फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   lok sabha chunav 2019 mp bhopal sadhvi pragya and digvijay singh hindutv bjp and congress

भोपाल में बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड दिग्विजय सिंह के लिए चुनौती बनेगा या राह करेगा आसान ?

krishanmohan jha कृष्णमोहन कुमार झा
Updated Mon, 22 Apr 2019 07:31 PM IST
विज्ञापन
lok sabha chunav 2019 mp bhopal sadhvi pragya and digvijay singh hindutv bjp and congress
साध्वी प्रज्ञा-दिग्विजय सिंह पर पूरे देश की निगाहें हैं। - फोटो : PTI

कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद हाई प्रोफ़ाइल हुए इस सीट पर भाजपा में यह खलबली मची थी कि आखिर पार्टी का कौन सा नेता उन्हें चुनावी मैदान में कड़ी टक्कर देने में सक्षम हो सकता है। पार्टी के अंदर बहुत से नामों पर विचार किया गया ,परन्तु किसी पर सहमति नहीं बन सकी तो कोई स्वयं ही दिग्विजय सिंह की चुनौती स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ।

विज्ञापन


अंत में यह चुनौती स्वीकारी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने, जिन्होंने भोपाल से पार्टी प्रत्याशी बनने के लिए दो दिन पूर्व ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। साध्वी प्रज्ञा ने पहले ही पार्टी नेताओं के समक्ष अपनी यह इच्छा व्यक्त की थी कि वह दिग्विजय सिंह के सामने भोपाल से खड़ा होना चाहती हूं। 

विज्ञापन


संघ ने लिया साध्वी पर फैसला 

दरअसल, प्रज्ञा भारती को भोपाल से उम्मीदवार बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं संघ ने महती भूमिका निभाई है, जिसके कारण ही उन्हें भाजपा ने भोपाल से उम्मीदवार बनाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि दिग्विजय के मुकाबले के लिए भाजपा ने सक्षम उम्मीदवार चुनने में इतना अधिक वक्त लगाया कि विपक्ष सहित मतदाता भी इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में देखने लगे हैं। लगभग 20 से दिनों के मंथन के बाद पार्टी ने साध्वी प्रज्ञा पर दांव लगाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि प्रज्ञा भाजपा की न तो प्राथमिक सदस्य रही है और न ही उन्हें स्थानीय कहा जा सकता है ,लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सभी पार्टी कार्यक्रताओं का पूरा सहयोग मिलेगा। साध्वी प्रज्ञा भारती का यह आत्मविश्वास अपनी जगह सही है, परन्तु पार्टी भी इस हकीकत से वाकिफ है कि भोपाल जैसी हाईप्रोफाइल सीट पर उसे अपना उम्मीदवार तय करने में  वक्त लगाकर उसने कांग्रेस को चुनावी तैयारी करने में परोक्ष मदद की है। 

lok sabha chunav 2019 mp bhopal sadhvi pragya and digvijay singh hindutv bjp and congress
दिग्विजय सिंह साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ अपनी रणनीति बना चुके हैं। - फोटो : Social media

दिग्विजय सिंह तय कर चुके थे अपनी रणनीति
भाजपा ने जब  साध्वी प्रज्ञा को अपना उम्मीदवार घोषित किया तब तक दिग्विजय सिंह चुनव जीतने के लिए अपनी रणनीति तय कर चुके थे और चुनावी मैदान में अपनी व्यूह रचना को अंतिम रूप देने में भी वे सफल होते दिख रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी की घोषणा में हुआ अप्रत्याशित एवं आश्चर्य जनक विलंब पार्टी कार्यकताओं के लिए भी उलझन का कारण बना रहा है।

दरअसल, कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे थे कि जब पार्टी का नेतृत्व यहां से प्रत्याशी तय करने में इस तरह अनिर्णय का शिकार बना हुआ है तब उनसे ऐसी अपेक्षा कैसे की जा सकती है कि वे पार्टी के प्रचार अभियान में अपना योगदान जोर शोर से देते रहे। इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी ने शुरू में ही पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता दिग्विजय को भोपाल सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया,जिसके बाद पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में उमंग और उल्लास की लहर दौड़ गई और वे बिना देरी किए पार्टी के प्रचार अभियान में जुट गए थे। यही कारण है कि 1991 से ही भाजपा का गढ़ बनी हुए भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस की चुनौती ने भाजपा को चिंता में डाल रखा है।

lok sabha chunav 2019 mp bhopal sadhvi pragya and digvijay singh hindutv bjp and congress
चुनाव प्रचार की कमान शिवराज सिंह चौहान के हाथों में है। - फोटो : Amar Ujala

शिवराज सिंह के हाथ में है प्रचार की कमान 
राज्य की पूर्ववती भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जो मौजूदा चुनाव में राज्य में पार्टी के प्रचार अभियान की बागडौर थामे हुए हैं, ने सभी पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से साध्वी को जिताने के लिए आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होने की अपील की है, परन्तु वे भी इस सच्चाई से अनजान नहीं है कि देरी से प्रत्याशी घोषित होना जीत की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।  
 

हालांकि भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा को भोपाल सीट से उतारकर मुकाबले को हार्डकोर हिंदुत्व बनाम सॉफ्ट हिंदुत्व में बदल दिया है, जिससे दिग्विजय सिंह एवं कांग्रेस पार्टी दूरी बनाकर चल रही थी। अब साध्वी के मैदान में आने के बाद हिंदुत्व के मुद्दे से कांग्रेस एवं दिग्विजय सिंह को दो चार होना ही पड़ेगा। साध्वी प्रज्ञा की गिनती दिग्विजय सिंह के प्रमुख आलोचकों में होती है। उन्होंने टिकट मिलने के बाद कहा भी था कि यह चुनाव नहीं बल्कि धर्मयुद्ध है।

उधर, दिग्विजय सिंह ने बड़े ही सधे ही अंदाज में कहा कि साध्वी जी "जो बोले उन्हें बोलने दें" यह उनका हक है। मै मां नर्मदा से प्राथना करता हूं कि हम सब सत्य अहिंसा एवं धर्म के मार्ग पर चलें। इधर दिग्विजय सिंह ने गत् वर्ष नर्मदा परिक्रमा कर एवं विगत् दिनों में विभिन्न मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर पूजा कर अपनी छवि सॉफ्ट हिंदुत्व की कोशिश की है। उन्हें विश्वास है कि चुनाव में उनकी यह छवि मतदाताओं का विश्वास जीतने में सहायक साबित होगी।

गौरतलब है कि केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भगवा आतंकवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाले कांग्रेस नेताओं में दिग्विजय सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इसीलिए संघ की विशेष पहल पर दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को उतारा गया है, जो कट्टर हिंदुत्व में अपनी आस्था को उजागर करने में कोई संकोच नहीं करती हैं।    

lok sabha chunav 2019 mp bhopal sadhvi pragya and digvijay singh hindutv bjp and congress
चुनाव के नजरिये से भोपाल सीट अब अब हाईप्रोफाइल हो चुकी है। - फोटो : Twitter

पूरे देश की नजरें टिकी हैं भोपाल पर

भोपाल लोकसभा सीट अब हाईप्रोफाइल होने के कारण इसके चुनाव परिणाम पर अब सारे देश की नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा  को उम्मीदवार बनाकर वोटो के ध्रुवीकरण का जो प्रयास किया है उसमे उन्हें कितनी सफलता मिलती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन जिस तरह से साध्वी प्रज्ञा ने इसे धर्मयुद्ध करार दिया है उससे तो यही अनुमान अब लगाया जा रहा है कि भाजपा यहां हिंदुत्व के मुद्दे को प्रमुखता से अपने प्रचार का हिस्सा बनाएगी।

साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह के वादे 
वैसे साध्वी ने यह भी कहा है कि भोपाल को एजुकेशन हब बनाने एवं विकास एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि के साथ ही अपराधों की रोकथाम उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होगी। दूसरी और कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने भोपाल को केपिटल रीजन का निर्माता, शहर के आसपास सेटेलाइट टाउनशिप का विकास, भोपाल से लगे सीहोर में मेडिकल कालेज एवं भोपाल को किसान हब बनाने के साथ -साथ महिलाओं की सुरक्षा को अपने विजन डॉक्युमेंट में प्रमुखता से शामिल किया है।

कुल मिलाकर भोपाल में पिछले तीन दशक से जो एक पक्षीय मुकाबला देखने को मिलता था वह अब नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि भाजपा की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि जब कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह का चुनावी अभियान पूरी तरह जोर पकड़ चूका है तब भाजपा को अपने अभियान का श्रीगणेश करना है ,लेकिन पार्टी को बूथ स्तर तक फैले अपने कार्यकर्ताओ पर पूरा भरोसा है। अतः अब देखना है कि भाजपा उन्हें कितनी जल्दी तैयार कर पाती है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed