फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   international father's day 2021 our society and fathers role in family

पितृ दिवस विशेष: पितृ सत्ता को कोसें या परिवार में पिता की भूमिका के प्रति कृतज्ञ हों?

Sun, 20 Jun 2021 08:47 AM IST
Shubhangi Mishra शुभांगी मिश्रा
Updated Sun, 20 Jun 2021 08:47 AM IST
सार

हमारे भारतीय समाज में पिता को भगवान माना जाता है और यहीं से ये बात सत्यापित होती है कि पिता अपने बच्चे के लिए सबकुछ होता है।

हमें इस बात का गर्व है कि हमारी सभ्यता में अनादिकाल से चलती आ रही इस परंपरा को हमने अभी तक बिल्कुल वैसे ही संजो कर रखा हुआ है। 

विज्ञापन
international father's day 2021 our society and fathers role in family
अक्सर पितृत्व दिवस पर बात करते हुए हम पितृ सत्तात्मक पक्ष को सामने लाते हैं - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आज पितृत्व दिवस है। समाज और परिवार में पिता की भूमिका और उसके महत्व को प्रतिपादित करने का दिन। कोरोना काल में पिता और माता दोनों की ही भूमिका में बदलाव आए हैं। मां जहां महामारी के इस संकट मेंं परिवार का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है वहीं पिता के दारोमदार और जिम्मेदारी में बदलाव और बढ़ोतरी दोनों हुई है।

विज्ञापन


अक्सर पितृत्व दिवस पर बात करते हुए हम पितृ सत्तात्मक पक्ष को सामने लाते हैं और उसकी आलोचना व समालोचन में लग जाते हैं, लेकिन इस कार्य और नसीहतों के लिए पूरा साल पड़ा होता है, जबकि एक दिन पिता और परिवार के प्रति संवदेनशीलता को याद किया जा सकता है।
विज्ञापन


बहरहाल, पिता और उसके प्रति सारी सहाुनभूति व संवदेनशीलता इस समय सोशल मीडिया पर जाहिर हो रही है। जहां एक ओर ‘बेस्ट डैड एवर’ वाले पोस्ट की भरमार है तो वहीं दूसरी ओर यह ट्रेंड कर रहा है कि “आपके पिता बेहतरीन हैं तो उनसे अन्तर्जातीय विवाह, जातिवाद या लिंगभेद पर बात करके देखिए फ़िर आप जानेंगे कि आप कितने सही हैं ?”
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी बात लिखते समय हम बहुत हद तक एकपक्षीय हो जाते हैं। याद रखिए कि ये पितृसत्तात्मक सोच आज या कल की नहीं है, इसका एक बहुत लम्बा इतिहास है और हम एक दिन में क्रान्ति क्यों चाहते हैं? अगर इस सोच से आगे निकलकर आज हमारे पिता अपनी पत्नी को कोई ‘चीज़’ ना मानकर उनकी छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रख रहे हैं, उनकी परेशानियों को समझ रहे हैं और बेटियों को खुला आसमान दे रहे हैं तो हमें इसका सम्मान करना चाहिए ना कि सेक्सुअलिटी पर बात ना कर पाने के कारण उन्हें पितृसत्तात्मक सोच का कह कर निकल जाना चाहिए।

मेरे पिता ने समाज की बातों को दरकिनार कर के मुझे वो सब दिया जो मुझे चाहिए था लेकिन मैं इसे छोड़कर सिर्फ़ अन्तर्जातीय विवाह पर बात ना कर पाने के कारण उन्हें पितृसत्ता को ढोने का दोषी ठहरा दूं?

यद्यपि हमारा संविधान किसी भी बालिग को उसकी मर्ज़ी से विवाह करने का पूरा अधिकार देता है, लेकिन हमारा समाज अभी इतना परिपक्व नहीं हुआ जो इसे स्वीकार कर लेl यक़ीन मानिए ज़्यादातर मां-बाप हमारे उचित पसंद को खुद स्वीकार करते हुए भी समाज के तथाकथित ‘इज़्ज़त’ की बलि चढ़ जाते हैंl

जहां तक मुझे लगता है कि किसी भी पिता के लिए उसके बच्चों की खुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं होता पर हमारा समाज पितृसत्तात्मक है और हमारे पिता भी उसी समाज से हैं। हमारे समाज में अन्तर्जातीय विवाह को ‘इज़्ज़त की फ़ज़ीहत’ का नाम दिया जाता है और ऐसे में हमें हमारे पिता से यह उम्मीद रखना कि उन्हें समाज से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, बेवक़ूफी है। 
 

international father's day 2021 our society and fathers role in family
पिता ने हमें एक बेहतरीन जीवन और स्वस्थ वातावरण दिया है। - फोटो : सोशल मीडिया

हमारे पिता जिस समाज में रहे हैं वहां सेक्सुअलिटी पर बात करना सहज नहीं है पर आप तो सहज हैं ना, आप करिएगा अपने बच्चों से इस पर बात। इसके आगे के बदलाव के लिए आप और हम हैं ना, हमारी पीढ़ी को भी तो कुछ ज़िम्मेदारी लेनी होगी और यक़ीन मानिए जब यही विवाह टूटते हैं ना तो सिर्फ़ एक ही कंधा हमारा सहारा होता है और वो हमारे पिता का होता हैl

हमारे भारतीय समाज में पिता को भगवान माना जाता है और यही से ये बात सत्यापित होती है कि पिता अपने बच्चे के लिए सबकुछ होता है।और हमें इस बात का गर्व है कि हमारी सभ्यता में अनादिकाल से चलती आ रही इस परंपरा को हमने अभी तक बिल्कुल वैसे ही संजो कर रखा हुआ है। 

इस पितृसत्तात्मक समाज से एक कदम आगे बढ़कर हमारे पिता ने हमें एक बेहतरीन जीवन और स्वस्थ वातावरण दिया है ना, इसका सम्मान कीजिए और इस पितृसत्तात्मक समाज को बेहतर बनाने के लिए हमारी पीढ़ी को कमर कस के तैयार होकर आगे आना ही हमारा पहला कदम हैl

स्मरण रहे, क्रान्ति एक दिन में नहीं होती, इसके विभिन्न चरणों का सम्मान करना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed