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दूसरा पहलू: नया नौ दिन पुराना सौ दिन

Wed, 24 Dec 2025 05:19 AM IST
निर्मल कांत भूपेंद्र कुमार
भूपेंद्र कुमार Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 24 Dec 2025 05:19 AM IST
सार

आगरा पुलिस कमिश्नरेट के स्थापना दिवस पर हथियारों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें वेरी लाइट पिस्टल व टॉमी गन चर्चा के केंद्र में रहीं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

आपने अक्सर फिल्मों में देखा होगा कि समुद्र के बीच किसी टापू पर फंसे लोग दूर से गुजर रहे जहाज का ध्यान खींचने के लिए एक पिस्तौल से गोली दागते हैं, जो आसमान में रंगीन आतिशबाजी-सी कर देती है। क्या कभी सोचा यह विचार किसका था? अमेरिकी नेवी के लेफ्टिनेंट एडवर्ड डब्ल्यू वेरी ने इसका डिजाइन तैयार किया था। विचार यह था कि समुद्र में फंसे लोग अपना संदेश भेजें, तो वह दूर तक दिखे और उनकी मदद की जा सके। कमाल यह है कि डिजाइन में थोड़े हेर-फेर के साथ वेरी लाइट पिस्टल (वीएलपी) आज भी नौवहन एजेंसियों के अलावा सुरक्षा और राहत बलों के लिए भी बहुत काम की है। इसे बनाने में अब चमकदार प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है।
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पिछले दिनों आगरा पुलिस कमिश्नरेट के स्थापना दिवस पर शस्त्रागार से निकालकर हथियारों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्कूली छात्रों के अलावा जनता ने भी खासी रुचि ली। यह बड़े कैलिबर की सिंगल शॉट पिस्टल है, जो सिंगल एक्शन फायर मैकेनिज्म से चलती है। इसका काम सिग्नल देना है, जिससे बचावकर्ताओं को लोकेशन पता चल सके। इस पिस्टल का इस्तेमाल पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में सेना की जानकारी देने के लिए किया गया था। भारत में यह जालंधर और अहमदाबाद में बनती है। जहां हवाई पट्टी पर रोशनी नहीं होती है, वहां इसका इस्तेमाल विमान उतारने के संकेत के लिए भी किया जाता है। इसका भार 822 ग्राम होता है। इससे नौ से 14 सेकंड तक रोशनी फैलती है।
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उसी प्रदर्शनी में एक और बंदूक थी, जो एक समय बड़ी लोकप्रिय थी। इसका नाम टॉमी गन था। इसका आधिकारिक नाम है-कार्बाइन मशीन थॉमसन पॉइंट 45। इसका आविष्कार और विकास अमेरिकी ब्रिगेडियर जनरल जॉन टी थॉमसन ने किया था। इसका इस्तेमाल पहले विश्वयुद्ध में भी किया गया था। इससे ऑटोमैटिक व सिंगल शाॅट फायर किए जा सकते हैं। इसे अमेरिका में ट्रेंच ब्रूम या शिकागो टाइपराइटर भी कहा जाता है। 1920 के आसपास का इतिहास टामी गन के बिना अधूरा है। अमेरिका में हथियार खरीद पर रोकटोक नहीं होने की वजह से यह हर घर में पहुंच गई थी। दूसरे विश्वयुद्ध में मित्र देशों की सेनाओं ने इसका खूब इस्तेमाल किया। युद्ध के दौरान अमेरिका में 15 लाख टॉमी गन बनाई गईं। सब-मशीन गन का दर्जा पाने वाला यह पहला हथियार था। सब मशीन गन से मतलब है-इसमें पिस्टल के कारतूस होते हैं। कार्बाइन शब्द स्पेनी भाषा का है, जिसका अर्थ है, घुड़सवारों का दस्ता।
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इन दोनों ही बंदूकों को बनाने की तकनीक इतनी दमदार थी कि आज भी इन्हें पुलिस बल इस्तेमाल करते हैं। ...यानी नया नौ दिन पुराना सौ दिन।  
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