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विश्व साहित्य का आकाश: नाइफ- नफरत पर प्रेम की जीत

Fri, 07 Feb 2025 06:44 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Fri, 07 Feb 2025 06:44 PM IST
सार

लिखने के अपने जोखिम और खतरे होते हैं, रुश्दी को भूमिगत होना पड़ा। राज्य से सुरक्षा लेनी पड़ी, रहने के ठिकाने बदलने पड़े। क्या फतवा देने वाले और उसे कारगर करने केलिए जोश वालों ने उपन्यास पढ़ा है? हालांकि रुश्दी ने मुसलमानों से माफी मांग ली, इसके बावजूद उन्हें छिप कर रहना पड़ रहा था।

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history of literature Knife novel by Salman Rushdie review in hindi
विश्व साहित्य की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

19 जून 1947 को बंबई में जन्मे सर अहमद सलमान रुश्दी स्वयं को ‘मिडनाइट’स चिल्ड्रन’ में गिनते हैं। इस विश्वविख्यात रचनाकार के दूसरे उपन्यास का नाम है, ‘मिडनाइट’स चिल्ड्रेन’, जिसकी कहानी 1947-1977 के बीच चलती है। इस ऐतिहासिक, आत्मकथात्मक घोषित मैजिकल रियलिज्म उपन्यास ने रुश्दी को 1981 में बुकर पुरस्कार दिलाया। कुछ साल बाद 1993 में इसी किताब के लिए उन्हें बुकर ऑफ बुकर्स से भी नवाजा गया, फिर 2008 में बेस्ट ऑफ बुकर भी उन्हें मिला। ब्रिटेन ने उन्हें ‘सर’ की उपाधि दी है, अभी वे अमेरिकन नागरिक हैं।

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साहित्यिक दुनिया जिस रुश्दी को नोबेल मिलने और उसका समारोह मनाने की प्रतीक्षा कर रही थी, उस पर कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया। उनकी झोली में उपरोक्त उपन्यास के अलावा ‘ग्राइमस’, ‘शालीमार द क्लाउन’, ‘शेम’, ‘द ग्राउंड बिनीथ हर फीट’, ‘फ्यूरी’, ‘गोल्डेन हाउस’, ‘द मूर्स लास्ट साई’, ‘द सैटनिक वर्सेस’, ‘दि एंचान्ट्रेस ऑफ फ्लोरेंस’, ‘विट्री सिट’ भी हैं, उन्होंने अपने बेटे केलिए ‘हारुन एंड द सी ऑफ स्टोरीज’ लिखा, साथ ही गद्य के अन्य तमाम नमूने भी रुश्दी ने रचे हैं। 

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उपन्यास जिसने ला दी साहित्यिक और राजनैतिक इलाकों में भूचाल

व्यंजनापूर्ण कार्य द्वारा विचारपूर्ण हास्य गद्य में अपनी बात कहने वाले इस लेखक का चौथा उपन्यास ‘द सैटनिक वर्सेस’ 1988 में ब्रिटेन में और 1989 में अमेरिका में प्रकाशित हुआ, इसके प्रकाशित होते ही साहित्यिक और राजनैतिक इलाकों में भूचाल आ गया। इसे प्रतिबंधित कर दिया गया (अब फिर से भारत में मिल रहा है) एक धार्मिक नेता ने उनका सिर काट लाने पर ईनाम घोषित कर दिया।

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लिखने के अपने जोखिम और खतरे होते हैं, रुश्दी को भूमिगत होना पड़ा। राज्य से सुरक्षा लेनी पड़ी, रहने के ठिकाने बदलने पड़े। क्या फतवा देने वाले और उसे कारगर करने केलिए जोश वालों ने उपन्यास पढ़ा है? हालांकि रुश्दी ने मुसलमानों से माफी मांग ली, इसके बावजूद उन्हें छिप कर रहना पड़ रहा था।

कई दशकों के बाद वे सतर्क पर निर्भीक रहने लगे थे कि भरी सभा में उन्हें चाकू से गोद दिया गया। कट्टरपंथियों ने मिस्र के नोबेल पुरस्कृत नजीब महफूज पर भी जानलेवा हमला किया था। रुश्दी ‘नाइफ’ में इस घटना का उल्लेख करते हैं, तनिक दूसरे ढंग से। महफूज ने तब रुश्दी के फतवे का विरोध किया था और लिखा था विचार एवं लेखन बचा रहेगा। महफूज का बचा रहा, रुश्दी आशा करते हैं, उनका लिखा भी बचा रहेगा (इसमें कोई शक नहीं है)।

रुश्दी के अनुवादक, प्रकाशक भी इस फतवे की चपेट में आए। वे न्यूयॉर्क के एक सुदूर इलाके में ‘अमेरिका: निर्वासित लेखकों की शरणस्थली तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सुरक्षित घर’ पर बोलने गए थे, तब हमला हुआ। अमेरिका भी सुरक्षित नहीं है। वहां भी टॉवर गिरते हैं और अब साहित्य के एक टॉवर पर निंदनीय हमला हुआ है। इस बार उनके लिए यह जीवन-मरण का प्रश्न बन गया।

history of literature Knife novel by Salman Rushdie review in hindi
नॉवेल की दुनिया - फोटो : freepik

फतवा के समय भूमिगत रहते हुए और अब एक लंबे समय तक जिंदगी-मौत से लड़कर निकलने के बाद एक बात जो रुश्दी के विषय में मजबूती से कही जा सकती है, वह है उनकी रचनात्मकता, उनकी जिजविषा। हर बार उनके लेखन को नवजीवन मिलता रहा है। वे कुछ नया रचते हैं। इस बार हमले के पश्चात भी उन्होंने ‘नाइफ: मेडीटेशन्स आफ्टर एन अटेम्प्ट्ड मर्डर’ रचा है। अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार (उनके एक संग्रह का नाम ‘लैंग्वेजेज ऑफ ट्रूथ’ है) ने इस बार उपन्यास नहीं, बल्कि संस्मरण लिखा है।

अपने स्पष्ट गद्य के लिए प्रशंसित सलमान रुश्दी का काम मुख्यरूप से पूर्वी तथा पश्चिमी सभ्यताओं के अवरोधों तथा प्रवासन को संबोधित करता है। वे प्रवासी की तरह भारत पर पैनी नजर रखते हैं। इंग्लिश भाषा पर रुश्दी का अधिकार तथा यथार्थ और कल्पना का अद्भुत मिश्रण चकित करने वाला है। उनका गद्य पाठक को अपनी मोहकता में घेरता है।

संस्मरण ‘नाइफ’

अपने संस्मरण ‘नाइफ’ में वे हत्यारे का नाम नहीं देते हैं, उसे ‘दि ए’ नाम से संबोधित करते हैं। उसके प्रति तनिक भी कटु नहीं हैं, वे जानना चाहते हैं, आखिर उसके भीतर यह चाकू कैसे उगा? बुरी तरह से घायल अवस्था में वे भी उनका मस्तिष्क सचेत था और लिखते समय वे सदा की तरह अपने उसी तेवर और विट के साथ उपस्थित हैं। कभी-कभी वे सोचते हैं, शर्मिंदा होते हैं कि उन्होंने उलट कर प्रतिकार क्यों नहीं किया? फिर सोचते हैं, मैं क्या कर सकता था?

यह हमला आकस्मिक और अनेपक्षित था। वे इस बात को गर्व के साथ लिखते हैं कि उन्होंने सारे वार सामने झेले, भागे नहीं, उनकी पीठ पर कोई जख्म नहीं है। मौत सामने देख कर भी उन्होंने आपा नहीं खोया। ‘नाइफ’ पढ़ते हुए पाठक के मन में सलमान रुश्दी हेतु सम्मान थोड़ा और बढ़ जाता है।

किताब के प्रारंभ में सैमुएल बेकेट का कोटेशन है, ‘हम दूसरे होते हैं, वही नहीं रहते जो कल की आपदा के पूर्व थे।’ शुरू में जब वे अपनी घायल अवस्था का चित्रण करते हैं तो पाठक सिहर जाता है, चाकू के वार के बाद आंख ‘कोटर से बाहर निकल कर और मेरे चेहरे पर बड़े नरम-उबले अंडे की तरह लटक रही थी।’

करीब दो सौ पन्नों की किताब दो भाग में विभाजित है एवं 8 चैप्टर में पूरी होती है। यहां वे घृणा से भरे नहीं हैं, वे एलिज़ा (उनकी पांचवीं पत्नी) एवं लेखन के प्रेम में हैं। लिखते हैं, ‘मैंने सदैव विश्वास किया है कि प्रेम शक्ति है, और अपने प्रबल रूप में यह पहाड़ हिला सकता है। यह दुनिया परिवर्तित कर सकता है।’ वे अपने हत्यारे से कभी सीधे बात नहीं करना चाहते हैं।

मगर किताब में रुश्दी आक्रमणकर्ता से बात करते हैं, लंबी बातचीत करते हैं, करीब तीस पन्नों (127-156) में बात करते हैं। इस खंड का अंत बहुत मानीखेज है। अंतिम वाक्य है, ‘तुमने हत्या की कोशिश की, क्योंकि तुम नहीं जानते थे हंसा कैसे जाता है।’

हत्यारे पर लेखक सलमान रुश्दी हंस सकते हैं, हंसना जानते हैं, इसीलिए ‘नाइफ’ लिख सकते हैं। कट्टरता पर इससे बड़ा तमाचा और क्या होगा? हंसना न जानने वालों की विडम्बना पर हंसा ही जा सकता है, भले ही वे चाकू चलाएं। एक लेखक के रूप में वे इस हादसे के बाद बदले नहीं हैं। किताब का अंतिम वाक्य संकेत करता है, वे घर लौट रहे हैं, स्व में वापसी कर रहे हैं।

स्व-धर्म (लेखन) पर अडिग हैं। वे एलिजा का हाथ पकड़ कर कहते हैं, ‘चलो घर चलें।’ यह वास्तव में ‘मृत्युदूत’ से होते हुए ‘जीवन दूत’ का संस्मरण है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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