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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: ली ब्रैकेट-द क्वीन ऑफ स्पेस ऑपेरा

Sun, 26 Nov 2023 05:18 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 26 Nov 2023 05:18 PM IST
सार

ली ब्रैकेट पिछली सदी की एक महत्वपूर्ण साइंस फिक्शन लेखिक तथा स्क्रीनप्ले राइटर रही हैं। उनकी कहानियां कई कहानी संग्रह में प्रकाशित हैं। ‘द स्टारमैन’ (जो ‘द गैलाक्टिक ब्रीड’ के नाम से भी उपलब्ध है), ‘द लॉनग टुमारो’, ‘अल्फा सेंटुरी ओर डाई!’ तथा ‘द बिग जम्प’ उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।

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history of world cinema in hindi Leigh Douglass Brackett lee brackett screenwriter
lee brackett - फोटो : Twitter

विस्तार

क्या बिना स्क्रीनप्ले या यूं कहें बगैर स्क्रीनप्ले राइटर के फिल्म बन सकती है? जाहिर है उत्तर नकारात्मक होगा। स्क्रीनप्ले राइटर फिल्म का एक महत्वपूर्ण घटक होता है। वही विचार और कहानी गढ़ता है। मगर यह भी ध्यान देने वाली बात है, हम फिल्म देखते हैं, पर क्या हम स्क्रीनप्ले राइटर का नाम जानने को उत्सुक होते हैं? शायद ही कभी।

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वे कभी अभिनेता या निर्देशक की भांति सेलेब्रेटी नहीं होते हैं। हां, यदि वे स्क्रीनप्ले राइटर होने के साथ-साथ निर्देशक भी हुए तो बात अलग है। निर्देशक भी विशिष्ट हो तभी बात बनती है। हर स्क्रीनप्ले राइटर की अपनी अलग शैली होती है।
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ली ब्रैकेट पिछली सदी की एक महत्वपूर्ण साइंस फिक्शन लेखक तथा स्क्रीनप्ले राइटर रही हैं। उनकी कहानियां कई कहानी संग्रह में प्रकाशित हैं। ‘द स्टारमैन’ (जो ‘द गैलाक्टिक ब्रीड’ के नाम से भी उपलब्ध है), ‘द लॉनग टुमारो’, ‘अल्फा सेंटुरी ओर डाई!’ तथा ‘द बिग जम्प’ उनके उपन्यास हैं।
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एक सूत्र के अनुसार उन्होंने 27 स्क्रीनप्ले लिखे और इन स्क्रीनप्ले पर सफल फिल्म बनीं, चूंकि उन्होंने स्टार वार्स शृंखला फिल्म की कुछ कड़ियों का स्क्रीनप्ले लिखा अत: उनका पुकारू नाम ‘द क्वीन ऑफ स्पेस ऑपेरा’ पड़ गया।

असल में निर्देशक हॉवर्ड हाक्स ने ली ब्रैकेट का उपन्यास पढ़ने के बाद उनका परिचय स्क्रीनराइटिंग से करवाया। हॉवर्ड हाक्स और ली ने मिल कर 1946 की फिल्म ‘द बिग स्लीप’ के स्क्रीनप्ले पर काम किया। 


’फिल्म- ‘द बिग स्लीप

करीब दो घंटे की फिल्म ‘द बिग स्लीप’ के लेखन में विलियन फॉक्नर, ली ब्रैकेट तथा जूल्स फर्दमैन, तीन लोगों का नाम आता है। हॉवर्ड हाक्स निर्देशित इस फिल्म में फिलिप मार्लो एक बहुत धनी परिवार द्वारा प्राइवेट जासूस के रूप में काम पर लगाया जाता है। इस जटिल केस के समाप्त होने के पूर्व वह हत्या, ब्लैकमेल और बहुत कुछ देखता है। इसमें हम्फ्री बोगर्ट, लौरेन बैकॉल ने मुख्य भूमिकाएं की हैं। फिल्म को 2 पुरस्कार प्राप्त हुए।

7 दिसम्बर 1915 को लॉस एन्जलस में जन्मी ली ब्रैकेट ने कई कहानियां और विज्ञान कथाएं लिखीं। उन्होंने हॉलीवुड में खूब सफलता पाई। वे स्क्रीनप्ले राइटिंग को एक टीम वर्क मानती हैं। उन्होंने स्वयं भी अधिकांश स्क्रीनप्ले समूह में लिखे। उनके अनुसार फिल्म लिखना ईंटों से दीवार चुनने के समान है, इमारत बनाने जैसा।

आपके पास एक प्लान होता है और कुछ ब्लॉक्स होते हैं। तब कोई कहता है, मेरे ख्याल से इस पत्थर को इधर से उठा कर उधर रखना चाहिए और इस पत्थर को लाल रंग से रंगते हैं और इसे हरे रंग से। फिर भी आपको मूल स्वरूप बनाए रखना होता है, भले ही डिटेल्स बदल दें।

यह सब सीखने में उनको काफी समय लगा लेकिन अंतत: उन्होंने सीख लिया। हालांकि उनके लिए यह सब काफी थकाने वाला था।

history of world cinema in hindi Leigh Douglass Brackett lee brackett screenwriter
विश्व सिनेमा का इतिहास - फोटो : istock

स्क्रीनप्ले सहभागिता का सहयोग का कार्य है। फिल्म बनने की प्रक्रिया टीम का प्रयास होता है। स्क्रीनराइटर ठीक वही नहीं कर सकता है जो वह चाहता है, उसे दूसरों की बात भी सुननी होती है, माननी होती है। स्क्रीनप्ले राइटिंग तथा उपन्यास या कहानी लेखन बहुत भिन्न हैं। कहानी या उपन्यास लिखते समय लिखने वाला सृजनकर्ता होता है, भगवान के समकक्ष होता है।

वो जो चाहे कर सकता है, उसके और उसके लेखन के बीच कोई और नहीं होता है, मगर स्क्रीनप्ले राइटिंग इस सबसे अलग होता है। यहां समझौते करने होते हैं। फिल्म बनाने में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो लेखक के क्षेत्र के बाहर होते हैं। उसे कई और लोगों के साथ मिल कर चलना होता है।

उनके स्क्रीनप्ले लेखन की शुरुआत ‘द बिग स्लीप’ से हुई, मगर वे ज्यादा जानी जाती हैं, फिल्म ‘स्टार वार्स: एपिसोड V– दि एम्पायर स्ट्राइक्स बैक’ के लिए। हालांकि यह फिल्म उनके जाने के बाद 1980 में बनी। ली ब्रैकेट 1978 में कैंसर से गुजर गईं। उनकी मृत्यु कैलिफोर्निया में हुई। चूंकि वे इसका केवल पहला ड्राफ्ट ही लिख पाई थीं, अत: जॉर्ज लुकास ने इसे फिर से लिखा और स्क्रीनप्ले समाप्त करने केलिए, अंतिम स्वरूप देने केलिए लुकास ने लॉरेंस कैसडन को भी साथ लिया।

ऑस्कर विजेता फिल्म

दो घंटे से कुछ ऊपर की इस एडवेंचर, ड्रामा, फैंटसी फिल्म में दि एम्पायर के विद्रोहियों पर कब्जे के बाद की कहानी है। इस कड़ी का निर्देशन इर्विन केर्शनर ने किया है। इसमें ली के ड्राफ्ट का बहुत कम बचा है, लेकिन क्रेडिट में स्क्रीनप्ले के लिए ली ब्रैकेट के साथ लॉरेंस कैसडन, जॉर्ज लुकास के नाम आते हैं। यह उनका अंतिम स्क्रीनप्ले था।

फिल्म को ढेर सारे पुरस्कारों के साथ ऑस्कर भी मिला। मार्क हैमिल तथा हैरिसन फोर्ट इस फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में हैं। उन्होंने कई बार रे ब्रैडबरी के साथ काम किया। इसके पहले ली ब्रैकेट ने रेमंड शैन्डलर के साथ मिल कर 1973 की फिल्म ‘द लॉन्ग गुडबॉय’ का स्क्रीन्प्ले लिखा था। करीब दो घंटे की यह फिल्म कॉमेडी, क्राइम तथा ड्रामा का मिश्रण है।

यहां भी प्राइवेट डिडेक्टिव फिलिप मार्लो है, जो एक दोस्त की सहायता करने के चक्कर में खुद ही उसकी पत्नी की हत्या में फंस जाता है। दो पुरस्कार प्राप्त इस फिल्म का निर्देशन रॉबर्ट एल्टमैन ने किया है और एलिओट गौल्ड, नीना वान पैलान्ट अभिनेता हैं।


फिक्शन लिखनी में ब्रैकेट की अलग ही पहचान

ली ब्रैकेट का जलवा ऐसा था कि जॉन कारपेंटर की हॉरर फिल्म ‘हैलोवीन’ (1978) में एक चरित्र का नाम ली ब्रैकेट के नाम पर शेरिफ ली ब्रैकेट रखा गया था। चूंकि उनका पूरा नाम ली डगलस ब्रैकेट था अत: शुरुआत में बहुत सारे लोग सोचते थे कि वे एक पुरुष हैं। स्त्री का साइंस फिक्शन लिखना वैसे भी लोगों के गले नहीं उतरता है। इतना ही नहीं निर्देशक हॉवर्ड हाक्स तो मानते थे वह अच्छी लेखक हैं क्योंकि वे ‘एक पुरुष’ की तरह लिखती हैं। अब इन बातों का क्या उत्तर दिया जाए।

अपने काम को रस लेकर करने वाली ली ब्रैकेट ने टीवी के लिए ‘द रॉकफोर्ड फाइल्स’ की स्क्रिप्ट लिखी क्योंकि स्क्रीनप्ले राइटिंग कला से अधिक तकनीकि है अत: यह उनके लिए सदा चुनौती रहा। ‘टेरर आउट ऑफ स्पेस’, ‘द ड्रैगन-क्वीन ऑफ जुपीटर’, ‘क्यूब फ्रॉम स्पेस’, ‘ए वर्ल्ड इज बोर्न’, ‘द डीमन्स ऑफ डार्कनेस’ आदि उनके साइंस फिक्शन के नाम हैं। उन्होंने कई लेख भी लिखे।

ली ब्रैकेट के लेखन का रूसी, जर्मन, फ्रैंच, डच, इटैलियन, चेक, जापानी, स्पेनिश, डैनिश, तुर्की आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उपरोक्त वर्णित फिल्मों के अलावा उन्होंने ‘रिओ ब्रैवो’, ‘एल डोरैडो’, ‘हैटारी! आदि फिल्मों के स्क्रीनप्ले भी लिखे।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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