Israel-Iran : क्या ईरान के बाद पाकिस्तान भी लपेटे में आएगा?
सोशल मीडिया पर ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी जनरल रेजाई का बयान वायरल हुआ, जिसमे उन्होंने कहा कि अगर इस्राइल ने ईरान पर एटम बम डाला तो बदले में पाकिस्तान इस्राइल पर परमाणु हमला कर देगा।
सोशल मीडिया पर ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी जनरल रेजाई का बयान वायरल हुआ, जिसमे उन्होंने कहा कि अगर इस्राइल ने ईरान पर एटम बम डाला तो बदले में पाकिस्तान इस्राइल पर परमाणु हमला कर देगा।
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ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकने के लिए ईरान व इस्राइल के बीच जारी भीषण जंग के बीच यह दूर की कौड़ी लग सकती है, लेकिन असंभव नहीं है। हालात जिस दिशा में मोड़ ले रहे हैं, उससे लगता है कि आने वाले समय में पाकिस्तान भी इस्राइल के निशाने पर आ सकता है। इसका कारण है पाकिस्तान परमाणु अस्त्र सम्पन्न देश होना, पाक सरकार द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत न करना, परमाणु अस्त्रों के प्रथम प्रयोग न करने का ऐलान न करना तथा पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक कट्टरपंथियों को खुले आम समर्थन देना, जो सारी दुनिया के लिए खतरा बने हुए हैं।
पाकिस्तान, भारत सहित दुनिया के उन नौ देशों में शुमार है, जिनके पास परमाणु ताकत है और परमाणु अस्त्र भी हैं। पाकिस्तान ने जब भारत की प्रतिस्पर्द्धा में परमाणु विस्फोट कर खुद को एटमी ताकत घोषित किया तब सबसे ज्यादा खुशी ईरान जैसे उन इस्लामिक देशों को हुई, जो खुद भी एटम बम बनाने की कोशिश में लंबे समय से लगे हुए थे इस प्रौद्योगिकी में यूरोपीय देशों का एकाधिकार तोड़ना चाहते थे।
इस्राइल हमेशा से इसे अपने अस्तित्व पर खतरा मानता आया है और उसके ईरान की ऐसी कोशिशों को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उधर पाक का एटम बम बनाने वाले परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान थे, जो कभी भोपाल से ही पाकिस्तान गए थे। उन्हें पश्चिमी देशों ने ‘परमाणु जिहादी’ कहा। हालांकि बाद में कादरी की भी पाक में बेकदरी हुई, वो अलग बात है।
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पाकिस्तान द्वारा नीदरलैंड से चुराई तकनीक के जरिए जो परमाणु विस्फोट किया गया, उसे अमेरिका व पश्चिमी देशों ने इस्लामिक बम का नाम दिया, क्योंकि यह दुनिया के ज्यादातर मुस्लिम देशों की परमाणु शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा का प्रतिनिधित्व करता था। परमाणु बम की ताकत ने ही पाकिस्तान में मुस्लिम देशों का चौधरी बनने की हसरत जगाई। इस बीच ईरान भी परमाणु शक्ति बनने की पूरी कोशिश कर रहा था, जो अमेरिका, इस्राइल और अन्य पश्चिमी देशों को कतई मंजूर नहीं था। इसके पीछे डर इस बात का है कि ईरान ने कट्टरपंथी इस्लाम को निर्यात करने तथा उसे पोसने के लिए तीन बड़े कट्टरपंथी संगठन खड़े किए और उन्हें शक्ति सम्पन्न बनाया। ये कई देशों की सत्ता के लिए खतरा बन गए। यह आशंका गहराने लगी कि कहीं ईरान परमाणु ताकत बन गया तो एटम बम जैसा महाविनाशक हथियार आतंकियों के हाथ लग सकता है।
अगर ऐसा हुआ तो उसका गैर जिम्मेदाराना तरीके से क्षुद्र स्वार्थों के लिए दुरूपयोग हो सकता है। इस बात की पक्की गारंटी नहीं है कि पाक का परमाणु कार्यक्रम व हथियार पूरी तरह सुरक्षित हाथों में हैं। इसीलिए अमेरिका और इस्राइल ईरान को भी तहस नहस कर दे रहे हैं कि वो परमाणु शक्ति के गलत उपयोग न करने की गारंटी नहीं दे रहा। हालांकि यह एकतरफा दादागिरी भी है।
वैसे ईरान और पाकिस्तान मुस्लिम देश होने के बाद भी दोनो में बहुत ज्यादा भाई चारा नहीं रहा, क्योंकि ईरान शिया मुसलमान बहुल देश है और पाकिस्तान सुन्नी बहुल। ईरान में सुन्नी और पाकिस्तान में शिया अल्पसंख्यक घोषित हैं और भेदभाव के शिकार हैं। लेकिन अब अचानक पाकिस्तान और ईरान के बीच भाईचारा बढ़ गया है तो इसका कारण शेर का अंदेशा है। पाक नेताओं ने कहा कि ईरान हमारा मुस्लिम भाई है। इस युद्ध में हम उसकी पूरी तरह मदद करेंगे।
ताजा बवाल तब मचा जब सोशल मीडिया पर ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी जनरल रेजाई का बयान वायरल हुआ, जिसमे उन्होंने कहा कि अगर इस्राइल ने ईरान पर एटम बम डाला तो बदले में पाकिस्तान इस्राइल पर परमाणु हमला कर देगा।
इस्राइल के प्रधानमंत्री की शपथ
इसके पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा एक इंटरव्यू में सार्वजनिक रूप से कसम खाई थी कि वो ईरान और पाकिस्तान के परमाणु बमों को तबाह करके रहेंगे। उन्होंने कहा था कि हमारा सबसे बड़ा मिशन उग्रवादी इस्लामी शासन को परमाणु हथियार पाने से रोकना है। परमाणु हथियार इन आतंकी शासन के हाथों में नहीं जाना चाहिए। चाहे वो ईरान हो या फिर पाकिस्तान। इन कट्टरपंथियों के पास परमाणु हथियार होंगे तो डर है कि वो इनसे जुड़े नियमों का पालन नहीं करेंगे।' जनरल मोहसिन रेजाई के बयान के बाद पाकिस्तान के हाथ पैर फूल गए और उसने अधिकृत तौर पर कहा कि पाकिस्तान का एटम बम स्वदेश की रक्षा के लिए है, किसी और पर डालने के लिए नहीं है।
हमने कभी भी इस्राइल पर एटम बम डालने की धमकी नहीं दी। पाकिस्तान के इस यू टर्न को ईरान की ‘हरतरह से मदद’ के वादे के खिलाफ माना जा रहा है। यही नहीं उसने ईरान के साथ अपनी सीमा भी बंद कर दी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जनरल रेजाई का यह बयान कब का है।
वैसे पाकिस्तान फिलीस्तीनियों को अपने नैतिक समर्थन के चलते इस्राइल से दूरी बनाता आया है। उसके इस्राइल के साथ कूटनीतिक रिश्ते भी नहीं हैं। फिलिस्तीनियों को भी पाकिस्तान का समर्थन मुख्य रूप से इसलिए है, क्योंकि वो मुसलमान हैं। अब पाकिस्तान को डर यह है कि अगर ईरान एपीसोड खत्म हो गया तो आगे क्या होगा? संभव है कि ईरान या तो दबाव में अमेरिका के साथ परमाणु डील पर दस्तखत कर दे या फिर अमेरिका और इस्राइल मिलकर ईरान में कट्टरपंथी खोमेनेई सरकार का तख्ता पलट दें। यद्यपि यह बहुत आसान नहीं है।
यह इस बात पर निर्भर है कि ईरानी जनता क्या चाहती है? संभव है कि इस काम में अमेरिका में पाकिस्तान की मदद भी मांगे, जिससे मुकरना पाक के लिए बहुत कठिन है। अगर ईरान में अमेरिका समर्थक सरकार कायम हो गई तो अगला लक्ष्य पाकिस्तान ही होगा, जिसके पास परमाणु बम हैं और वो जब तब भारत को इसकी धमकी देता रहता है। पाक के पास 170 परमाणु बम हैं, जबकि ईरान तो इसे बनाने की कोशिश में ही मारा गया।
हालांकि भारत ने भी ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर पाक को उसकी औकात बता दी है। लेकिन खतरा अभी भी बदस्तूर है कि पाक का परमाणु कभी भी उन आतंकियों के हाथ में जा सकता है, जिन्हें ईरान की तरह उसने पाल रखा है। यह बात न तो इस्राइल से और न ही अमेरिका से छिपी है। भारत तो दुनिया को यह बात शुरू से बताता रहा है।
लिहाजा इस बात की पूरी संभावना है कि ईरान प्रकरण निपटते ही अगला टारगेट पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम हो। इसके लिए भूमिका बननी शुरू हो जाएगी। पाक के परमाणु कार्यक्रम को लेकर शंकाओं के कुछ ठोस कारण हैं। पहला तो पाकिस्तान में कमजोर नागरिक सरकार है, जो फौज के दबाव में काम करती है और खुद फौज आंतकियों को खुले आम प्रश्रय दे रही है। दूसरे, पाक ने 1968 की परमाणु अप्रसार संधि ( एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
इस संधि पर दुनिया के 191 देशो के दस्तखत हैं। भारत सहित 9 देशों ने इससे दूरी इस आधार पर बनाई है कि यह संधि भेदभावपूर्ण और न्यायसंगत नहीं है। लेकिन भारत ने परमाणु हथियारों के मामले में ‘नो फर्स्ट यूज’ घोषणा की हुई है, जिसका अर्थ यह है कि भारत कभी भी युद्ध की स्थिति में पहले परमाणु बम का उपयोग नहीं करेगा। लेकिन परमाणु हमला हुआ तो उसी शैली में जवाब देगा। ऐसी ही घोषणा चीन ने भी की हुई है। लेकिन पाकिस्तान ने नहीं की है। यह रवैया उसके गैर जिम्मेदार परमाणु शक्ति होने की ओर इंगित करता है और इस्राइल इसे मुद्दा बना सकता है।
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