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कुरुक्षेत्र: हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के ध्वजवाहक योगी को संघ का पूर्ण संरक्षण, इस बार नेतृत्व शून्यता नहीं चाहता आरएसएस

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Fri, 04 Jun 2021 08:34 PM IST

सार

संघ दूरगामी योजना के तहत हर फैसला लेता है जबकि भाजपा या कोई भी राजनीतिक दल तत्कालिक आवश्यकताओं के मुताबिक अपने निर्णय लेते हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ को उसके बाद लोकसभा और विधानसभा के जितने भी चुनाव हुए पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में स्टार प्रचारक बनाकर प्रचार के लिए भेजा गया। जैसे कभी मोदी को भेजा जाता था...
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योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ - फोटो : PTI
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विस्तार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभयदान दे दिया है। लेकिन साथ ही संघ का यह भी मानना है कि योगी को भी अपने रुख में थोड़ा नरमी लाते हुए विधान परिषद सदस्य अरविंद कुमार शर्मा को अपने मंत्रिमंडल में उचित स्थान देना चाहिए। जबकि सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी अरविंद कुमार शर्मा को अधिक से अधिक अपने मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बनाने को राजी हैं, वहीं केंद्रीय नेतृत्व शर्मा को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ साथ उन्हें गृह एवं गोपन नियुक्ति जैसा अहम विभाग देने के पक्ष में है जिससे उत्तर प्रदेश की नौकरशाही पर अंकुश लग सके और तालमेल व समन्वय बेहतर हो सके।
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लेकिन योगी और उनके समर्थक इसमें राज्य में समानांतर सत्ता का नया शक्ति केंद्र बनने का खतरा देखते हैं। माना जा रहा है कि संघ नेतृत्व पिछले चार-पांच महीने से चल रही इस खींचतान में बीच का रास्ता निकालना चाहता है। राजधानी में चल रही भारतीय जनता पार्टी के मातृ संगठन और वैचारिक गंगोत्री माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश को लेकर हुई चर्चा का यही निष्कर्ष निकलकर आया है।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नजदीक से समझने और देखने वाले एक हिंदुत्ववादी विचारक के मुताबिक दरअसल योगी आदित्यनाथ को संघ ने अपने वीटो का इस्तेमाल करके अपनी एक वृहद योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की कमान तब सौंपी थी, जब 2017 में न तो योगी के नाम पर उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ा गया था और न ही उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था। बल्कि सबसे ज्यादा नाम तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के लिए जा रहे थे।

लेकिन संघ नेतृत्व ने आखिरी वक्त में अपने वीटो का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की सलाह दी, जिससे मौर्य और सिन्हा दोनों पीछे छूट गए थे और योगी आदित्यनाथ की लखनऊ में आपात लैंडिग हो गई थी। क्योंकि संघ योगी को उसी तरह मोदी युग के बाद की भाजपा के शीर्ष नेता के रूप में तैयार कर रहा है जैसे कि वाजपेयी आडवाणी युग की भाजपा के बाद नरेंद्र मोदी को संघ ने आगे किया।

संघ दूरगामी योजना के तहत हर फैसला लेता है जबकि भाजपा या कोई भी राजनीतिक दल तत्कालिक आवश्यकताओं के मुताबिक अपने निर्णय लेते हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ को उसके बाद लोकसभा और विधानसभा के जितने भी चुनाव हुए पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में स्टार प्रचारक बनाकर प्रचार के लिए भेजा गया। जैसे कभी मोदी को भेजा जाता था।
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