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हिंसा से नहीं स्कूलों में हैप्पीनेस क्लास से पहचानी जाए दिल्ली

Wed, 04 Mar 2020 11:18 AM IST
Devanand Ray Devanand Ray
Updated Wed, 04 Mar 2020 11:18 AM IST
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happiness classes in delhi schools Melania Trump visit and experience Aap Govt step
अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ने हैप्पीनेस क्लासेस की तारीफ कर ट्वीट किया(File photo) - फोटो : PTI

इन दिनों दिल दिल्ली पूरी दुनिया में दो वजह से चर्चा में है एक तो हाल ही में हुई हिंसा और दूसरी यहां के स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस क्लासेस। हैप्पीनेस क्लासेस ने विश्वस्तरीय पहचान बनाई है। मीडिया और मानव का स्वभाव एक सा ही है। दोनों को हमेशा कुछ नया चाहिए, सो हैप्पीनेस क्लासेस भी उसी तरह की है। 

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जब अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ने इसकी तारीफ कर ट्वीट किया तो यह सबकी जुबां पर चढ़ने लगा है। वैसे राजनीतिक मुद्दों से इतर बात करें तो दिल्ली में आप नेता मनीष सिसोदिया ने शिक्षा के क्षेत्र में बेशक बेहतर काम किया है। सरकारी स्कूलों में जिस तरह एक अभिनव प्रयोग के माध्यम से हैप्पीनेस करिकुलम को जोड़कर हैप्पीनेस सरकारी स्कूलों को विश्व प्रसिद्ध बनाने का प्रयास निसंदेह सराहनीय है।
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हैप्पीनेस क्लास कुछ-कुछ अमेरिका के बी बेस्ट इनीशिएटिव से मिलता-जुलता है, पर हैप्पीनेस सिलेबस में सामान्य मानवीय गुणों तथा नैतिक शिक्षा का विशेष महत्व है, जो उसे पूरे दुनिया में विशेष पहचान दिला रहा है। हैप्पीनेस क्लास की शुरुआत वर्ष 2018 में दिल्ली के स्कूलों में शुरू हुई थी। शुरुआत में इस प्रकार के क्लासों का उद्देश्य बच्चों को मानसिक तनाव तथा डिप्रेशन से दूर रखना था। हैप्पीनेस क्लासेज कक्षा एक से आठवीं तक लागू होता है और इसकी खास बात यह है कि इसमें कोई लिखित परीक्षा नहीं होती।
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इसमें बच्चों का मूल्यांकन का अ स्तर उनका हैप्पीनेस इंडेक्स होता है। यह कुछ वैसा ही है, जैसे भूटान का जीएनएच (ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस)। जैसे हम अपने देश की प्रगति जीडीपी में मापते हैं तो वही हमारा पड़ोसी देश इसे जीएनएच में मापता है। अर्थात वहां पर व्यक्तियों की खुशहाली ही वहां की प्रगति मानी जाती है। आने वाले 20 मार्च को हम इंटरनेशनल डे आफ हैप्पीनेस मनाएंगे।

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Melania Trump in Happiness Class - फोटो : PTI

डेनमार्क फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश सालों से हैप्पीनेस इंडेक्स में टॉप पर हैं और सिर्फ हम ही नहीं दुनिया के कई बड़े देश टॉप टेन में भी नहीं हैं। यह चिंताजनक है। हैप्पीनेस इंडेक्स को मुख्यतः 4 आधार पर मापा जाता है। प्रथम सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण, द्वितीय पर्यावरण का संरक्षण चित्र सतत विकास और बेहतर प्रशासन, जो वर्तमान सामाजिकता और पर्यावरण के नजर से बेहद जरूरी है।

आज मोबाइल ने दूर के लोगों से नजदीकियां बढ़ाई है पर पास पड़ोस से हमें दूर कर दिया है। बच्चे भी इसके शिकार होते जा रहे हैं, परंतु हैप्पीनेस का एक उपाय निकालते हुए बच्चों को होमवर्क में दादा दादी की कहानियां सुनाने का काम दे रहा है। साथ ही हमें एक परिवार की तरह जुड़े रहने परिवार का महत्व समझने और उसके मूल्यों को कम नाचन का भी शिक्षा दे रहा है। हैप्पीनेस क्लास में हफ्ते के 2 दिन नैतिक शिक्षा पर कहानियां सुनाई जाती है और फिर कितना सीखा के अंतर्गत मौखिक सवाल भी पूछे जाते हैं। इससे बच्चों में रचनात्मक शक्ति बढ़ती है। 

इस कारण आज दुनिया के कई देशों में दिल्ली के इस मॉडल को खूब पसंद किया जा रहा है और अपने देश में कई राज्यों में इसे लागू करने की बात कही जा रही है। कारण कि हम अपने बच्चों को स्ट्रेसफुल स्कूल नहीं बल्कि इंजॉय फुल स्कूल देना चाहते हैं, जो हैप्पीनेस क्लास पूरी करती है। उम्मीद है आने वाले दिनों में दिल्ली की पहचान हिंसा से नहीं हैप्पीनेस स्कूलों से होगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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