फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Lok Sabha Election 2024: The Game Of Big Name Candidates From Madhya Pradesh In Upcoming Lok Sabha Election

मप्र: लोस उम्मीदवारी के लिए बड़े नामों को उछालने का खेल...!

Tue, 30 Jan 2024 03:59 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Tue, 30 Jan 2024 03:59 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में लोकसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारी के लिए बड़े नामों को उछालने का दिलचस्प खेल शुरू हो चुका है। इसलिए भी कि मामला दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ा है। मजेदार बात यह है कि इस संभावित उम्मीदवारी पर वो लोग ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं, जिनके नाम चलने शुरू हो गए हैं। ऐसे में लोग इस ‘ब्रेकिंग न्यूज’ के पीछे की रणनीति भांपने की कोशिश की जा रही है कि गणित क्या है।

विज्ञापन
Lok Sabha Election 2024: The Game Of Big Name Candidates From Madhya Pradesh In Upcoming Lok Sabha Election
क्या यह नामों की आड़ में निपटाने का खेल है या फिर चुनावी चुनौती को धारदार बनाने का दांव है? - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

विपक्षी पार्टियों के इंडिया गठबंधन में दरार और 15 राज्यों की 56 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के एलान के साथ ही मध्यप्रदेश में लोकसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारी के लिए बड़े नामों को उछालने का दिलचस्प खेल शुरू हो चुका है। इसलिए भी कि मामला दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ा है। मजेदार बात यह है कि इस संभावित उम्मीदवारी पर वो लोग ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं, जिनके नाम चलने शुरू हो गए हैं। ऐसे में लोग इस ‘ब्रेकिंग न्यूज’ के पीछे की रणनीति भांपने की कोशिश की जा रही है कि गणित क्या है।

विज्ञापन


क्या यह नामों की आड़ में निपटाने का खेल है या फिर चुनावी चुनौती को धारदार बनाने का दांव है? क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और अब भाजपा विधायक शिवराज सिंह चौहान की संभावित उम्मीदवारी का एलान केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के मुख से कराया गया तो दूसरी तरफ एक और पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का नाम भी लोकसभा चुनाव के लिए संभावित प्रत्याशी के रूप में चलाया गया, जिसका दिग्विजय सिंह ने यह कहकर खंडन कर दिया कि अभी तो मैं राज्यसभा में हूं।
विज्ञापन


मध्यप्रदेश के करीब 18 साल तक सीएम रहे शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक भविष्य और उनकी अपनी पार्टी भाजपा में उनकी हैसियत को लेकर दो महीने से लगातार सवाल उठ रहे हैं। कभी कहा गया कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है तो कभी बताया गया कि शिवराज अब दक्षिणी राज्यों में भाजपा को मजबूत बनाने में जुट गए हैं। वैसे मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा की बंपर जीत के बाद शिवराज ने परोक्ष रूप से पांचवी बार भी अपनी दावेदारी यह कहकर जताई थी कि उनका लक्ष्य अब मप्र की सभी 29 लोकसभा सीटों पर विजय का हार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट करने का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विस चुनाव में जीत के तुरंत बाद उन्होंने उस छिंदवाड़ा जिले की यात्रा की, जो शेष राज्य में भगवा लहर के बावजूद कांग्रेस के पंजे में ही रहा था। गौरतलब है कि छिंदवाड़ा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ 40 सालों से है। शिवराज ने छिंदवाड़ा जाकर यह संदेश देने की कोशिश की थी कि वो असंभव को संभव बनाने के लिए ही यहां आए हैं। ऐसे में यह अटकलें जोर पकड़ने लगी थीं कि इस बार राज्य की 29वीं सीट भी जीतने के मकसद से पार्टी शिवराज को छिंदवाड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी बना सकती है। 

इसी अटकल को बल मिला केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले के भोपाल में दिए बयान से। आठवले खुद भाजपा में नहीं हैं, लेकिन उनका दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए का सदस्य है। उन्होंने भाजपा के मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता की और ऐलान कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मप्र में अच्छा काम किया, इसीलिए उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर कास्ट को न्याय देना था इसीलिए वे नया ओबीसी चेहरा सामने लाए। आठवले ने दावे से कहा कि शिवराज सिंह चौहान पहले दिल्ली और आगे मोदी मंत्रिमंडल में आएंगे। 

Lok Sabha Election 2024: The Game Of Big Name Candidates From Madhya Pradesh In Upcoming Lok Sabha Election
कहीं से यह सुरसुरी फैलाई गई कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं - फोटो : अमर उजाला

कैबिनेट मंत्री बनाकर उनका आदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।' चूंकि यह बात भाजपा मीडिया सेंटर में एक गैर भाजपा नेता ने कही, इसका सीधा अर्थ यही है कि शिवराज की संभावित उम्मीदवारी का एलान सोची समझी रणनीति के तहत रामदास आठवले के मुंह से कराया गया। क्योंकि आठवले की बात का न तो किसी भाजपा नेता ने खंडन किया और न ही स्वयं शिवराज की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया आई।

वैसे अगर चुनाव लड़ना ही पड़ा तो शिवराज की पहली पसंद तो उनकी अपनी पुरानी लोकसभा सीट विदिशा होगी, लेकिन पार्टी हाइकमान उन्हें इतनी आसान सीट से लड़ाएगा, इसकी संभावना कम ही है। अगर शिवराज को छिंदवाड़ा से उतारा गया तो मुकाबला वाकई कांटे का होगा और आश्चर्य नहीं कि शिवराज कमलनाथ पर भारी पड़ जाएं। और शिवराज को तगड़ी टक्कर देने के लिए छिंदवाड़ा से अपने बेटे नकुलनाथ को उतारने की जगह खुद को मैदान में उतरना होगा।

दूसरा मामला एक दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का है। कहीं से यह सुरसुरी फैलाई गई कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इसके पीछे कांग्रेस की यह रणनीति बताई जाती है कि मप्र में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा  द्वारा कई सांसदों और बड़े चेहरों को मैदान में उतारने का भाजपा को काफी फायदा हुआ। ऐसे अधिकांश प्रत्याशी खुद तो जीते ही, आसपास की सीटों को भी जितवाया। लिहाजा कांग्रेस इसी फार्मूले को अब लोकसभा चुनाव में अप्लाई करना चाहती है।

ऐसे में कांग्रेस में सबसे बड़ा नाम तो दिग्विजय सिंह का ही है। गौरतलब है कि 2019 में मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में एक पत्रकार वार्ता में एलान किया था कि दिग्विजय सिंह को किसी मुश्किल सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहिए। चाहें तो वो भोपाल से लड़ सकते हैं। कमलनाथ के उस बयान में आग्रह के साथ आदेश भी था। 

यह ऐलान दिग्विजय सिंह की सहमति से हुआ था या नहीं, यह कभी साफ नहीं हुआ। एलान हो जाने के बाद दिग्विजय सिंह के लिए पीछे हटना संभव नहीं था। यह जानते हुए भी भोपाल लोस सीट पिछले 35 सालों से भाजपा का अभेद्य दुर्ग बनी हुई है। फिर भी दिग्विजय सिंह ने यहां से चुनाव लड़ने का जोखिम उठाया और वो एक एक अल्पज्ञात भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से साढ़े तीन लाख वोटों से हार गए।

इस बार चर्चा चली कि दिग्विजय सिंह को अपनी पुरानी लोकसभा सीट राजगढ़ से फिर लड़ना चाहिए। क्योंकि वो पूर्व में दो बार इस सीट से लोकसभा जीत चुके हैं और अभी भी वहां से कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने की तैयारी में जुट गए हैं। जहां तक खुद उनके अपने चुनाव लड़ने की बात है तो लगता है कि दिग्विजय जमीनी हालात को समझ गए हैं। 

इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने की अटकलों को यह कहकर खारिज कर दिया कि उनका राज्यसभा का सवा दो साल का कार्यकाल अभी बाकी है। वैसे इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनो पार्टियां लोकसभा में दिग्गज चेहरे उतारने के मूड में ज्यादा हैं।

इसकी एक वजह तो कोप भवन में बैठे पार्टी प्रत्याशियों को मुख्यधारा में लाना और हैवी वेट कैंडिडेट के रूप में उन्हें चुनाव मैदान में उतारना है ताकि जीत सुनिश्चित की जा सके। इनमें कुछ विस चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी भी हो सकते हैं। भाजपा राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने की फिराक में है तो कांग्रेस अपनी परंपरागत छिंदवाड़ा सीट बचाने के साथ-साथ कुछ दूसरी सीटें जीतने की उम्मीद बांधे हुए है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed