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#कबतकनिर्भयाः कानून का डर तो ठीक है लेकिन समाज की मानसिकता बदलना भी जरूरी

Shankar Suwan Singh शंकर सुवन सिंह सिंह
Updated Mon, 02 Dec 2019 02:02 PM IST
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hyderabad rape case shows humanity on loss
हैदराबाद की घटना समाज की मानसिकता दर्शाती है। - फोटो : अमर उजाला
सत्य, अहिंसा विरोधी रथ पर सवार हो सत्ता के चरम शिखर पर पहुंचने वाले सुधारकों की मनोदशा ठीक नहीं है। सुधारकों की प्रवृत्ति ठीक होती तो देश में सत्य,अहिंसा का प्रवाह होता। 
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27 नवंबर 2019 को हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। फिर उनके शरीर को पेट्रोल डालकर जला दिया गया। जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात की सूचना मिलते ही जहां पुलिस सक्रिय रूप से मामले की जांच में जुट गई, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स भी पशु चिकित्सक के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। यह घटना समाज के बदलते स्वरूप, नेताओं के कोरे वादे,और इंसानियत के साथ खिलवाड़ का विभत्स रूप दर्शाती है। 
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समाज वहशीपन का शिकार हो रहा है। समाज में असहिष्णुता का विकास हो रहा है। समाज में बढ़ती बेरोजगारी, अशिक्षा, नैतिक मूल्यों का पतन आदि बुराइयां ही दरिंदगी और वहशीपन का कारण हैं।सरकार को हायर एजुकेशन ,प्राइमरी एजुकेशन ,मिडिल एजुकेशन सिस्टम में नैतिक शिक्षा के विषय का प्रावधान करना चाहिए। भारत सरकार को प्रत्येक जिले के बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन,टैक्सी स्टैंड,टोल प्लाजा,हाई वे आदि मुख्य जगहों पर नैतिक मूल्यों से सम्बंधित कोटेशन के बैनर और पोस्टर लगवाने चाहिए। 

सच्ची मानवता तब जन्मेगी- जब दुनिया से कोहरा व कुहासा मिटेगा,जब दुनिया में प्रकाश बेरोकटोक आएगा ,जब दुनिया से वहशीपन मिटेगा,जब उगता सूरज सारे अंधेरे को लील जाएगा, सारे तारों -सितारों को फीका कर देगा, शेर की गर्जन से हिरण जान बचाकर नहीं भागेंगे, शेर पर भरोसा होगा तब इस दुनिया से बुराई का अंधकार छट जाएगा।

बलात्कार आए दिन हो रहे हैं। क्या बलात्कार की घटनाएं अनवरत शोध का विषय बनेगी। बलात्कारियों को तुरंत सजा का प्रावधान होना चाहिए तभी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सफल हो पाएगी। वरना यह योजना कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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