दिल्ली चुनाव 2020ः जाति-धर्म की राजनीति छोड़ प्रदूषण जैसे मुद्दों पर कब गंभीर होंगे राजनीतिक दल?
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। हालांकि वायु प्रदूषण पूरी दुनिया, खासकर तीसरी दुनिया के देशों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर पिछले दिनों जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 93% बच्चे प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। पांच साल से कम उम्र के 10 बच्चों की मौत में से एक बच्चे की मौत प्रदूषित हवा की वजह से हो रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर जारी इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के 93% प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। ‘वायु प्रदूषण और बाल स्वास्थ्य: स्वच्छ वायु निर्धारित करना’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2016 में, वायु प्रदूषण से होने वाले श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के 5.4 लाख बच्चों की मौत हुई है।
क्या कहती है शोध?
भारतीय शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में बीमारियों को बढ़ावा देने और असमय मौतों के लिए वायु प्रदूषण को तंबाकू उपभोग से भी अधिक जिम्मेदार पाया गया है। विश्व की 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, जिसमें से 26 प्रतिशत लोग वायु प्रदूषण के कारण विभिन्न बीमारियों और मौत का असमय शिकार बन रहे हैं।
प्रदूषण कब बनेगा मुद्दा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, भी वायु प्रदूषण की चपेट में है। दिल्ली में वायु प्रदूषण एक हेल्थ इमर्जेंसी का रूप ले चुका है। जब स्थिति एकदम अनियंत्रित हो जाती है तब सरकारें एकदम नींद से जागती हैं और फिर समस्या से निपटने के बजाए राजनीतिक दलों में दोषारोपण शुरू हो जाता है।
इस समय दिल्ली में विधानसभा चुनाव है और हर राजनीतिक दल किसी तरह दिल्ली फतह करना चाहता है। चुनाव जीतने के लिए जहां राजनीतिक दल हिन्दू-मुसलमान की बहसों में जनता को उलझाना चाहते हैं, लेकिन अब आम जनता भी इन बहसों से ऊब चुकी है और इस चुनाव में अपने असली मुद्दों पर बात करना चाहती है।
दिल्ली के हजारों नागरिकों ने आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों से स्वच्छ वायु के लिए ठोस समाधान की मांग की है। ‘माई राइट टू ब्रीद’ के नेतृत्व में एक नागरिक आांदोलन #दिल्लीधड़कनेदो’ अभियान पिछले दिनों शुरू किया गया है, जो मतदाताओं को शिक्षित और जागरूक करता है कि वे वायु प्रदूषण के सभाधानों के प्रति अपने जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाएं।
दिल्ली में खराब होती वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कई नागरिक शहर के विभिन्न टाउन हॉल में एकजुट हुए और प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से स्वच्छ वायु बहाल रखने की मांग की।
#दिल्लीधड़कनेदो अभियान दिल्ली के पंद्रह विधानसभा क्षेत्रों के टाउन हॉल्स में बैठकों से शुरू किया गया। इस अभियान से कई सामाजिक कार्यकर्ता और मेडिकल प्रोफेशनल्स जुड़े हुए हैं, जो दिल्ली में स्वच्छ हवा के मसले पर जनसमर्थन उठाने के लिए कई तरह के नागरिक केंद्रित अभियान चला रहे हैं।
क्या है दिल्ली धड़कने दो अभियान?
इस अभियान से जुड़े मुन्ना कुमार झा बताते हैं कि 20 विधानसभा क्षेत्रों के करीब दो लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और राजनीतिक दलों को प्रेरित करने की योजना है कि वे अपने चुनावी घोषणापत्र के वायदों से आगे बढ़ें।
वह कहते हैं कि यह पहली बार है कि नागरिकों ने खुद को संगठित किया है और प्रमुख राजनीतिक दलों से वायु प्रदूषण के विषय को गंभीरता से लेने की बात रखी है। करावल नगर की टाउन हॉल मीटिंग में ‘फेडरेशन ऑफ रिक्शा पुलर एसोसिएशन’ के महासचिव विघ्नेश झा ने कहा कि
‘‘हम रोजाना चौबीसों घंटे घातक वायु प्रदूषण के साये में रहते हैं, लेकिन पार्टियां और सरकार हमें गंभीरता से नहीं लेतीं। अंतिम छोर तक संपर्क बनाने के समाधान के रूप में इलेक्ट्रिक रिक्शा दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम सभी राजनीतिक पार्टियों से गुजारिश करते हैं कि वे वायु प्रदूषण की रोकथाम से संबंधित हमारी मांग पर अमल करें और इससे निजात पाने के लिए इलेक्ट्रिक रिक्शा के बड़े पैमाने पर चलन, चार्जिंग इंफ्रास्टक्चर को बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करें।
अपने संगठन की तरफ से मैं अपने सहयोगियों से विनती करता हूं कि वे उस पार्टी को वोट दें, जो शहर में वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए काम करेगी।’’ अगर मुन्ना कुमार झा की बात का यकीन करें तो दिल्ली के नागरिक पर्यावरण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों की पूर्ण प्रतिबद्धता से कम की उम्मीद नहीं कर रहे।
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