फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   cern-lhc-new-physics-discovery-challenge-standard-model

दूसरा पहलू: नए राज बदल सकते हैं भौतिकी की दुनिया

Mon, 04 May 2026 07:45 AM IST
Devesh Tripathi विलियम बार्टर
विलियम बार्टर Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 04 May 2026 07:45 AM IST
विज्ञापन
सार
सर्न प्रयोगशाला में एक शोध के नतीजे बता रहे हैं कि हम शायद अब तक न खोजे गए भौतिकी के रहस्यों के काफी करीब पहुंच रहे हैं।
loader
cern-lhc-new-physics-discovery-challenge-standard-model
सर्न प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जिनेवा में यूरोपियन काउंसिल फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) की प्रयोगशाला के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) मशीन में एक शोध के नतीजे बता रहे हैं कि हम शायद अब तक न खोजे गए भौतिकी के रहस्यों के काफी करीब पहुंच रहे हैं। अगर इसकी पुष्टि हो जाती है, तो ये संकेत उस सिद्धांत को पूरी तरह बदल देंगे, जिसे अब तक भौतिकी का 'स्टैंडर्ड मॉडल' कहा जाता है और जिसने पिछले 50 वर्षों से पार्टिकल फिजिक्स पर अपना दबदबा बनाए रखा है। नतीजों से पता चलता है कि एलएचसी में कुछ खास सब-एटॉमिक पार्टिकल जिस तरह से व्यवहार करते हैं, वह स्टैंडर्ड मॉडल पर खरा नहीं उतरता है।


मूल कण पदार्थ के सबसे बुनियादी कण होते हैं। ये ऐसे सब-एटॉमिक पार्टिकल्स हैं, जिन्हें और छोटी इकाइयों में नहीं बांटा जा सकता। एलएचसी कणों को उत्सर्जित कर उन्हें प्रकाश की गति देने वाला एक विशालकाय पार्टिकल एक्सीलरेटर (मशीन) है। इसे फ्रांस-स्विटजरलैंड सीमा के नीचे बनी 27 किलोमीटर लंबी एक गोलाकार सुरंग में बनाया गया है। एलएचसी में प्रोटॉन कणों की बीमों (बौछार) को विपरीत दिशाओं में चला कर आपस में टकराया जाता है, ताकि ऐसे और अतिसूक्ष्म कणों का पता चल सके, जो अब तक नहीं खोजे गए हैं। स्टैंडर्ड मॉडल 20वीं सदी की दो सबसे बड़ी खोजों पर आधारित है। इनमें एक है-क्वांटम मैकेनिक्स और दूसरा है-आइंस्टीन का विशेष सापेक्षता सिद्धांत। भौतिक विज्ञानी एलएचसी जैसी मशीन पर किए गए प्रयोगों की तुलना स्टैंडर्ड मॉडल पर आधारित अनुमानों से करके इस सिद्धांत की कड़ी जांच कर रहे हैं।


हमारा शोध स्टैंडर्ड मॉडल की उम्मीदों से कहीं अलग नतीजे दिखाता है। असल दुनिया के हिसाब से इसका मतलब यह है कि प्रयोगों के नतीजों और सिद्धांत के अनुमानों से जुड़ी अनिश्चितताओं को ध्यान में रखने के बाद अगर स्टैंडर्ड मॉडल सही है, तो डाटा में इतना बड़ा बदलाव होने की संभावना 16000 में से सिर्फ एक है।  2030 के दशक के लिए और अधिक प्रगति की योजना बनाई गई है, ताकि एलएचसी के भविष्य के प्रयोगों का लाभ उठाया जा सके। यह अंतिम चरण हमें निश्चित दावे करने में सक्षम बनाएगा, जिससे संभवतः इस बात की एक नई समझ विकसित होगी कि ब्रह्मांड सबसे मौलिक स्तर पर किस प्रकार काम करता है।                            
-साथ में मार्क स्मिथ  (द कन्वर्सेशन)
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed