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शर्मसार करता है गार्गी कॉलेज का मामला, आखिर कब सुरक्षित होंगी देश की बेटियां  

Thu, 13 Feb 2020 08:25 AM IST
Yogita Yadav योगिता यादव
Updated Thu, 13 Feb 2020 08:25 AM IST
सार

ताजा मामला गार्गी कॉलेज का है, जहां मर्दों ने अपने भारी समूह के साथ मर्दानगी दिखाई है। यह न पहला मामला है, न इसके आखिरी होने की उम्मीद है, क्योंकि पितृसत्ता की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कॉलेज की महिला प्राचार्या भी पूछ रहीं हैं कि “इतना ही डर लगता है तो फेस्ट में आती क्यों हो?” यानी कॉलेज फेस्टिवल तो होते ही लड़कियां छेड़ने उन पर यौन आक्रमण करने के लिए ही आयोजित किए जाते हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में 5 से 7 फरवरी को कॉलेज फेस्टिवल का आयोजन किया गया। - फोटो : SELF

विस्तार

यह सब बर्दाश्त नहीं तो तुम फेस्टिवल में आती ही क्यों हो? सवाल सिर्फ यही अकेला नहीं है और भी बहुत से हैं। जो महामर्द और उनके प्रतिनिधि समय-समय पर लड़कियों से, महिलाओं से पूछते रहते हैं। -कि देर रात घर से बाहर क्यों रहती हो, मोबाइल फोन क्यों रखती हो, बॉयफ्रेंड क्यों बनाती हो, स्कर्ट इतनी छोटी क्यों है, हंसती क्यों हो, बतियाती क्यों हो?आप यहीं मत रुकिए। आप और भी सवाल पूछिए- कॉलेज क्यों आती हो, इतना पढ़ कैसे गईं, तुम सांस क्यों लेती हो, अरे हजारों हजार गर्भपात केंद्र होने के बावजूद तुम पैदा कैसे हो गईं। हमारे पुत्रयेष्टि यज्ञों में विघ्न डालने वाली तुम याज्ञसेनी से अब तक तनी क्यों खड़ी हो?  

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शर्मसार करता है गार्गी कॉलेज का मामला 
दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में 5 से 7 फरवरी को कॉलेज फेस्टिवल का आयोजन किया गया। फरवरी में दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों मे कॉलेज फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। इनका इंतजार विद्यार्थी साल भर करते हैं। अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ ही उनके लिए यह तनावमुक्त होने का भी अच्छा अवसर होता है। इनमें कॉलेज के विद्यार्थी तो शामिल होते ही हैं , साथ ही उन्हे कुछ एंट्री पास भी दिए जाते हैं ताकि वे अन्य कॉलेजों में पढ़ने वाले अपने दोस्तों-साथियों को भी इसमें आमंत्रित कर सकें।
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इसका सीधा अर्थ है कि कॉलेज फेस्टिवल की आयोजन समिति और खुद कॉलेज प्रशासन बड़ी हुई भीड़ के लिए तैयार होता है। इस बड़ी हुई भीड़ के लिहाज से सुरक्षा के इंतजाम करना भी कॉलेज प्रशासन की ही जिम्मेदारी होती है। पर गत फरवरी को जो हुआ वह न सिर्फ सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कॉलेज प्रशासन के भी गैरजिम्मेदाराना इंतजाम की पोल खोल देता है।
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7 फरवरी को गेट धकेल कर कॉलेज की दीवार फांद कर गुंडों की एक पूरी फौज कॉलेज के भीतर घुस आई। - फोटो : एएनआई

क्या हुआ था उस दिन 
दरअसल, गार्गी कॉलेज लड़कियों का कॉलेज है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 7 फरवरी को गेट धकेल कर कॉलेज की दीवार फांद कर गुंडों की एक पूरी फौज कॉलेज के भीतर घुस आई। ये लोग शराब पिए हुए थे, लड़कियों के साथ गंदी हरकतें कर रहे थे और उन पर उन्होंने यौन हमले भी किए। जिसके बाद लड़कियां इतनी डर गईं कि वे रोने लगीं। कुछ लड़कियों ने भीड़ बढ़ती देखकर वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। जबकि वहां खड़ी पुलिस इस मामले में नाकारा साबित हुई।

इस पूरे मामले की शिकायत लेकर जब छात्राएं कॉलेज की प्रिंसीपल प्रोमिला कुमार के पास पहुंची, तो उनका जवाब था कि “अगर तुम्हें इतना ही डर लगता है तो कॉलेज फेस्ट में आती ही क्यों हो?” सिर्फ यही नहीं कॉलेज की छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले साल भी कॉलेज फेस्ट में छात्राओं पर यौन हमले हुए थे पर तब भी कोई एक्शन नहीं लिया गया, इसलिए वे इस बार मुखर होकर मीडिया के सामने आ गईं हैं।  और वे तभी से लगातार प्रदर्शन कर रहीं हैं और मांग कर रहीं हैं कि इस गैर जिम्मेदाराना रवैया पर प्रोमिला कुमार को सस्पेंड किया जाए।

इधर, मामला मीडिया में आने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी गार्गी कॉलेज पहुंची और उन्होंने कई छात्राओं से बात की। तब तक भी कॉलेज प्रशासन की ओर से इस मामले में पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई।
 

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दिल्ली महिला आयोग ने जब कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी किया तब जाकर प्रोमिला कुमार ने फैक्ट चैक कमेटी गठित करने की बात कही। - फोटो : social media

दिल्ली महिला आयोग ने जब कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी किया तब जाकर प्रोमिला कुमार ने फैक्ट चैक कमेटी गठित करने की बात कही। डीसीपी (साउथ) अतुल कुमार के मुताबिक सोमवार 10 फरवरी तक भी उनके पास इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई। यानी कॉलेज प्रशासन अभी भी इस बात की जांच करने का ही इंतजार कर रहा है कि वाकई ऐसा कुछ हुआ भी था कि नहीं। इससे ज्यादा शर्मनाक और घृणित और भला क्या हो सकता है कि कॉलेज कैंपस में ही यौन हमले की शिकार छात्राएं रोती रहीं और कॉलेज प्रशासन को अभी फैक्ट चैक करना बाकी है। 

गौर करने वाली बात यह है कि महिला अधिकारों के संदर्भ में हमेशा यह मांग की जाती है कि प्रशासनिक पदों पर जितनी अधिक महिलाएं होंगी, लड़कियों के लिए माहौल उतना अधिक सुरक्षित होगा। पर उन महिलाओं का क्या जो पूर्ण अधिकार होने के बावजूद पितृसत्ता की पैरोकार बनी रहती हैं। ये पैरोकारी वे तीन तरह से करती हैं, पहला अनजान बनकर, दूसरा उपदेश देकर और तीसरा तथ्यों को दबा-छुपाकर समझौतावादी रुख अख्तियार करके। गार्गी कॉलेज की प्रिंसीपल प्रोमिला कुमार पितृ सत्ता के दो हथियार आजमा चुकी हैं। बारी अब तीसरे की है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश जैन कहती हैं, “यह बहुत ही संगीन मामला है। इस मामले में तुरंत एफआईआर होनी चाहिए थी और सीसीटीवी से पहचान कर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। कॉलेज प्रशासन और वहां मौजूद सुरक्षा अधिकारियों ने इसमें घोर लारवाही बरती। इसके लिए इन  सभी को कम से कम डिमोशन जरूर दिया जाना चाहिए।”

कैमरे के सामने आने से घबराने वाली गार्गी कॉलेज की वह छात्रा अब इतनी दुखी और तनाव में है कि भविष्य में कभी कॉलेज फेस्टिवल में आना नहीं चाहती। पर सवाल करती है कि आखिर पितृसत्ता की जड़ें कितनी गहरी हैं। जहां कॉलेज का कैंपस भी मर्दानगी का अखाड़ा बन गया है। वे या तो कॉलेज फेस्टिवल में न आएं और आएं तो इन यौन हमलों के लिए तैयार रहे। इन मासूम बच्चियों का दोष केवल इतना ही है कि ये लड़कियां हैं और मर्दो के निशाने पर हैं।

वे जो गर्ल्स कॉलेजों के बाहर सीटियां बजाते हैं, बाइक लेकर खड़े रहते हैं, फब्तियां कसते हैं, जिनके लिए दिल बहलाने और आखेट की सबसे आदर्श जगह गर्ल्स कॉलेज के बाहर वाली सड़क होती है, अब वे दीवार फांदकर कॉलेज के भीतर दाखिल हो गए हैं। कि सुरक्षा के तमाम गेट मर्दों की अगवाई में खुद ही टूट गए हैं। हालात इतने भयावह हैं कि जैसे सब तरफ मर्दानगी के अखाड़े सजे हुए हैं। इन अखाड़ों के मर्दो को सिर्फ कानून ही पटखनी दे सकता है।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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