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कांग्रेस स्थापना दिवस पर विशेष: एक ऐसा दल जिसका सेवा, संघर्ष, त्याग और बलिदान का ही इतिहास है..!

Tue, 28 Dec 2021 10:24 AM IST
Suresh Pachouri सुरेश पचौरी
Updated Tue, 28 Dec 2021 10:24 AM IST
सार

28 दिसम्बर 1885 को श्री ए.ओ.ह्यूम की पहल पर बम्बई (अब मुंबई) के गोकुलदास संस्कृत कॉलेज मैदान में देश के विभिन्न प्रांतों के राजनीतिक एवं सामाजिक विचारधारा के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए। यह राजनीतिक एकता एक संगठन में तब्दील हुई, जिसका नाम ‘कांग्रेस’ रखा गया। श्री डब्ल्यू.सी.बनर्जी कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने।

उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में देश में सामाजिक सद्भाव का नया वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। कांग्रेस एक दल ही नहीं बल्कि एक विचार और आंदोलन का नाम है, इसलिए 136 साल बाद भी इस विचार की यात्रा अनवरत जारी है।

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Congress Foundation Day Special Congress has a history of service struggle and sacrifice
स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने भी फरवरी 1983 में भारतीय युवक कांग्रेस के तत्वावधान में विकास केन्द्र की स्थापना की थी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

28 दिसम्बर 1885 को श्री ए.ओ.ह्यूम की पहल पर बम्बई (अब मुंबई) के गोकुलदास संस्कृत कॉलेज मैदान में देश के विभिन्न प्रांतो के राजनीतिक एवं सामाजिक विचारधारा के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए। यह राजनीतिक एकता एक संगठन में तब्दील हुई, जिसका नाम ‘कांग्रेस’ रखा गया। श्री डब्ल्यू.सी.बनर्जी कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में देश में सामाजिक सद्भाव का नया वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। कांग्रेस एक दल ही नहीं बल्कि एक विचार और आंदोलन का नाम है, इसलिए 136 साल बाद भी इस विचार की यात्रा अनवरत् जारी है।

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सन् 1915 से 1947 तक की अवधि पर नजर डालें तो यह कांग्रेस का ‘गांधी युग’ रहा। महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और जन आंदोलन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को जन मन का रूप दिया।
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महात्मा गांधी जी ने अहिंसा, सर्वधर्म समभाव और रचनात्मक कार्यक्रमों के द्वारा सामाजिक क्रांति की शुरुआत की। उनके नेतृत्व में न सिर्फ आजादी का आंदोलन अपने निर्णायक दौर में पहुंचा बल्कि कांग्रेस को व्यापक जनाधार प्राप्त हुआ।

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कांग्रेस और सामाजिक न्याय की अवधारणा

सामाजिक न्याय की परिकल्पना पंडित जवाहरलाल नेहरू की थी, जिन्हें गांधी जी ‘भारत का जवाहर’ कहते थे। पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता संग्राम में सामाजिक न्याय के प्रति अपनी तीव्र भावनाओं को शामिल किया। नेहरू जी ने भारत की आजादी की लड़ाई को साम्राज्यवाद के खिलाफ जारी वाले विश्वव्यापी संघर्ष से जोड़ा।


पंडित नेहरू ने सामाजिक समरसता को अमलीजामा पहनाकर ताजिंदगी समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को तरक्की की धारा से जोड़ने का कार्य किया। नेहरू जी के बाद लालबहादुर शास्त्री ने सत्ता की बागडोर संभाली और अपने छोटे से कार्यकाल में ही सही, उन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ के नारे से पूरे देश में ”श्रमेव जयते” का नया जोश भर दिया।
 
शास्त्री जी के बाद इंदिरा जी ने एक दूरदर्शी कुशल शिल्पी की भांति समाजवाद के आदर्शों को भारतीय नागरिकों के स्वभाव के अनुकूल ढालने एवं समाज में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने का संकल्प व्यक्त कर उसे मूर्त रूप दिया। इंदिरा जी ने कांग्रेस संगठन को क्षमतावान और शक्तिशाली बनाया।
 
श्रीमती इंदिरा गांधी के बाद श्री राजीव गांधी ने कांग्रेस का नेतृत्व संभाला। राजीव गांधी भारत के समग्र विकास के प्रति संकल्पबद्ध राजनेता थे। भारत को तेजी से तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने तमाम कदम उठाये। भारत का विकास ही उनका एजेंडा था और विकसित आधुनिक भारत उनका सपना था।

राजीव जी दुनिया से जल्दी विदा हो गए, लेकिन उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का बीड़ा श्रीमती सोनिया गांधी ने उठाया और उन्होंने गांधी जी, इंदिरा जी एवं राजीव जी की शहादत और राष्ट्र सेवा की उनकी विरासत को सहेजने-संवारने में स्वयं को समर्पित कर दिया। उनके असाधारण व्यक्तित्व के प्रभाव एवं असंख्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिश्रम से केन्द्रीय सत्ता में कांग्रेस की 2004 में पुन: वापसी हुई।

सत्ता के शिखर पर पहुंचकर अपनी अंतरात्मा की आवाज पर प्रधानमंत्री का पद त्याग कर सोनिया जी ने भारतीय राजनीति में एक अनुपम उदाहरण पेश किया। 

Congress Foundation Day Special Congress has a history of service struggle and sacrifice
कांग्रेस ने अपने लम्बे इतिहास के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। - फोटो : Social media

कांग्रेस का इतिहास 

किसी भी राजनीतिक पार्टी का इतिहास कुछ तिथियों और कुछ घटनाओं का संकलन मात्र नहीं होता बल्कि यह युग-निर्माणकारी घटनाओं का क्रमबद्ध वैज्ञानिक अभिलेख होता है। सन् 1969 में कांग्रेस का विघटन श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के शुद्धिकरण का महत्वपूर्ण अध्याय है। यह ऐसा दौर था जब देश में पुरातन और प्रतिगामी शक्तियों का आधुनिकता और प्रगतिशील शक्तियों से टकराव चल रहा था। इस अभियान में प्रगतिपक्ष का नेतृत्व श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया और अंतत: प्रगतिपक्ष की जीत हुई।
 

इंदिरा जी ने यह महसूस किया कि गरीबी, बेरोजगारी और असमानता के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस की कार्यप्रणाली बदली जाए। उन्होंने कांग्रेसजनों से आग्रह किया कि वे अपने काम करने का ढंग बदलें और खेतों, खलिहानों, कारखानों और मजदूरों में इस बात का अहसास हो कि कांग्रेस का समाजवाद के लिए किया जाने वाला संघर्ष उनके लिए उनका अपना संघर्ष है।


कांग्रेस ने अपने लम्बे इतिहास के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। इसमें जय और पराजय दोनों का अनुभव लिए राजनीति की कठिन डगर तय की है। 1977-78 के दौरान कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज इंदिरा जी का साथ छोड़कर सत्तारूढ़ जनता पार्टी में शामिल हो गये, लेकिन कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं का भरोसा इंदिराजी पर ही था।

2 जनवरी 1978 को इतिहास की पुनरावृत्ति हुई और कांग्रेस का पुन: विभाजन हुआ। श्रीमती इंदिरा गांधी ने दूरदर्शी कदम उठाते हुए नई पार्टी (कांग्रेस ई) बनाई और देश की जनता ने कांग्रेस ई को ही वास्तविक कांग्रेस मानकर इंदिरा जी के नेतृत्व में विश्वास प्रकट किया। इंदिरा जी ने कांग्रेस को आम आदमी की आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़ कर पार्टी को नई शक्ति प्रदान की।
 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक राजनीतिक दल के लिए आवश्यक तत्व होते हैं-

  • 1. विचारधारा,
  • 2. उद्देश्य,
  • 3. सक्रिय कार्यकर्ता,
  • 4. लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष,
  • 5. समाज के नवनिर्माण के कार्यक्रम।


इन्हीं तत्वों के समन्वय से राजनीतिक दल की सक्रियता, दशा और दिशा निर्धारित होती है। किसी भी राजनीतिक दल में अनुशासित एवं प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता होती है। अनुशासन और समर्पण भाव के संस्कार ट्रेनिंग प्रोग्राम से ही आते हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 1974 में कांग्रेस के संविधान में संशोधन कर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का फैसला किया था।

स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने भी फरवरी 1983 में भारतीय युवक कांग्रेस के तत्वावधान में विकास केन्द्र की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से युवाओं के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया था। पार्टी को वक्त की जरूरत के हिसाब से कैसे ढाला जाए?

एवं कांग्रेस का जनाधार कैसे बढ़े? इस बात पर चिंतन कर कांग्रेस  वर्किंग कमेटी ने कार्यकर्ताओं में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें कांग्रेस पार्टी की नीतियां, सिद्धांत, समसामयिक मुद्दे तथा भविष्य के कार्यक्रम शामिल हों।

इन दिनों कांग्रेस के भविष्य को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं वे तथ्यपरक कम, पूर्वाग्रह-प्रेरित ज्यादा लगते हैं। विफलता और पराजय से कांग्रेस कभी अनजान नहीं रही है, लेकिन यह सच्चाई है कि जब-जब केन्द्र में गैर कांग्रेसी सरकारें सत्तारूढ़ हुई हैं, देश की अर्थव्यवस्था चरमराई है, जातिवादी, अवसरवादी और फिरकापरस्ती गठजोड़ मजबूत हुआ है। धर्मनिरपेक्षता के नैतिक मूल्यों को चोट पहुंची है और गरीबों, कमजोर वर्गों तथा अकलीयतों की भलाई के काम नहीं हुए।

अपने स्थापना दिवस के अवसर पर कांग्रेस को अपने गौरवपूर्ण अतीत के सिंहावलोकन, वर्तमान में आत्मावलोचन और उज्ज्वल भविष्य के चिंतन की जरूरत है। आज ऐसी शक्तियां देश पर हावी हैं, जिनका लक्ष्य लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष भारत के बजाए कुछ और है और जो भारत के बहुलतावादी चरित्र को ही खत्म करना चाहती हैं। जबकि भारत विभिन्न धर्मो, संस्कृतियों, भाषाओं और समाजों का ऐसा सुंदर गुलदस्ता है, जिसमें एक साथ कई फूल खिलते हैं, कई रंग दमकते हैं।

हमें श्रीमती सोनिया गांधी जी तथा श्री राहुल गांधी एवं श्रीमती प्रियंका गांधी के रूप में कांग्रेस के नेतृत्व पर गर्व है, जिनका संकल्प देशहित में सेवा-भाव से काम करना है। अडिग संकल्प, स्पष्ट दिशा और मजबूत इरादों के साथ वर्तमान परिस्थितियों में कांग्रेस को मदांध सत्ता की चुनौती के सामने खड़ा होना है, ताकि आने वाले समय में हमारी नीतियों, सिद्धांतों और कार्यक्रमों की वजह से समाज के सभी वर्गों का विश्वास और समर्थन कांग्रेस को हासिल हो।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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