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इसलिए दिया राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा, समझ गए कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी मुश्किल

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Mon, 08 Jul 2019 04:56 PM IST
कांग्रेस में अब तक कुल 19 अध्यक्ष हुए हैं जिनमें से 14 परिवार के बाहर से आए हैं।
कांग्रेस में अब तक कुल 19 अध्यक्ष हुए हैं जिनमें से 14 परिवार के बाहर से आए हैं। - फोटो : PTI
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अब लगभग यह तय हो चुका है कि 134 साल पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अगला अध्यक्ष मौजूदा नेहरु गांधी परिवार से नही होगा। तथ्य यह है कि कांग्रेस में अब तक कुल 19 अध्यक्ष हुए हैं जिनमें से 14 परिवार के बाहर से आए हैं।
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जाहिर है जो लोग परिवार से बाहर कांग्रेस का भविष्य नहीं देख पा रहे हैं उन्हें इस तथ्य को मान्यता देनी ही होगी की 134 साल पुरानी इस अखिल भारतीय पार्टी के उत्थान और पतन में सिर्फ नेहरु गांधी खानदान  ही नहीं है और न ही यह नाम हमेशा से केवल चुनाव लड़ने का प्लेटफॉर्म भर रहा है।

दरअसल, कांग्रेस का इतिहास आजादी के बाद नेहरु, इंदिरा के एक छत्र राज में भी आचार्य कृपलानी, पट्टाभिसीतारमैय्या, पुरुषोत्तमदास टण्डन, निजिलिंगप्पा, जगजीवनराम, शंकरदयाल शर्मा, कमलापति त्रिपाठी, जैसे लोगों से अलंकृत रहा है।

असल में इंदिरा गांधी की सत्ता के शीर्ष पर भागीदारी के साथ ही कांग्रेस का विचार पक्ष कमजोर होता चला गया। संजय गांधी ने इसे बिल्कुल जमीदोंज करके रख दिया और 2019 तक आते-आते विचार के ऊपर पर्सनेल्टी कल्ट ने अपनी अभेद इमारत खड़ी कर ली, यही इस पार्टी की आत्मघाती पूंजी भी साबित हुई।
बेशक अगर आज मोदी हार जाते और कांग्रेस को 200 सीट मिल जाती तो परिवार से बाहर का यह प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता। राहुल सम्भव है प्रधानमंत्री होते।

यानी आज जो संकट कांग्रेस के सामने खड़ा है वह सिर्फ इसलिए है क्योंकि जिस परिवार और पार्टी को सत्ता की सीढ़ी समझा जाता रहा है वह टूट गई है, जो सिर्फ सत्ता के लिए परिवार भक्त है वे इसे पैबंद लगाकर जोड़ने की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी मान नहीं रहे क्योंकि वह समझ चुके है कि इस पैदल फ़ौज के भरोसे फिलहाल भारत मे अकेले परिवार की पुण्याई को कैश नहीं कराया जा सकता है इसीलिए उन्होंने अपने चार पेज के त्यागपत्र में लिखा है कि कई जगह वे अकेले लड़ते रहे।
 
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