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Eid 2025: अमन-चैन के लिए दुआओं की दुनियां का विस्तार है ईद

Mon, 31 Mar 2025 04:08 PM IST
Dr.Naaz Parveen डॉ. नाज परवीन
Updated Mon, 31 Mar 2025 04:08 PM IST
सार

माहे रमजान के 30 रोजों के बाद ईद की खुशी रोजदारों के चेहरे पे खिलती है। खुदा की तरफ से बंदों को दिया गया ईनाम है ईद। ईद के मायने हर शख्स के लिए अलग - अलग होते हैं।

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Eid 2025 an extension of the world of prayers for peace
Happy Eid ul Fitr - फोटो : Adobe stock

विस्तार

माहे रमजान के 30 रोजों के बाद ईद की खुशी रोजदारों के चेहरे पे खिलती है। खुदा की तरफ से बंदों को दिया गया ईनाम है ईद। ईद के मायने हर शख्स के लिए अलग - अलग होते हैं। हर आम- ओ - खास के लिए ईद में नए कपड़े पहन ईद की नमाज अदा करना बेहद खुशी देने वाला रहता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नए कपड़ों और विभिन्न पकवानों के  साथ खुदा की रहमत है ईद।

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दौलत अफरोज लोगों के लिए किसी की मदद करके सुकून हासिल करने का जरिया है ईद। बच्चों के लिए नई- नई चीजों की खरीदारी और ईदी पाने का जश्न है ईद। रोजदारों के लिए एक साथ एक मुकाम पर खुदा से खैर-बरकत, अमन -चैन के लिए दुआ है ईद। 
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ईद मानवीय मूल्यों,प्रेम,भाईचारे, सब्र और शांति का प्रतीक है। जो हमें खुशियां साझा करना सिखाता है। दूसरों की भलाई के लिए दुआएं करना सिखाता है। जो सच्ची मानवता है। आज जब दुनिया लगातार संघर्ष और वैमनस्य की ओर बढ़ रही है ईद का अमन चैन और भाईचारे का संदेश बेहद प्रासंगिक हो जाता है।
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खुदा सब्र करने वालों के साथ है और शांति सौहार्द को पसंद करने वाला है। कहते हैं खुदा अपने बंदों को उनके मां बाप से सत्तर गुना ज्यादा प्यार करने वाला है और मां बाप के लिए हर औलाद प्यारी होती है। खुदा के लिए सब बराबर हैं। उसकी रहमत सब पर बराबर बरसती है।

ईद की नमाज

ईद के दिन सभी मुसलमान सुबह एक साथ मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करते हैं। पूरी दुनिया पर वो दौर भी गुजरा जब महामारी से डरे- सहमे लोगों ने ईद की नमाज भी घरों में अदा की। किसी ने ऐसे दौर की कल्पना भी नहीं की थी लेकिन खुदा का करम है अब कोरोना के कहर से दुनिया महफूज है। फिर वही खुशियों का दौर लौट आया है।

ईद की विशेष नमाज को अदा करते वक़्त खुदा से दुनिया में अमन चैन और समृद्धि की दुआ की जाती है। सामूहिक रूप से होने वाली दुआ में खुद से पहले पूरे समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए दुआ की जाती है। ईद का यह खूबसूरत संदेश हमें बताता है कि दुआओं का असर सीमाओं से परे होता है। सच्ची दुआ वही है जो पूरे मानवता के हक और बेहतरी के लिए की जाए।

ईद का खूबसूरत संदेश प्रेम और एकता है। इस दिन की सबसे खास बात यह भी है कि सभी को शिकवे गिले भुला कर गले लगाया जाता है और ईद की मुबारकबाद दी जाती है। बच्चों की खुशियों में तब और इजाफा हो जाता है जब उन रिश्तेदारों से भी ईदी का इंतजाम हो जाता है जिनसे वे बड़ों की बड़ी- बड़ी समझदारी के कारण मिलना- जुलना नहीं कर पाते।

ईद की नमाज, ईद का सलाम, नए कपड़े और ईदी की खुशी, ईद को बेहद खूबसूरत बनाती है। यह पर्व हमें यह अहसास दिलाता है कि प्रेम भाईचारे करुणा और सहानुभूति से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है। सदियों से हमारे पूर्वज ऐसा ही करते आए हैं। 

माहे रमजान से ईद तक के सफर पर दान पुण्य (जकात और फितरा) देने की परम्परा यह हिदायत करती है कि ईद की खुशियां जब तक अधूरी हैं जब तक जरूरतमंद लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो जाती।  यह ईद की खास बात है ईद की खुशियां सबसे पहले समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचें।  सभी समाज के हर वर्ग से अपनी खुशियों को साझा करें। ईद एक मौका है जिसमें हम गरीबों, अनाथों और जरूरतमंदों को सहायता करके सामाजिक समरसता की मिसाल कायम कर सकते हैं और अपने रब को भी राजी कर सकते हैं।

आज के दौर में जब पूरी दुनिया अलग- अलग संघर्षों, तनावों, आतंकवाद, युद्ध और असमानता की समस्याओं से जूझ रही है, ऐसे में ईद हमें शांति, सहिष्णुता और भाईचारे की राह दिखाती है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि यदि हम प्रेम, करुणा और दुआओं को अपने जीवन में स्थान दें, तो समाज और विश्व में शांति और सद्भाव का वातावरण बनाया जा सकता है।

यकीनन ईद केवल त्यौहार नहीं, बल्कि खुदा की तरफ से अमन, सौहार्द और परोपकार का संदेश देने वाला तोहफा है। जो हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी तभी प्राप्त की जा सकती है जब हम उसे दूसरों के साथ बांटते हैं और सच्ची दुआ वही है जो सबकी बेहतरी के लिए की जाए। आज, जब दुनिया को शांति और भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब ईद का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। इस त्योहार के माध्यम से हमें न केवल अपने दिलों को प्रेम से भरना है, बल्कि समाज में भी सौहार्द और परोपकार का प्रकाश फैलाना  है। तभी खुदा को राजी किया जा सकता है। आखिर अमन चैन की दुआओं का विस्तार ही है ईद।


 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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