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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   India and Pak War I was not afraid I was courageous because I had faith in my army

India and Pakistan: डर नहीं, हौसला था... क्योंकि मुझे अपनी सेना पर भरोसा था

Mon, 12 May 2025 12:18 PM IST
Nikita Gupta निकिता गुप्ता
Updated Mon, 12 May 2025 12:18 PM IST
सार

उस रात धमाके की आवाजें चलती रही कुछ देर बंद होने के बाद फिर सुबह करीब 4:15 पर एक बार फिर से धमका शुरू हो गया जो सुबह 6 बजे तक चला। लेकिन मैं अगले दिन बिना डरे। अपने तय समय पर ऑफिस पहुंची - जैसे रोज जाती हूं।

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India and Pak War I was not afraid I was courageous because I had faith in my army
भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हर एक हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में रहना आसान नहीं है, और जब आप एक पत्रकार हों तो ये चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। मेरे लिए ये सब बिल्कुल नया था - मेरा पहला अनुभव गुरुवार रात हुआ, जब पाकिस्तान की ओर से ड्रोन अटैक हुआ।

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मैं हमेशा की तरह अपने कमरे में थी, अपने काम में व्यस्त। तभी एक जोरदार आवाज आई। मुझे लगा शायद मोहल्ले के बच्चे पटाखे चला रहे हैं या किसी की शादी में आतिशबाज़ी हो रही है। लेकिन आवाजें रुक नहीं रही थीं - लगातार धमाके सुनाई दे रहे थे। जैसे ही मैं बाहर निकली और आसमान की तरफ देखा, तो समझ आ गया कि ये कोई साधारण आतिशबाज़ी नहीं है।
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करीब 10 सेकंड तक मैं वहीं खड़ी सोचती रही — ये हो क्या रहा है? तभी जानकारी मिली कि ये पाकिस्तान की ओर से ड्रोन अटैक है। मैं तुरंत अंदर भागी, फोन उठाया और अपने सीनियर को कॉल किया - सर, तुरंत ये खबर ब्रेक करनी है।
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यही तो पत्रकारिता है - चाहे हालात जैसे भी हों, पत्रकार का पहला कर्तव्य होता है सच और खबर को सामने लाना। उस समय मेरे सिर के ऊपर से ड्रोन उड़ रहे थे, आसमान में धमाकों की आवाजें थीं - लेकिन मैं सिर्फ एक पत्रकार थी, जो अपने फर्ज को निभा रही थी।

उस रात धमाके की आवाजें चलती रही कुछ देर बंद होने के बाद फिर सुबह करीब 4:15 पर एक बार फिर से धमका शुरू हो गया जो सुबह 6 बजे तक चला। लेकिन मैं अगले दिन बिना डरे। अपने तय समय पर ऑफिस पहुंची - जैसे रोज जाती हूं। लेकिन उसी शाम धमाका फिर शुरू हुआ जो और भी ज़्यादा तेज़ था। ऐसा लग रहा था जैसे धमाका मेरे घर के बाहर ही हो रहा है।

जो शनिवार सुबह 11:30 तक चलता रहा। सच कहूं तो ऐसा लगा कि अगली मिसाइल मेरे घर पर न आ गिरे। लेकिन डर बिल्कुल नहीं था, क्योंकि मुझे अपनी सेना पर पूरा भरोसा था। हमारी सेना ने उसका करारा जवाब दिया।

इस अनुभव ने मुझे बहुत कुछ सिखाया - कि ऐसे हालात में खुद को कैसे संभालना है, कैसे सुरक्षित रहकर भी अपनी जिम्मेदारी निभानी है। बतौर पत्रकार और बतौर इंसान, ये मेरे जीवन का वो अनुभव है जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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