करता रहा। लेकिन मोदी के लिए विरोध का कोई मायना नहीं है। ‘मोदी है तो मुमकिन है’ जैसे नारे और लोगों के भरोसे को उन्होंने आम जनता के मन में उतार दिया। पुलवामा और बालाकोट के बाद तो उनके अभियान का फोकस ही बदल गया।

आप कुछ भी कहते रहिए लेकिन? 
अब आप ये आरोप लगाते रहिए कि चुनाव आयोग मोदी के इशारों पर चलता रहा, आचार संहिता की धज्जियां उड़ती रहीं और वो खामोश रहा। लेकिन इतने लंबे चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने अपनी अंदरुनी व्यवस्थाएं और तकनीकी तैयारियां किस हद तक कर रखी थीं, उसकी साफ झलक आज जल्दी आ गए चुनाव नतीजों के दौरान देखने को मिल गई। हार-जीत की समीक्षाएं चलती रहेंगी और मोदी सरकार को लेकर आशंकाओं और उम्मीदों से जुड़ी बहसें भी होती रहेंगी, लेकिन इन नतीजों ने इतना तो तय कर ही दिया है कि आने वाले पांच सालों के लिए देश एक बार फिर कुछ बड़े फैसलों, नीतियों और मुद्दों के साथ आगे बढ़ेगा। जाहिर है लोगों ने बहुत उम्मीद के साथ मोदी को एक मौका और दिया है कि जो सपने उन्होंने दिखाए हैं, शायद अब वो पूरे हो जाएं।     
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed