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जन्मदिन विशेष: ‘जब किशोर कुमार खंडवा वाले ने बनारस वाला पान खाया!’

Thu, 03 Aug 2023 10:39 AM IST
Shakeel Khan शकील खान
Updated Thu, 03 Aug 2023 10:39 AM IST
सार

अगले सप्ताह की शुरूआत में दर्शकों को एक फिल्म में एक नया गाना सुनने को मिलता है, जो पिछले सप्ताह फिल्म में नहीं था। एक हफ्ते में गाना लिखकर, संगीतबद् कर शूट भी कर लिया गया और फिल्म में आ भी गया? कैसे संभव है? सवाल सही है, लेकिन सब्र कीजिए, आगे आपके सवाल का जवाब मिलेगा, जरूर मिलेगा।

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Kishore kumar Birthday: The story behind of song Khaike Pan Banaras wala
अगले सप्ताह की शुरूआत में दर्शकों को एक फिल्म में एक नया गाना सुनने को मिलता है। - फोटो : file photo

विस्तार

ये किस्सा एक मशहूर फिल्म से जुड़ा है। हुआ यूं कि पहले से गहरे कर्ज में डूबे एक फिल्म निर्माता, बोझ कम करने के लिए एक और फिल्म बनाने करने का निर्णय लेते हैं। स्वाभाविक था कि फिल्म निर्माण के दौरान कर्ज और बढ़ता, सो बढ़ा। फिल्म ठीक-ठाक बन रही है। लेकिन वो क्या है न मुसीबत हमेशा दबे पांव आती है और सिर पर चढ़कर नाचती है। निर्माता के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। एक और फिल्म के सेट पर एक दुर्घटना हुई, जिसमें निर्माता की मौत हो गई।

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कर्ज अदायगी तो पहले ही मुश्किल थी, अब असंभव हो गईं। लेकिन जहां चाह, वहां राह। कुछ शुभचिंतकों का सहारा मिला, कुछ हौसला खुद जुटाया और पत्नी ने हताश होकर बैठने के बजाए फिल्म पूरी करने की ठानी। निर्देशक ने दिल से साथ दिया। फिल्म बनकर तैयार हो गई। बढ़िया, लेकिन मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं। फिल्म प्रदर्शित हुई और पहले हफ्ते में ही फ्लॉप घोषित हो गई। दर्शकों ने फिल्म को नकार दिया।
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अब फिल्म की टीम एक निर्णय लेती है। अगले सप्ताह की शुरूआत में दर्शकों को एक फिल्म में एक नया गाना सुनने को मिलता है, जो पिछले सप्ताह फिल्म में नहीं था। एक हफ्ते में गाना लिखकर, संगीतबद् कर शूट भी कर लिया गया और फिल्म में आ भी गया? कैसे संभव है? सवाल सही है, लेकिन सब्र कीजिए, आगे आपके सवाल का जवाब मिलेगा, जरूर मिलेगा।
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गाने ने मचाया धमाल

बहरहाल, गाने ने तो आते ही धमाल कर दिया, डूबते शरीर में जान डाल दी, मुर्दे को चिता से उठाकर खड़ा कर दिया। पिछले एक हफ्ते से दर्शकों के लिए तरस रही फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की लंबी कतार लगने लगीं। बॉक्स ऑफिस पर पैसों की झड़ी लगना जो शुरू हुई तो हफ्तों नहीं थमी। आगे चलकर तो फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस के ढेरों रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि सुपर-डुपर हिट का तमगा भी अपनी कलगी में सजा लिया। फिल्म ने लागत से कई गुना ज्यादा कमाया, इतना कि निर्माता की पत्नी के न सिर्फ सारे कर्ज उतर गए बल्कि उनकी जिंदगी पटरी पर सरपट दौड़ने भी लगी।

ऐसा क्यों हुआ? सवाल के जवाब में एंट्री होती है एक आवाज की, जादू जगाने वाली आवाज की, किशोर कुमार की आवाज की। ये गाना हमारे बंगाली बाबू किशोर ने ही तो गाया था। ये था किशोर कुमार की सदाबहार आवाज का जादू, जिसने एक डूबती, फ्लॉप घोषित हो चुकी फिल्म को ऑल टाइम सुपर हिट फिल्म में तबदील कर दिया। फिल्म के निर्माता थे नरीमन ईरानी और डायरेक्टर थे चंदा बारोट।
 

गाना था - "खईके पान बनारस वाला खुलि जाए बंद अकल का ताला "। 


अब आपको अलग से यह बताने की ज़रूरत तो नहीं है न कि ये फिल्म थी, अमिताभ स्टारर ‘डान’। जो उस दौर की स्टार लेखक जोड़ी सलीम-जावेद की कलम से अवतरित हुई थी।

किशोर कुमार ने यह गाना कैसे और किस अंदाज में गाया यह भी दिलचस्प है। पहले ये जानते हैं कि फिल्म में गाना एक हफ्ते जितने कम समय में डालना कैसे संभव हुआ ?

फिल्म इंडस्ट्री में एक परंपरा है। जब फिल्म पूरी हो जाती है, तो उसे शुभचिंतकों और फिल्मकारों को दिखाया जाता है। ‘’डॉन’ की स्क्रीनिंग भी हुई। इसमें निर्देशक चंदा बारोट के मेंटर मनोज कुमार भी शामिल थे। मनोज कुमार की तरफ से सुझाव आया कि फिल्म थ्रिलर और तेज रफ्तार है तथा दर्शकों को सांस लेने का मौका नहीं मिल रहा है। ऐसे हालत में फिल्म में एक गाना डाला जाना चाहिए। लगातार हो रहे बदलाव से थका दर्शक गाने से थोड़ा रिलेक्स महसूस करेगा। मनोज ने ये भी बताया कि गाना कहां डालना है।

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Kishore kumar Birthday: The story behind of song Khaike Pan Banaras wala
किशोर कुमार की पढ़ाई इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में हुई। - फोटो : Social Media

टीम ‘डॉन’ को आइडिया पसंद आया। संगीत निर्देशक जोड़ी कल्याणजी-आनंद से बात की गई। उन्होंने कहा कि उनके पास एक गाने की धुन तैयार है। यह धुन उन्होंने देवानंद की फिल्म ‘बनारसी बाबू’ के लिए तैयार की थी, लेकिन देवानंद को ये जमी नहीं तो फिल्म में नहीं ली गई।

एक टेक में रिकॉर्ड हो गया गाना

किशोर कुमार ने इस गीत को बिना रिहर्सल किए एक टेक में रिकार्ड किया। उन्होंने पहले ही संगीतकारों से कह दिया था कि मैं दूसरा टेक नहीं करूंगा, कोई गलती नहीं होनी चाहिए। गाना एक टेक में रिकार्ड हुआ। पान खाने और थूकने को रियल इफेक्ट देने के लिए किशोर ने सचमुच में पान खाया भी और थूका भी।

गाना रिकॉर्ड तो हो गया और अमिताभ-जीनत अमान पर शूट भी हो गया। गाना फिल्म में एड करने के लिए लैब में चला भी गया। लेकिन इस बीच रिलीज़ की डेट आ गई, जिसे टाला जाना आसान नहीं था, सो बिना इस गाने के फिल्म रिलीज हो गई। बाद में एक हफ्ते बाद नए गाने वाली रील सिनेमाघरों में चली। तो ऐसा था किशोर की सरगमी आवाज का जलवा।

04 अगस्त को मध्य प्रदेश के खण्डवा शहर में जन्में किशोर ने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, उर्दू, असमी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, भोजपुरी भाषाओं में भी गीत गाए। सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की श्रेणी में उन्होंने सर्वाधिक आठ फिल्म फेयर अवॉर्ड जीतने का रिकार्ड अपने नाम किया। अभिनेता भी वो कमाल के थे।

किशोर कुमार की पढ़ाई इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में हुई। वो केंटीन में उधारी बहुत करते थे। उधार लेकर खुद भी खाते और दोस्तों को भी खिलाते। किशोर पर पांच रूपए बारह आना की उधारी चढ़ गई थी। स्टुडेंट लाईफ के हिसाब से ये बड़ी उधारी थी। 10-15 रूपए की भी बड़ी हैसियत थी उन दिनों। केंटीन का मालिक उनसे उधारी चुकाने को कहता तो वो उसकी बात अनसुनी कर देते और केंटीन में ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजाकर ‘पांच रूपैया बारह आना’ गाते और कई धुनें रचते। पूत के पांव पालने में ही दिख गए थे।

बाद में जब वो स्थापित पार्श्वगायक बना गए तो उन्होंने अपने एक गीत में ‘पांच रूपैया बारह आना’ लाइन का दिलचस्प प्रयोग भी किया। अपने फन में माहिर और आत्मविश्वासी कलाकार ही ऐसा ‘टिपिकल’ एक्सपरीमेंट करने की हिम्मत कर पाते हैं। फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ के एक रोमांटिक गीत में ये लाइन जोड़कर किशोर कुमार ने अपनी इसी काबिलियत का इजहार किया। कहां खूबसूरत मधुबाला का रोमांस  भरा आग्रह और कहां पैसों का तकाजा। अद्भुत प्रयोग था। गीत यूं था ‘मैं सितारों का तराना मैं बहारों का खज़ाना... रूप का तुम हो खजाना तुम हो मेरी जां ये माना, लेकिन पहले दे दो मेरा, पांच रूपैया बारह आना।...’

फिल्म हॉफ टिकिट का एक गीत है ‘आके सीधी लगे दिल पे जैसे कटरिया, ओ संवरिया...’ इस गाने की खासियत ये है कि मेल और फीमेल दौनों आवाज़ किशोर कुमार की है।

तो ऐसे थे किशोर दा, ‘किशोर द ओनली वन’। अपनी तरह के अनूठे और बहुमुखी प्रतिभा के धनी ‘किशोर कुमार खंडवा वाला’। वो लेखक थे, निर्माता-निर्देशक थे, गायक थे, संगीतकार थे, अभिनेता थे।  इतने सारे विशेषण उनके नाम के साथ यूं ही नहीं चस्पा किए जाते। एक फिल्म थी ‘दूर गगन की छांव में’ इस क्लासिक फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी  थी - किशोर फिल्म।

फिल्म के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, राइटर, एक्टर, म्युजि़क कम्पोज़र, गायक सभी कुछ किशोर कुमार थे। अपनी तरह की अलग, यह फिल्म बताती है कि किशोर कितने वर्सटाईल क्रिएटर थे। इस फिल्म का एक गाना आज भी लोगों के कानों में रस घोलता है – ‘आ चल के तुझे मैं लेके चलूं एक ऐसे गगन के तले, जहां गम भी न हों आंसू भी न हो, बस प्यार ही प्यार पले।’ कितनी जरूरत है इस तरह के गीत की इन दिनों, नहीं।

बता दें, इसे लिखा भी किशोर ने ही था, गाया और संगीतबद्ध तो किया ही था। पूरा गीत सुनिए एंजॉय कीजिए और खो जाईए किशोर कुमार की दिलकश आवाज के जादू में।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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