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एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर भी सूखे की मार: जलवायु परिवर्तन से खराब होती मिट्टी की गुणवत्ता

Tue, 21 Apr 2026 07:48 AM IST
Nitin Gautam मनाल मोहम्मद, अमर उजाला
मनाल मोहम्मद, अमर उजाला Published by: Nitin Gautam Updated Tue, 21 Apr 2026 07:48 AM IST
सार

एक शोध के अनुसार, जब मिट्टी सूख जाती है, तब वह एंटीबायोटिक प्रतिरोध को जन्म देने व उन्हें फैलाने वाली प्रक्रियाओं को तेज कर देती है।

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climate change impact on soil quality antibiotic resistance
सूखा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

एंटीबायोटिक प्रतिरोध को अक्सर अस्पतालों और खेती में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग से जोड़ कर देखा जाता है। ये दोनों ही मामूली समस्याएं हैं, लेकिन नए शोध से एक और संभावित कारण सामने आया है, जिस पर अब तक बहुत कम ध्यान दिया गया था, वह है जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाला सूखा।
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नेचर माइक्रोबायोलॉजी पत्रिका में हाल में छपे एक अध्ययन में यह सामने आया कि जब मिट्टी सूख जाती है, तो वह उन प्राकृतिक प्रक्रियाओं को तेज कर देती है, जो एंटीबायोटिक प्रतिरोध को जन्म देती हैं और उसे फैलाती हैं। यह बताता है कि जलवायु परिवर्तन इस समस्या को और भी बदतर बना सकता है। दरअसल, मिट्टी सूक्ष्मजीवों से भरी होती है। इनमें से कई बैक्टीरिया अपने प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने के लिए स्वाभाविक रूप से एंटीबायोटिक बनाते हैं, जबकि अन्य ऐसे जीन अपने भीतर रखते हैं, जो उन्हें इन हमलों से बचाते हैं और प्रतिरोधी बना देते हैं। नम मिट्टी में बैक्टीरिया अपेक्षाकृत स्थिर वातावरण में रहते हैं, पर जैसे ही मिट्टी सूखने लगती है, पानी छोटे-छोटे अलग-थलग हिस्सों में सिमट जाता है। 
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ऐसे में, बैक्टीरिया एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं। इससे पोषक तत्व कम हो जाते हैं और प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र हो जाती है। इन हालात में बैक्टीरिया एक-दूसरे पर हमला करने के लिए अधिक एंटीबायोटिक बनाते हैं और खुद को बचाने के लिए अधिक प्रतिरोधी जीन विकसित कर लेते हैं। यह सूखे से प्रेरित प्रतिरोधक क्षमता की होड़ है। वहीं, बैक्टीरिया आपस में जीन का आदान-प्रदान कर सकते हैं, जिसे ‘हॉरिजॉन्टल जीन ट्रांसफर’ कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया के प्रतिरोधी जीन उन बैक्टीरिया तक पहुंच सकते हैं, जो मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि दुनिया के शुष्क क्षेत्रों में अस्पतालों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों का स्तर अधिक होता है। इससे जुड़े कुछ मिट्टी के बैक्टीरिया अस्पताल में पाए जाने वाले खतरनाक रोगाणुओं जैसे कि क्लेबसिएला न्यूमोनिया और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा के करीबी हैं। 
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एंटीबायोटिक प्रतिरोध दुनिया भर में हर साल लाखों संक्रमणों का कारण बनता है, पर पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहीं पर ‘वन हेल्थ’ का विचार आता है, जिसका अर्थ है कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में, जैसे-जैसे दुनिया भर में सूखा पड़ना सामान्य होता जा रहा है, वैज्ञानिकों को हमारी धरती के नीचे हो रहे बदलावों पर और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी।     -द कन्वर्सेशन
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