विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: सरलता एवं सुरुचि का पर्याय समीरा सनीश
- केरल राज्य के 46वें समारोह में फिल्म के सर्वोत्तम नायक (दुल्खर सल्मान), सर्वोत्तम नायिका (पार्वती), सर्वोत्तम निर्देशन (मार्टिन प्रकाट) और सर्वोत्तम फोटोग्राफी (जोमोन टी जॉन) सहित कुल आठ पुरस्कार मिले। क्या नायक-नायिका की पुरस्कार प्राप्ति में उनके वस्त्रों की कोई भूमिका नहीं थी?
- केरल फिल्म क्रिटिक एसोशिएशन के सदस्यों ने 2014 का सर्वोत्तम कस्ट्यम डिजाइनर का अवार्ड समीरा सनीश को सौंपा।
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विस्तार
मलयालम फिल्मों की ट्रेंडसेटर समीरा सनीश का जन्म 27 जून 1983 को केरल में हुआ। उन्होंने फिल्मों के द्वारा फैशन निर्माण किया। यह फैशन निर्माता अपनी सरलता एवं सुरुचि के लिए जानी जाती है। समीरा के काम को पहली बार मैंने इक्कीसवीं सदी की एक सबसे खूबसूरत मलयालम फिल्म ‘चार्ली’ में देखा था।
इस जादुई फिल्म पर दर्शकों एवं समीक्षकों ने लिखा और जैसा कि फिल्म पर लिखने वाले करते हैं, वे कॉस्ट्यूम डिजाइनर को अनदेखा करते हैं। जीवन का उल्लास मनाती फिल्म के नायक चार्ली (दुल्खर सुल्तान) की रंगीन छींटदार शर्ट और टेसा (पार्वती तिरुवोतु) की रंगारंग ड्रेस युवाओं केलिए क्रेज बन गई थी।
यायावरी के अनुकूल दुल्खर की ड्रेस और उसकी एक्ससरीज केरल के युवाओं को पागलपन की हद तक ले गई। बैकपैक लिए यायावर चमकीली टेसा की ड्रेस भी बहुत आकर्षक है।खासकर ‘सुंदरी पेने, सुंदरी पेने’ गीत जितना मधुर है, खूबसूरत टेसा की ड्रेस भी उतनी ही आकर्षक है।
केरल राज्य के 46वें समारोह में फिल्म के सर्वोत्तम नायक (दुल्खर सल्मान), सर्वोत्तम नायिका (पार्वती), सर्वोत्तम निर्देशन (मार्टिन प्रकाट) और सर्वोत्तम फोटोग्राफी (जोमोन टी जॉन) सहित कुल आठ पुरस्कार मिले। क्या नायक-नायिका की पुरस्कार प्राप्ति में उनके वस्त्रों की कोई भूमिका नहीं थी?
हां, केरल फिल्म क्रिटिक एसोशिएशन के सदस्यों ने उसकी प्रतिभा को पहचान 2014 का सर्वोत्तम कस्ट्यम डिजाइनर का अवार्ड समीरा सनीश को सौंपा। इस फिल्म ‘बुक ऑफ जॉब’ से उन्हें प्रसिद्धि मिली। समीरा का कोस्ट्यूम डिजाइन फिल्म के मूड और सौंदर्य दोनों में इजाफा करता है। चरित्रानुकूल ड्रेस फिल्म में जान डाल देती है। मार्टिन प्रकाट की फिल्म 2013 की फिल्म ‘एबीसीडी: एमेरिकन-बोर्न कन्फ्यूज्ड देसी’ की ड्रेस डिजाइनर भी समीरा सनीश हैं।
मॉर्डन और स्टाइलिश आउटफिट की जादूगर
मलयालम के अलावा तमिल फिल्म, मंच एवं टीवी, वीडियो, विज्ञापन के लिए ड्रेस बनाने वाली समीरा की खासियत मॉर्डन और स्टाइलिश आउटफिट तैयार करना है। चूंकि उनकी रुचि फैशन एवं डिजाइन में थी अत: उन्होंने कोचीन के नेशनल इंस्ट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलॉजी में शिक्षा प्राप्त की। कोर्स पूरा होते ही वे फिल्म उद्योग में सहायक कॉस्ट्यूम डिजाइनर बन गईं।
उन्होंने विभिन्न निर्देशकों जैसे आसिक अबु (‘वायरस’, ‘डैडी कूल’, महेशिन्टे प्रतिकारम्’), अल्फोन्से पुथ्रेन (‘प्रेमम्’), मधु सी नारायनन (‘कुम्बलंगी नाइट्स’), रंजीत (लघु फिल्म, ‘आरो’), अमल नीरद (‘बुक ऑफ जॉब’), मनु स्वराज, वर्षा वासुदेव, आदि के साथ काम किया है।
यूनियन मेम्बरशिप नहीं होने के कारण उन्हें उनकी पहली फिल्म ‘द व्हाइट एलीफेंट’ से हटा दिया गया था। उस समय उनके पास पैसे नहीं थे, बहुत कम बोलने वाली समीरा ने तब उधार लेकर सदस्यता की रकम चुकाई। लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत और काम की गुणवत्ता से फिल्म उद्योग में अपनी खास जगह बनाई है। अब वे एक स्थापित नाम हैं, कई अवार्ड उनकी झोली में हैं।
समीरा का पहली बड़ी कमर्शियल फिल्म ‘डैडी कूल’ है। साथ ही वे ‘कडुवा’, ‘भीमा पर्वम्’, ‘हाऊ ओल्ड आर यू’, ‘प्रवदा’, ‘सी/ओ सायरा बानू’, ‘सटर’, ‘उस्ताद होटल’, ‘अतिरन’, ‘प्रांचीएटन’ आदि केलिए याद की जाती हैं। उनकी बारीक नजर से तैयार की कई ड्रेस फिल्म को एक ऊंचाई प्रदान करती है।
इसी का नतीजा है, बहुत कम समय में कई फिल्मों के कॉस्ट्यूम डिजाइन केलिए उनका नाम लिमका बुक में दर्ज है। पोशाक हेतु भारत की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने वाली सफलता के अलावा अपनी व्यावहारिकता, व्यक्तित्व और क्राफ्ट के प्रति समर्पण केलिए जानी जाती हैं।
86 फिल्म के अभिनेता एवं अभी तक कुल तीन फिल्म के निर्देशक दिलीश पोतन ने पहली फिल्म ‘महेशिन्टे प्रतिकारम्’ बनाई और चौदह पुरस्कार प्राप्त किए लेकिन उनकी दूसरी फिल्म ने और बड़ा कमाल किया। ‘तोन्दिमुतलुम दृक्साक्षियुम’ को तो बाइस अवार्ड मिले। तीसरी फिल्म ‘जोजी’ को सात पुरस्कार मिले। इनमें से दो फिल्मों ‘महेशिन्टे प्रतिकारम्’ एवं ‘तोन्डी ’ की कस्ट्यूम डिजाइनर समीरा हैं। क्या इन सफलताओं में समीरा सनीश का हाथ नकारा जा सकता है।
उनकी डिजाइन ड्रेस की अन्य कई फिल्मों को पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
कुछ के नाम देखें: ‘कुम्बलंगी नाइट्स’ (तेरह पुरस्कार), ‘हाऊ ओल्ड आरे यू?’ (दस पुरस्कार), ‘मायानदी’(नौ पुरस्कार), ‘पत्तेमारी’ (आठ पुरस्कार),‘वायरस’ (सात पुरस्कार), ‘कटहल-द कोर’( छ: पुरस्कार), ‘शटर’ (तीन पुरस्कार), भीष्म पर्वम’ (तीन पुरस्कार), ‘रामलीला’ (दो पुरस्कार), ‘प्रणय विलासम्’ (दो पुरस्कार), ‘नायाट्टु’ (दो पुरस्कार), ‘रक्षाधिकारी बैजू ओप्पु’ (दो पुरस्कार), ‘पणि’ (एक पुरस्कार), ‘किष्किंधाकांड’ (एक पुरस्कार), ‘अतिरन’ (एक पुरस्कार) आदि। ‘हृदयपूर्वम’, ‘तुडरुम्’, ‘रेखाचित्रम’, ‘अन्वेषिप्पन कन्देत्तुम’, ‘का’, जॉन लूथर’, ‘मधुरम’, ‘काला’, ‘फोरेन्सिक’, ‘रामलीला’, ‘गोदा’, ‘जैकब’स किंग्डम ऑफ हैवन’, ‘बज़ूका’, ‘काप्पा’, ‘तीर्प्पु’, ‘हाऊ ओल्ड आर यू’ आदि में भी पोशाकों से पात्र को निखारने का काम समीरा ने किया है।
समीरा ने पांच फिल्मों ‘ओरु तेकन तल्लु केस’ (2022), ‘भूतकालम्’ ‘(2022), ‘जवान ऑफ वेल्लिमाला’ (2012), ‘कोबरा’ (2012) एवं ‘डैडी कूल’ (2009) का वॉर्डरॉब विभाग भी संभाला है।
करीब दो दशकों में समीरा ने इतना काम किया है। वे फिल्म के मूड के अनुसार रंग चुनती हैं, ड्रेस की बारीकी पर ध्यान देती हैं। जैसे ‘भीष्म पर्वम्’ एक ग्रे मूड की फिल्म है, तो उसका वस्त्र विन्यास, खासकर नायक के कपड़े उसी के अनुकूल आपको नजर अएंगे। इसी तरह युवाओं के यायावरी से जुड़ी फिल्म का वस्त्र विन्यास समीरा ने उसी के अनुरूप रंगारंअग रखा है। रंगों, वस्त्रों के चुनाव केलिए देश-विदेश का दौरा करती हैं ताकि ऑथेंटिक किरदारों को खड़ा कर सकें।
फिल्म बनाने और देखने-दिखाने के नजरिए में समय के साथ बहुत परिवर्तन हुआ है। अब नए निर्देशक भी 40-50 लाख कॉस्ट्यूम पर खर्च करने को खुशी से राजी हैं, अत: ड्रेस डिजाइनर समीरा को भी अपनी क्रियेटिविटी दिखाने का भरपूर अवसर मिलता है। अभी सिने-जगत में समीरा सनीश को बहुत आगे जाना है।
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