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कमल हासन के बयान से फिर चर्चा में गोडसे, क्या बचाया जा सकता था गांधी जी को?

Hari Govind Vishwakarmaहरगोविंद विश्वकर्मा Updated Mon, 13 May 2019 01:16 PM IST
30 जनवरी 1948 को ही नाथूराम गोड्से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
30 जनवरी 1948 को ही नाथूराम गोड्से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। - फोटो : फाइल फोटो
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तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान कमल हासन के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। हासन ने कहा-

मैं ये इसलिए नहीं कह रहा कि यहां काफी संख्या में मुसलमान हैं। मैं ये महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने कह रहा हूं। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिंदू था। उसका नाम था- नाथूराम गोडसे

कमल हासन अरवाकुरिची विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे, जहां 19 मई को उपचुनाव होना है। फरवरी 2018 में मक्कल निधि मय्यम पार्टी का गठन करने वाले हासन के इस बयान ने बवाल खड़ा कर दिया है। इस दौरान हासन ने कहा है कि वो खुद को गौरवान्वित भारतीय मानते हैं जो भारत में एकता चाहता है। जो मानता है कि तिरंगे के तीन रंगों का एक मतलब हर धर्म को साथ रहने का संदेश भी है। हासन के मुताबिक वो 1948 में महात्मा गांधी की हत्या को लेकर जवाब मांगने पहुंचे हैं। 
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बहरहाल, कमल हासन के बयान के बाद एक बार फिर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नाथूराम गोड्से चर्चा में है। इस साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि मनाई गई। 30 जनवरी 1948 को ही नाथूराम गोड्से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। माना जाता है कि गांधी जी की हत्या को लेकर उस समय सुरक्षा तंत्र अलर्ट तो था, लेकिन कहा यह भी जाता है कि केंद्र और बॉम्बे सरकार और सुरक्षा तंत्र चौकस रहा होता तो शर्तिया गांधीजी की हत्या टाली जा सकती थी।

दरअसल, आज़ादी मिलने के बाद अगस्त 1947 से जनवरी 1948 के बीच गांधीजी बहुत ज़्यादा अलोकप्रिय हो गए थे। उनके ब्रम्हचर्य के प्रयोग ने उन्हें उनके सबसे करीबी पं. जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत कई लोगों के निशाने पर ला दिया था। ख़ासकर पाकिस्तान ने जब कश्मीर पर आक्रमण करवाया तो सरदार पटेल ने 12 जनवरी 1948 की सुबह इस्लामाबाद को क़रार के तहत दी जाने वाली 55 करोड़ रुपए की राशि को रोकने का फ़रमान जारी कर दिया। गांधीजी ने उसी दिन शाम को इस फ़ैसले के विरोध में आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा कर दी। गांधीजी के दबाव के चलते दो दिन बाद भारत ने पाक को 55 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। इससे पूरा देश गांधीजी से नाराज़ हो गया था।
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गांधी जी की कम होने लगी थी लोकप्रियता

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