अंतराष्ट्रीय महिला दिवस: एक देश जहां महज कागज़ी नहीं है लैंगिक समानता का अधिकार
- लैंगिक समानता के मामले में स्वीडन दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है।
- बच्चों के लालन-पालन में अभिभावकों को समान अधिकार देने वाला दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश हे स्वीडन।
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महिलाओं के समान अधिकार और समावेशी विकास का मुद्दा मैं काफ़ी लंबे समय से सुनते और पढ़ते आ रही हूं, लेकिन सही मायने में अधिकारों के प्रति जागरूकता और समानता का अनुपालन करते समाज को मैंने स्वीडन में देखा है। लैंगिक समानता के मामले में स्वीडन दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है।
यहां महिलाओं को महज़ काग़जों पर अधिकार प्राप्त नहीं है बल्कि हर एक काम में बराबरी का अधिकार दिया गया है। शायद यही वजह है कि यहां महिलाएं खुद को ज़्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र पाती हैं।
हर काम में महिला-पुरुष की भागीदारी
घर हो या बाहर, हर जगह महिलाएं और पुरुष एकजुट होकर काम कर रहे हैं। फिर चाहे घर में खाना बनाना, बच्चों का लालन-पालन, दफ़्तर के कामकाज या फिर सेना में भर्ती होना ही क्यों नहीं हो। सरकार हर एक क्षेत्र में समान लैंगिक अधिकार को केंद्र में रखना नहीं भूलती।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि स्वीडन में महिलाओं के रोजगार का प्रतिशत दुनिया के शीर्ष देशों में है। यानी 65 फ़ीसदी महिलाओं के पास स्थायी रोजगार है। जबकि 18 फ़ीसदी महिलाएं किन्हीं कारणों से पार्ट टाइम जॉब कर रही है। वहीं दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले वैतनिक असमानता भी यहां काफ़ी कम है। यह तकरीबन छह प्रतिशत के बराबर है। वहीं यहां की सेना में भी महिलाओं का आंकड़ा काफी प्रभावशाली है। साल 2020 में 21 फीसदी महिलाएँ स्वीडिश सशस्त्र बल में शामिल थी और यह आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है।
महिलाओं को समान अधिकार देने की बातें यहीं नहीं रुकती। स्वीडन दुनिया का पहला देश है जिसके तमाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आलोचनाओं के बावजूद फेमिनिस्ट विदेश नीति को लागू कर उसका अनुसरण करना शुरू कर दिया है। यहां 57 प्रतिशत महिलाएं सरकार के कैबिनेट रोल में है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल डेमोक्रेटिक इस देश की ज़्यादातर क्षेत्रों के महत्वपूर्ण बागडोर महिलाओं के पास है और दुनिया भर में मिसाल क़ायम कर रही हैं।
माता-पिता दोनों को 'पैरेंटल लीव'
यह देश बच्चों के लालन-पालन में अभिभावकों को समान अधिकार देने वाला दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश भी है। यानी माता-पिता दोनों ही बच्चों के परवरिश में समान भूमिका निभाते हैं। मेटरनिटी लीव की जगह स्वीडन ने काफ़ी पहले ही पैरेंटल लीव को जगह दे दी है। यानी बच्चे के पालन पोषण के लिए सिर्फ़ माँ को छुट्टी नहीं मिलती बल्कि पिता को भी लंबे अवकाश पर रहकर देखभाल करने का अधिकार है।
पेड पैरेंटल लीव 480 दिनों की होती है, यानी प्रत्येक बच्चे के जन्म पर अभिभावक को 480 दिनों की छुट्टी लेने का अधिकार है।और इस छुट्टी का भुगतान कंपनी निश्चित तौर पर करती है। सरकार ने इस छुट्टी को इसलिए अनुमति दी ताकि लैंगिक समानता यहां भी बरकरार रहे।
दिलचस्प यह है कि इस छुट्टी में क़रीब 90 दिनों की छुट्टी पिता को लेना अनिवार्य है। ताकि बच्चे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता मज़बूत हो सके। वहीं समानता के अधिकार का ईमानदारी से अनुपालन हो सके। यही नहीं बच्चे के बीमार होने पर सरकार अभिभावकों को सालाना 120 दिनों की पेड छुट्टी देती है। ताकि वे घर पर बेफ़िक्र रहकर अपने बच्चे और घर की देखभाल कर सके।
प्रत्येक बच्चे के देखभाल के लिए सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता भी बराबर भाग में माता-पिता दोनों के बैंक खाते में जमा की जाती है। ऐसी कई बातें यहां की सामाजिक व्यवस्था में रची बसी हुई हैं जो महिलाओं को ज़्यादा सक्षम और सुरक्षित बनाती हैं।
लैंगिक समानता का अदुभुत उदाहरण
आपको बता दूँ कि स्वीडन में फ़ेमिनिस्ट सरकार है। यह व्यवस्था रखने वाला यह दुनिया का पहला देश है। इसका मतलब यह है कि कोई भी निर्णय लेने और संसाधन आवंटन में लैंगिक समानता सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में है। दरअसल एक फ़ेमिनिस्ट सरकार यह सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीति तय करने में लैंगिक समानता के दृष्टिकोण को लाया जाए।
यहाँ की सरकार मानती है कि समाज और अपने जीवन को सही आकार देने के लिए महिलाओं और पुरुषों के पास समान शक्ति होनी चाहिए। यह प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और लोकतंत्र व न्याय का मामला है। लैंगिक समानता भी समाज की चुनौतियों के समाधान का हिस्सा है। यह न्याय और आर्थिक विकास के लिए निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।
यह भी जानना दिलचस्प होगा कि यहां फ़ेमिनिस्ट विदेश नीति और व्यापार नीति को मंज़ूरी मिली हुई है। इस नीति का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और विकास को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बीच सुनिश्चित करना है। स्वीडन की नारीवादी विदेश नीति इस विश्वास पर आधारित है कि अगर दुनिया की आधी आबादी को बाहर कर दिया जाए तो स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास कभी हासिल नहीं किया जा सकता है।
नीतिगत भेदभाव और अधीनता अभी भी दुनिया भर में अनगिनत महिलाओं और लड़कियों की जिंदगी का हिस्सा है।फ़ेमिनिस्ट विदेश नीति सभी महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों, प्रतिनिधित्व और संसाधनों को मजबूत करने के लिए परिवर्तन का एजेंडा है।
जबकि स्वीडिश फ़ेमिनिस्ट व्यापार नीति का मतलब व्यापारिक निर्णय लेने और संसाधन आवंटन में लैंगिक समानता को अपनी प्राथमिकता में रखना है। क्योंकि लैंगिक समानता आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। हालांकि आज की व्यापार नीति से महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक लाभ होता है। इसलिए फ़ेमिनिस्ट व्यापार नीति के ज़रिए व्यापार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और समकक्ष लाने की क़वायद जारी है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं।