भारत में घट रहे रेगिस्तान के जहाज, युद्धस्तर पर संरक्षण की जरूरत
वर्ष 2012-19 के बीच हुए एक सर्वे में पता चला था कि भारत में ऊंटों की संख्या तेजी से कमी आई है। देश में यह डेढ़ लाख घटकर 2.52 लाख ही रह गए थे। वर्ष 2019-23 के बीच यह संख्या और घटी है। नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में तो अधिकारिक रूप से ऊंट समाप्त हो चुके हैं।
वर्ष 2012-19 के बीच हुए एक सर्वे में पता चला था कि भारत में ऊंटों की संख्या तेजी से कमी आई है। देश में यह डेढ़ लाख घटकर 2.52 लाख ही रह गए थे। वर्ष 2019-23 के बीच यह संख्या और घटी है। नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में तो अधिकारिक रूप से ऊंट समाप्त हो चुके हैं।
विस्तार
ऊंट का जिक्र आते ही रेगिस्तान का ख्याल एकाएक मन में आ जाता है। एक समय रेगिस्तान में यातायात का मुख्य साधन रहा ऊंट अब संकट में है। इनकी संख्या न केवल भारत में, बल्कि दुनिया में घट रही है। शायद यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2024 को ऊंट वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है, ताकि लोगों का ध्यान ऊंट के संरक्षण की तरफ भी जाए।
दुनिया के 90 देशों में ऊंटों के संरक्षण और इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। भारत में राजस्थान में सर्वाधिक ऊंट पाए जाते हैं और यहां भी पिछले कुछ सालों में सरकारी स्तर पर कुछ कार्य हुए हैं। खासकर वर्ष 2014 में राजस्थान सरकार ने ऊंट को राज्य पशु घोषित किया था और वर्ष 2015 में राज्य सरकार राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थाई प्रजनन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम लेकर आई, इसके तहत ऊंट के राज्य से बाहर निर्यात पर पाबंदी लगी।विज्ञापन
हालांकि, बाद में एक सक्षम प्राधिकार को ऊंटों के राज्य से बाहर निर्यात के लिए परमिट जारी करने का अधिकार दे दिया गया। सच्चाई यह है कि परमिट पाना आसान प्रक्रिया नहीं है और इसमें लंबा समय लगता है।
भारत में ऊंट की संख्या
उत्तरी अफ्रीका और मध्य एशिया के ऊंटों को असली ऊंट माना जाता है। इनमें ड्रोमेडरी (एक कूबड़ वाला ऊंट) और बैक्ट्रियन (दो कूबड़ वाला ऊंट) हैं। भारत में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा में मुख्य रूप से ऊंट पाए जाते हैं, लेकिन राजस्थान में सर्वाधिक 2.14 लाख ऊंट हैं, जबकि देश भर में इनकी संख्या 2.50 लाख से कम हो गई है।
वर्ष 2012-19 के बीच हुए एक सर्वे में पता चला था कि भारत में ऊंटों की संख्या तेजी से कमी आई है। देश में यह डेढ़ लाख घटकर 2.52 लाख ही रह गए थे। वर्ष 2019-23 के बीच यह संख्या और घटी है। नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में तो अधिकारिक रूप से ऊंट समाप्त हो चुके हैं।
राजस्थान में ऊंट की गोमठ, नांचना, जैसलमेरी, मेवाड़ी, अलवरी, सिंधी, कच्छी और बीकानेरी प्रजाति पाई जाती हैं। राजस्थान के लोकदेवता पाबूजी को ऊंटों का देवता कहते हैं। गुजरात में तो समुद्र में तैरने वाले ऊंट भी मिलते हैं। यह कच्छ की खराई किस्म के ऊंट हैं, जो हर रोज समुद्र में विचरण करते हैं और समुद्री वनस्पति मैंग्रूव को खाते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में उद्योगों के विस्तार के कारण मैंग्रूव खत्म हो रहे हैं और खराई ऊंटों के लिए खाने की समस्या आ रही है। अब पूरे गुजरात में 4500 हजार से आसपास खराई ऊंट ही बचे हैं।
ऊंटों को संरक्षण देने के कई प्रयास हो रहे हैं। भारत सरकार ने वर्ष 1984 में बीकानेर में उष्ट्र परियोजना निदेशालय की स्थापना की थी। वर्ष 1995 में इसे राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में तब्दील कर दिया गया। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2023 में उष्ट्र संरक्षण योजना के तहत टोडियों (ऊंट के बच्चे) के जन्म पर दो किश्तों में 10 हजार रुपए ऊंट पालक को बतौर प्रोत्साहन राशि देने प्रारंभ किया था।
रेगिस्तान के जहाज की संख्या घटना वाकई चिंताजनक है। संयुक्त राष्ट्र ने तो ऊंट वर्ष घोषित कर दिया है, लेकिन भारत में भी ऊंटों को बचाए रखने के युद्ध स्तर पर प्रयास करने की अतिआवश्यकता है। ऐसा न हो कि कुछ वर्षों में ऊंट केवल किताबों के चित्रों में ही देखने को मिलें।
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