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झारखंड चुनाव परिणाम 2019 : भाजपा के पास खोने को और महागठबंधन के पास पाने को बहुत कुछ था

Mon, 23 Dec 2019 06:25 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Mon, 23 Dec 2019 06:25 PM IST
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Jharkhand Election Results 2019 Updates : Raghubar Das Hemant Soren BJP Congress JMM
झारखंड के 19 साल के इतिहास में आज तक ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा, जो चुनाव जीत कर फिर सत्तासीन हो पाया हो - फोटो : Amar ujala

बिहार से अलग होकर नए राज्य के रूप में झारखंड बने 19 साल गुजर चुके हैं। इस दौरान तीन बार विधानसभा चुनाव हुए और अस्थिरता के दौर से गुजरते रहे झारखंड में अबतक छह मुख्यमंत्री बन चुके हैं। बाबूलाल मरांडी को यहां का पहला मुख्यमंत्री होने का सौभाग्य मिला तो वहीं उनके बाद अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, हेमंत सोरेन और रघुवर दास भी सीएम रहे। इस बार झारखंड विधानसभा के लिए चौथी बार चुनाव हुआ। 

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जानना दिलचस्प है कि झारखंड के 19 साल के इतिहास में आज तक ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा, जो चुनाव जीत कर फिर सत्तासीन हो पाया हो। किसी भी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी कभी अपनी सरकार नहीं बचा पाई है। इस बार भी ऐसा होता दिख रहा है।
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साल 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ 2019 लोकसभा चुनाव में भी 'मोदी लहर' के बीच यहां भाजपा ने शानदार जीत हासिल की, लेकिन इस बार भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।  पूर्व के चुनावों में महागठबंधन के पास खोने के लिए बहुत कुछ था, उसने खोया भी, लेकिन इस बार तो अकेली पड़ी भाजपा के पास भी खोने को बहुत कुछ था और उसने भी खोया।
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महागठबंधन के सामने भाजपा पड़ी अकेली
इस बार विधानसभा चुनाव में जो सबसे बड़ी चीज दिखी, वह थी विपक्ष का एकजुट होना। बीते लोकसभा चुनाव में भले ही महागठबंधन में कुछ सीटों को लेकर आपसी मनमुटाव था, लेकिन विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ कांग्रेस और राजद एकजुट रहे। बेहतर तालमेल के साथ महागठबंधन ने पार्टियों के जनाधार के हिसाब से सीटों का बंटवारा बेहतर ढंग से किया।

वहीं एनडीए की बात करें तो इस बार भाजपा अकेली पड़ गई। आजसू के साथ गठबंधन केा लेकर वह आखिर—आखिर तक संशय में रही। दुमका जैसे क्षेत्रों में आजसू ने अपना जनाधार बना रखा है और एनडीए से आजसू के अलग होने के कारण भाजपा को नुकसान भी हुआ। रघुवर दास का गैर आदिवासी चेहरा, सरयू राय जैसे अपनों का बागी निकलना, राय के अनुसार कार्यकर्ताओं की उपेक्षा जैसे कई अन्य वजहों ने भी भाजपा को प्रभावित किया।


 

चुनाव प्रचार अभियान: राष्ट्रीय मुद्दे बनाम स्थानीय मुद्दे

Jharkhand Election Results 2019 Updates : Raghubar Das Hemant Soren BJP Congress JMM
संथाल आदिवासी(File photo)

महागठबंधन को चुनाव के काफी पहले ही एकजुटता कर लेने का फायदा ये हुआ कि वह सही दिशा और सटीक रणनीति के तहत चुनाव प्रचार कर पाया। प्रचार के लिए ज्यादा समय मिलने से वह लगातार भाजपा पर हमलावर रही। वहीं, आजसू संग संशय और सीट बंटवारे में देरी के कारण भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान पर भी असर पड़ा।
 
जम्मू कश्मीर, अनुच्छेद 370, राम मंदिर... ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर शुरू के तीन चरणों में भाजपा अपनी कामयाबी गिनाती रही। वहीं चौथे चरण से भाजपा के चुनाव प्रचार में नागरिकता संशोधन बिल/कानून और एनआरसी जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। वहीं स्थानीय और आदिवासी मुद्दे इनके प्रचार अभियान में काफी हद तक गौण रहे। झारखंड के मुखिया रघुवर दास ने राष्ट्रीय मुद्दों के अलावा गुड गवर्नेंस और केंद्र की मोदी सरकार के विकास कार्यों के रूप में काफी कुछ गिनाया।

वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन ने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार स्थानीय मुद्दों और आदिवासी हितों पर अपना भाषण केंद्रित रखा। वहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा के निर्णयों को 'जबरन' बताया। चुनाव परिणाम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि झारखंड को भाजपा की रणनीति पसंद नहीं आई। आदिवासी बाहुल्य इस प्रदेश में कांग्रेस कुछ कानूनों को लेकर भाजपा को घेरने में कामयाब रही है।

जैसे कि काश्तकारी कानून ने यहां आदिवासियों को अलग-थलग कर दिया है। जमीन अधिग्रहण में अब 70 प्रतिशत जमीन मालिकों की सहमति जरुरी नहीं रह गई है। आदिवासियों के लिए जल-जंगल-जमीन हमेशा से अहम मुद्दे रहे हैं और ऐसे में कांग्रेस इसी मुद्दे पर भाजपा सरकार के प्रति भड़का कर आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में हासिल करने में काफी हद तक कामयाब दिखी।

अगस्त 2017 में धर्मांतरण विरोधी विधेयक से भी आदिवासियों के बीच नाराजगी रही। कांग्रेस पर हमला करने के लिए भाजपा के पास झारखंड राज्य विशेष कोई खास मुद्दा नहीं रहा, जबकि कांग्रेस के पास कई मुद्दे थे।

आंकड़े भी देते हैं गवाही

Jharkhand Election Results 2019 Updates : Raghubar Das Hemant Soren BJP Congress JMM
अर्थव्यवस्था बनी मुद्दा, लेकिन सत्ता का नहीं रहा ध्यान

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के एक शोध के अनुसार मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स में झारखंड 2015-2016 में भारत का दूसरा सबसे गरीब राज्य था। राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग 28 फीसदी हैं, जबकि झारखंड में कुल 46 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं।

वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार प्रदेश में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के आउटपुट में भी कमी आई और खनन क्षेत्र में भी गिरावट नजर आई। साल 2014 में भाजपा अधिकतम निवेश के जरिए अधिकतम रोजगार पैदा करने का दावा कर रही थी, जबकि पिछले पांच सालों में निजी निवेश में भी कमी आई। सेंटर ऑफ मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनामी के प्रोजेक्ट ट्रेकिंग डेटाबेस के अनुसार 2018-19 में झारखंड में 44 फीसदी निवेश परियोजनाओं पर ब्रेक लग गया।

कुल मिलाकर भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के कारणों की समीक्षा की जाए तो इसके पीछे केवल ताजा निर्णय नहीं हैं, बल्कि पिछले पांच सालों में रघुवर सरकार से जनता की असंतुष्टि की कई वजहें रही हैं। भाजपा का प्रदर्शन केंद्र में भले ही बेहतर रहा हो, लेकिन राज्यों में सत्ता बना पाने में भाजपा पिछले कई चुनावों से पिछड़ती जा रही है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बाद महाराष्ट्र और अब झारखंड के रूप में यह भाजपा के लिए बड़ा झटका है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।       

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