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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: अम्मा- परिवर्तन का दौर

Sun, 31 Aug 2025 04:30 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 31 Aug 2025 04:30 PM IST
सार

  • कलाकारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को विश्लेषित करना, उनके संभव हल निकालना ‘अम्मा’ के उद्देश्य में शामिल था। अत: एक एडवायजरी बोर्ड का गठन हुआ। फिल्म उद्योग खासकार मलयालम फिल्म उद्योग के विकास में बोर्ड की खास भूमिका निर्धारित की गई। 

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history of world cinema association of malayalam movie artists amma Film production
सिनेमा की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

जब भी कोई संस्था अथवा संगठन प्रारंभ होता है, उसके उद्देश्य बहुत उच्च, कल्याणकारी, एवं आदर्श लिए हुए होते हैं, बाद में वह छीजता जाता है। अत: जब 1994 में ‘असोसिएशन ऑफ मलयाली मूवी आर्टिस्ट्स’ ‘अम्मा’ (AMMA) की स्थापना हुई तो उसका उद्देश्य भी एक ऐसा मंच था जहां खुला, स्वस्थ्य विमर्श स्थान पाए। जो प्रोफेशनल एवं प्रासंगिक मुद्दों पर एकजुट हो कर विचार-विमर्श करे।

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संगठन सदस्यों के हितों की सुरक्षा करे। रिटायर्मेंट, हारी-बीमारी, आपदा के समय सदस्यों को सहारा दे। सदस्यों के विकास, उनके हुनर के प्रदर्शन की व्यवस्था करे। इन सबके लिए संगठन ने बाकायदा नियम-कानून बनाए, अलग से फंड की भी व्यवस्था की।

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मलयालम फिल्म उद्योग और इसका विकास

कलाकारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को विश्लेषित करना, उनके संभव हल निकालना ‘अम्मा’ के उद्देश्य में शामिल था। अत: एक एडवायजरी बोर्ड का गठन हुआ। फिल्म उद्योग खासकार मलयालम फिल्म उद्योग के विकास में बोर्ड की खास भूमिका निर्धारित की गई। कलाकारों के आपसी संबंध के विकास एवं अन्य संगठनों से संबंध को भी ध्यान में रखा गया। विशेष रूप से समाज के कमजोर तबके की सहायता, उनकी शिक्षा, सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाकालीन योजनाओं का प्रवधान इस संस्था में प्रारंभ से रखा गया।

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सदस्यों से आत्मानुशासन, पेशेगत एवं सामाजिक नैतिकता को ध्यान में रखने की अपेक्षा संगठन रखता है। इन उद्देश्यों के प्राप्ति की सफलता संगठन के सदस्यों की एकजुटता और प्रयास से ही संभव है। संगठन डॉन्स, म्युजिक, ड्रामा एवं सिनेमा से जुड़ी अन्य कलाओं के विकास तथा प्रशिक्षण हेतु कॉलेज, शिक्षण संस्थान, स्कॉलरशिप, मेरिट सर्टिफिकेट, पुरस्कार की स्थापना एवं संचालन केलिए प्रतिबद्ध है। साथ ही पत्र-पत्रिका प्रकाशित करने की योजना भी बनी।

मतलब कला, ज्ञान के उन्नयन, सिने-पेशेगत विकास इसकी प्रमुखता में समाहित रहे। ड्रामा, स्टार-नाइट, डॉन्स-म्यूजिक प्रदर्शन, देश-विदेश में इनके मंचन की व्यवस्था करना, जनता एवं समाज से संबंध बना कलात्मक रुचि को बढ़ावा देना ‘अम्मा’ का लक्ष्य रहा।

केरल की फिल्मों ने भारतीय फिल्मों हिन्दी फिल्म उद्योग को चुनौती दी है। सबटाइटिल्स और डबिंग की सहूलियत के चलते आज देश-विदेश की अन्य भाषाओं का सिनेमा काफी हद तक आसान हुआ है। केरल के सिनेमा की थीम, कलाकारों की अभिमय कुशलता, कैमरावर्क, संगीत की गुणवत्ता को सबने स्वीकारा है।

उत्तर भारत खासकर हिन्दी जनता को मलयालम सिनेमा और इसके कार्य प्रणाली की अधिक जानकारी नहीं है। इसे मुख्य रूप से ‘अम्मा’ (एसोशिएसन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट, AMMA) संस्था चलाती है। इसे सुचारू रूप से चलाने हेतु इस संस्था में कर्तव्य एवं दायित्व का स्पष्ट विभाजन है। अत: यहां प्रेसिडेंट, वाइस-प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, जनरल सेक्रेटरी, ट्रेजरर, एक्जिक्युटिव कमिटी इसकी स्थापना काल से है।

जैसा कि अधिकांश संस्थाओं के साथ होता है, समय के साथ इसमें तमाम बुराइयां आ जाती हैं। नए सदस्यों को संस्था के प्रारंभिक सदस्यों द्वारा संस्था को खड़ा करने के दौरान किए गए संघर्षों, कठिनाइयों, परिश्रम की परवाह कम होती है। उन्होंने जिन चुनौतियों का सामना किया, उससे नए सदस्य अनभिज्ञ होते हैं। धीरे-धीरे संस्था तमाम भेदभाव का अड्डा बन जाती है। यहां भी ऐसा हुआ।

लेकिन एक बात गौरतलब है, ‘अम्मा’ शुरू से पूरी तरह पुरुषसत्तावादी रही है, भले ही नाम ‘अम्मा हो। और एक समय यहां भी भेदभाव, अलगाव की प्रधानता हो गई। कुछ लोगों की उपेक्षा की जाने लगी, कुछ का वर्चस्व कायम हुआ, कुछ सदस्य मनमानी करने लगे। शक्तिशाली सदस्यों के कुकर्म पर परदा डाला जाने लगा, वे कुछ भी करने के बावजूद सदस्य बने रहे। निकाले गए, तो फिर से तुरंत शामिल कर लिए गए।

इन अनियमितताओं से आजिज आकर कुछ सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। कुछ को घोषित/अघोषित रूप से बाहर कर दिया गया। हेमा कमिटी की रिपोर्ट के साथ कई बातें बाहर आई, कुछ तब भी दबी रहीं। खूब हंगामा बरपा।

पुरुषवादी संचालित संस्था में स्त्रियों की जीत

एक बार फिर 2025 में ‘अम्मा’ में चुनाव सम्पन्न हुए। कुछ सदस्यों ने चुनाव पत्र भरा, कुछ ने भरने के बाद नाम वापिस ले लिया। अंत में 500 सदस्यों क संस्था में 298 सदस्यों ने अपने वोट का प्रयोग किया। जब चुनाव का रिजल्ट आया तो पासा पलटा हुआ था। पुरुषवादी संचालित संस्था के सारे प्रमुख पदों पर स्त्रियों ने जीत हासिल की थी।

अभिनेत्री श्वेता मेनन ‘अम्मा’ की प्रथम महिला प्रेसिडेंट चुनी गईं। कुकू परमेश्वरन जनरल सेक्रेटरी बनी और वाइस-प्रेसिडेंट का पद लक्ष्मीप्रिया के नाम रहा।

मगर यह सफर आसान नहीं रहा। श्वेता मेनन ने चुनाव में नामांकन का फैसला किया, पर्चा भरा तो उनके ऊपर आरोप लगा। दुष्प्रचार किया गया कि श्वेता मेनन ने पैसों के लोभ में फिल्म में अश्लील दृश्य किए है। वे इस झूठे आरोप से मानसिक रूप से बहुत व्यथित हुईं। उन्हें अपनी बेटी को लेकर चिंता हो गई। बेटी अपनी मां के बारे में क्या सोचेगी। उनके अनुसार किसी औरत को ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े। वे परेशान हुई, पर हताश नहीं हुईं।

असल में जब मोहनलाल ‘अम्मा’ के प्रेसिडेंट थे, वे संस्था की वाइस-प्रेसिडेंट थीं, इससे उन्हें बहुत आत्मविश्वास मिला। और जब मोहनलाल ने स्पष्ट किया कि वे इस पद पर नहीं रहेंगे तो श्वेता ने इस पद केलिए खड़े होना तय किया। उनके इस निश्चय को कई अन्य वरिष्ठ लोगों ने बढ़ावा दिया।

इस पूरे कुप्रचार के दौरान उन्होंने कभी नामांकन वापस लेने की बात नहीं सोची। नतीजा अभूतपूर्व एवं अप्रत्याशित था। श्वेता का कहना है कि नई कमिटि में कई स्त्रियां हैं, मगर हम लिंग के आधार पर नहीं सोच रहे हैं। हम अपने पद के अनुरूप भूमिका निबाहेंगे। सारे निर्णय संस्था के बाईलॉज के अनुसार होंगे। विचार-विमर्श के बाद ही कोई बात तय होगी। जो सदस्य किसी भी कारण से संस्था छोड़ गए हैं, वे उनसे बातचीत करने को तैयार हैं।

श्वेता विश्वास करती हैं कि सिनेमा में लिंग विभाजन नहीं होता है, केवल पात्र का अस्तित्व होता है। फिल्म में कलाकार का जीवन बस ‘एक्शन’ और ‘कट’ के बीच होता है। प्रेसिडेंट के रूप में वे संस्था को और मजबूत बनाने का प्रयास करेंगी। उसे भविष्य में अधिक शक्तिशाली एवं स्थिर बनाना उनकी आशा तथा अपेक्षा है।

मोहनलाल ने मजबूत एवं प्रभावपूर्ण कमिटि की आशा व्यक्त की है। फिल्म्स के राज्य मंत्री साजी चेरियन ने चुनाव के इस नतीजे को मलयालाम सिनेमा की सर्वाधिक प्रभावकारी संस्था केलिए लैंगिक समावेशिता की ओर सांकेतिक एवं व्यावहारिक बदलाव कहा है।

‘अम्मा’ की नई समिति कैसा और कितना काम करेगी, यह तो भविष्य बताएगा। लेकिन एक बात तय है, इन स्त्रियों का काम आसान नहीं होने वाला है। नए चुने हुए सदस्यों एवं संस्था को बधाई!



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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