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यादों में जनरल बिपिन रावत और साथी: असली हीरो कहीं नहीं जाते, वे देश की मिट्टी और हवा में बस जाते हैं

Fri, 10 Dec 2021 01:08 PM IST
Swati sharma स्वाति शैवाल
Updated Fri, 10 Dec 2021 01:08 PM IST
सार

फौज में रहने वाला हर व्यक्ति भी इंसान ही होता है, उनके भी परिवार होते हैं और आपकी-हमारी तरह वे भी तीज-त्योहार पर साथ बैठकर मिठाई खाना और जश्न मनाना पसंद करते हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर उनके लिए अपना देश होता है।

देश जो हम सबकी भी जिम्मेदारी है लेकिन हम जिसे 15 अगस्त और 26 जनवरी की छुट्टी तक सीमित रखते हैं, तो सीमा पर तैनात उन सैनिकों को भी ये भरोसा दिलाइये कि देश के भीतर हम जिम्मेदार नागरिक बनकर रहेंगे। आप निश्चिन्त होकर सीमा संभालिए। 

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आज जनरल बिपिन रावत का फोटो लगभग हर भारतवासी के सोशल मीडिया स्टेटस में लगा हुआ है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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नमी ये आंखों की नहीं है फकत,
दिल बह रहे हैं दरिया की तरह। 
भरोसा अब भी भीतर से थपथपाता है, 
देश हर बार रगों में दौड़ जाता है।
तुम तिरंगे के साथ ही लहराओगे,
हमारे सच्चे हीरो तो तुम ही कहलाओगे। 


सीडीएस जनरल बिपिन रावत महज एक नाम नहीं हैं। वे स्वयं में एक भावना हैं जो आज हर भारतवासी के दिल से पिघलकर बाहर आ रही है। हां मैं उन्हें 'हैं' ही लिखूंगी क्योंकि उन जैसे बहादुर कभी 'थे' नहीं होते। वो देश की मिट्टी और हवा के एक एक कण में हमेशा बसे होते हैं। हमें प्रेरणा देने को, हमारा हौसला बढ़ाने को। जनरल रावत और उनके 13 साथी (जिसमें सबसे महत्वपूर्ण उनकी जीवनसाथी हैं) अब भी मौजूद रहेंगे हमारे साथ, हमारे पास, ये विश्वास बनकर कि असली हीरो अमर रहते हैं। 

ये वाकया 1999 का है जब हम एनसीसी कैडेट्स गणतंत्र दिवस कैंप यानी आरडीसी (दिल्ली) के लिए तैयारी कर रहे थे। हमारे प्रशिक्षण के लिए मौजूद थे 16 सिख लाई के ऑफिसर्स और जवान। रोज सुबह लम्बी दौड़ के बाद परेड और उसके बाद बॉलीवॉल खेलते हुए सारे प्रशिक्षक एक लयबद्ध तरीके से बिना किसी खास उत्साह के हमारे साथ होते थे। कारगिल युद्ध शुरू हो चुका था और छोटी मोटी खबरें हमारे पास भी पहुंच रही थीं। अचानक एक दिन हमें आदेश मिला कि आप लोगों को शहर घुमाने ले जाया जा रहा है।
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हम खुश थे और आश्चर्यचकित भी कि ये प्रोग्राम तो कैंप के आखिरी दिन में होता है। बीच कैंप में ऐसा होना? लेकिन ये आश्चर्य खुशी के सामने छोटा पड़ गया। जब शाम को हम वापस कैंप में लौटे तो ऐसा लगा जैसे हवा में जश्न घुला हुआ है। कैंप वही था उतने ही सीमित साधनों के साथ लेकिन कुछ था जो एक्स्ट्रा इफेक्ट दे रहा था। कुछ ही देर में हम 16 सिख लाई की पूरी टुकड़ी के सामने फॉल इन हुए और आज उन सबके चेहरे जैसे खुद दीये बन गए थे। उनकी खुशी उनके चेहरों से बह रही थी और हम सबके चेहरों को रोशन कर रही थी। पता चला कारगिल युद्ध में दुश्मन के छक्के न छुड़ा पाने का मलाल उन वीरों के चेहरे पर इतने दिनों से छलक रहा था। आज खबर आई है कि उनको भी युद्ध मे शामिल होना है और इस खुशी का कारण वही है। उन्होंने उस दिन हमारे लिए विशेष दावत पकाई और हमारे साथ भांगड़ा किया। उस दिन कोई अधिकारी नहीं था, कोई मातहत नहीं था न ही कोई कैडेट था। थी तो बस एक भावना कि देश के साथ हम खड़े हैं।
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अपनी जान की परवाह किये बिना देश की रक्षा और देश मे रह रहे उन करोड़ों लोगों की रक्षा, जिन्हें वे फौजी जानते भी नहीं। - फोटो : प्रयागराज
अपनी जान की परवाह किये बिना देश की रक्षा और देश मे रह रहे उन करोड़ों लोगों की रक्षा, जिन्हें वे फौजी जानते भी नहीं। ये भावना सिर्फ एक सच्चे फौजी में ही हो सकती है। उस एक दिन ने हम सबके मन में फौजियों के लिए बनी जगह को और भी खास बना दिया। 
 

फौज में रहने वाला हर व्यक्ति भी इंसान ही होता है, उनके भी परिवार होते हैं और आपकी-हमारी तरह वे भी तीज-त्योहार पर साथ बैठकर मिठाई खाना और जश्न मनाना पसंद करते हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर उनके लिए अपना देश होता है। देश जो हम सबकी भी जिम्मेदारी है लेकिन हम जिसे 15 अगस्त और 26 जनवरी की छुट्टी तक सीमित रखते हैं, तो सीमा पर तैनात उन सैनिकों को भी ये भरोसा दिलाइये कि देश के भीतर हम जिम्मेदार नागरिक बनकर रहेंगे। आप निश्चिन्त होकर सीमा सम्भालिए। 


आज जनरल बिपिन रावत का फोटो लगभग हर भारतवासी के सोशल मीडिया स्टेटस में लगा हुआ है। उनके लिये पूरा देश गमगीन है। बस इस भावना को बनाये रखना है। देश की रक्षा के लिए जो अपने प्राणों का बलिदान दे रहे हैं उन्हें भरोसा दिलाना है कि भले ही सीमा पर हम आपके साथ नहीं हैं लेकिन हर पल हमारे आशीर्वाद और शुभकामनाएं आपके और आपके परिवार के साथ रहेंगी। सच्चे मन से दुआ कीजिये कि अब भी बहादुरी से डटे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को आप सबके आशीष और दुआओं का फल मिले और वे एकदम स्वस्थ होकर घर आएं। 



गोरखा राइफल्स का युद्धघोष है 'जय मां काली, आयो गोरखाली', और यकीन मानिए देश को जब भी हिम्मत की जरूरत होगी, हवा में ये युद्धघोष गूंजता सुनाई देगा क्योंकि हमारे असली हीरो बादलों के पार से कमांड दे रहे होंगे।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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