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राजस्थान से ग्राउंड रिपोर्टः कांग्रेस से मिल रही चुनौती के बीच कहां खड़ी है भाजपा?

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Fri, 26 Apr 2019 05:40 PM IST
राजस्थान भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि 2014 में भाजपा की सफलता का दर यहां 100 प्रतिशत थी।
राजस्थान भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि 2014 में भाजपा की सफलता का दर यहां 100 प्रतिशत थी। - फोटो : Twitter
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राजस्थान भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि 2014 में भाजपा की सफलता की दर यहां 100 प्रतिशत थी। पार्टी ने उस समय राज्य की सारी 25 सीटें जीत ली थीं जबकि कांग्रेस राज्य में शून्य पर आ गई थी। लेकिन अब पार्टी के लिए इस सफलता को बनाए रखना काफी मुश्किल है। राज्य में बीजेपी के पास कुछ ठोस मुद्दा नहीं दिखाई देता, लिहाजा पार्टी राष्ट्रवाद की भावनाओं के बल पर ही चुनाव जीतना चाहती है। 
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25 में से 18-20 जीतने की कवायद
बहरहाल, बीजेपी की लहर यहां धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई। 2018 की शुरुआत में 2 लोकसभा सीटों अजमेर और अलवर में उपचुनाव हुए। ये दोनों सीट भाजपा के पास थी। दोनों सीट भाजपा हार गई। कांग्रेस ने दोनों सीटों पर जोरदार जीत हासिल की। 2018 के अंत में राज्य में विधानसभा चुनाव हुए। कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीन ली। हालांकि विधानसभा चुनाव में जिस सफलता की उम्मीद कांग्रेस लगाई बैठी थी, वो सफलता नहीं मिली, जिस तरह से राज्य और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच राजस्थान में असंतोष था वो वोट में तब्दील नहीं पाया। 

बहरहाल, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अंदाज लगाया गया था कि कांग्रेस विधानसभा की 200 में से 130 के करीब सीटें जीत लेगी। लेकिन चुनाव परिणामों में कांग्रेस को सिर्फ 99 सीटें हाथ आईं। वहीं भाजपा ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। भाजपा को 73 सीटें मिली। छोटी पार्टियों और निर्दलीय ने भी ताकत दिखाई। 13 निर्दलीय जीते। 2014 में लोकसभा चुनावों से पहले 2013 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में भाजपा की लहर थी। भाजपा को 200 में से 162 सीटें आईं थी। कांग्रेस 21 पर सिमट गई थी। यह लहर 2014 में बरकरार थी।

लोकसभा की सारी सीटें भाजपा के पाले में आई। लेकिन 2018 में कांग्रेस के सता में आने के बाद ठीक उसी तरह का लाभ 2019 में कांग्रेस को मिलेगा, इस पर शंका है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा को राजस्थान में 10 सीटें गंवानी पड़ सकती है। इन परिस्थितियों में नुकसान भाजपा को ही है। 

कांग्रेस बन रही है बीजेपी के लिए चुनौती 
दरअसल, सारे राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि किसी भी पार्टी के लिए 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट को बरकरार कठिन है। बीते कुछ महीनों में अशोक गहलोत सरकार के कुछ फैसलों ने कांग्रेस का ग्राफ बढ़ाया है। इसमें किसानों की ऋण माफी शामिल है। भाजपा की चिंता यह है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को राजस्थान में 55 प्रतिशत मत मिले थे, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 38.8 प्रतिशत रह गए। उधर कांग्रेस का मत प्रतिशत 2014 के लोकसभा चुनावों के 30 प्रतिशत के मुकाबले 2018 के विधानसभा चुनाव में 39.3 प्रतिशत हो गया। 

भाजपा की कोशिश है कि किसी तरह से 2018 के विधानसभा में मिले मत प्रतिशत में सुधार किया जाए। ताकि भाजपा 18-20 सीट जीतने में कामयाब हो जाए। यही कारण है कि भाजपा ने जाट नेता हनुमान बेनीवाल के लिए नागौर सीट छोड़ी है। गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को भाजपा में शामिल करवाया है, लेकिन राहुल गांधी के किसान ऋण माफी और गरीब परिवारों के 72 हजार रुपये सलाना आर्थिक सहायता की घोषणा ने भाजपा के नाक में दम कर दिया है।   
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