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Budget 2025: विज्ञान और तकनीक के लिए बजट में आवंटन, उम्मीद से कम मिला बजट में
सार
पीएम मोदी ने हाल में ही माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला समेत देश के और बाहरी आईटी इंडस्ट्री के लोगों से मुलाकात की थी। सरकार अगले पांच सालों में एआई मिशन को और विस्तार देने की योजना को बढ़ाने के संकेत देते हुए आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल, डेटा प्राइवेसी जैसी चिंताओं के मद्देनजर एक फ्रेमवर्क सामने रखने कि उम्मीद थी।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में लगातार अपना 8वां केंद्रीय बजट पेश करते हुए युवाओं के भविष्य और अवसरों को बढ़ाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। ये फैसले शिक्षा, स्टार्टअप, रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवाओं को नए मौके देने के उद्देश्य से किए गए हैं। देश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार 10,000 करोड़ रुपये का फंड स्थापित करेगी। इससे नए उद्यमियों को वित्तीय सहायता मिलेगी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।
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यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार स्टार्टअप के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने अब तक 1.5 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी है. चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए कुल 1.48 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
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पीएम रिसर्च फेलोशिप के तहत 10,000 नई फेलोशिप प्रदान की जाएंगी, जिससे उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ज्ञान भारत मिशन के तहत 1 करोड़ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पांडुलिपियों (मैन्युस्क्रिप्ट) को डिजिटलाइज करेगी, जिससे देश की समृद्ध विरासत को संरक्षित किया जा सके।
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पीएम मोदी ने हाल में ही माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला समेत देश के और बाहरी आईटी इंडस्ट्री के लोगों से मुलाकात की थी। सरकार अगले पांच सालों में एआई मिशन को और विस्तार देने की योजना को बढ़ाने के संकेत देते हुए आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल, डेटा प्राइवेसी जैसी चिंताओं के मद्देनजर एक फ्रेमवर्क सामने रखने कि उम्मीद थी।
यह बजट ऐसे समय आया है जब दुनिया में एआई की धूम मची है। अमेरिका और चीन एआई की लड़ाई में एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ में है। ऐसे में आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के लिए सिर्फ 500 करोड़ देना ऊंट के मुहं में जीरे जैसा है। एआई में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. साथ में 3 एआई एक्सिलेंस सेंटर लगाए जाने की बात कही गई है।
इस बजट में हेल्थकेयर ,सौर ऊर्जा, ईवी, पावर और माइनिंग,फूड टेक्नोलॉजी पर भी पूरा जोर है। सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्यों को फ्री लोन देने की भी बात कही है। वित्त मंत्री ने ईवी बैटरी विनिर्माण के लिए 35 अतिरिक्त कैपिटल गुड्स और मोबाइल फोन बैटरी विनिर्माण के लिए 28 कैपिटल गुड्स जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
सरकार ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड’ पहल के तहत स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए नई योजनाएं लागू करेगी. युवाओं को आधुनिक कौशल (स्किल्स) से लैस करने के लिए देशभर में 5 राष्ट्रीय स्तर के स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिएसभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा जाएगा.
बिहार में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता संस्थान की स्थापना की भी घोषणा की गई है। आईआईटी पटना को भी वित्त पोषित करके इसकी क्षमता का विस्तार करने का एलान किया गया है। इसके अलावा 5 आईआईटी में शिक्षा के स्तर को और बढ़ाया जाएगा और इनकी सीटों की संख्या में 6,500 की बढ़ोतरी की जाएगी।
मेडिकल की सीटों में में 75 हजार का इजाफा 5 साल में करने का वादा किया गया है। सरकार ने 50,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जो 5 वर्षों में सरकारी स्कूलों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, और गणित शिक्षा को बढ़ावा देंगी। इससे बच्चों को तकनीकी कौशल में बेहतर शिक्षा मिल सकेगी और वे भविष्य के लिए तैयार हो सकेंगे।
परमाणु ऊर्जा अधिनियम और नागरिक दायित्व परमाणु क्षति अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए ,20 हजार करोड़ रुपए के आवंटन के साथ लघु मॉड्यूलर रियक्टर्स (एसएमआर) के अनुसंधान व विकास के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन स्थापित किया जाएगा।
2033 तक 5 स्वदेश विकसित एसएमआर संचालित करने का प्रस्ताव। 25 हजार करोड़ रुपए के आवंटन के साथ समुद्री विकास कोष की स्थापना का प्रस्ताव। इसमें सरकार का योगदान 49 प्रतिशत होगा। शेष योगदान बंदरगाहों और निजी क्षेत्र को करना होगा।
बढ़ेगी एमएसएमई की भागीदारी
इस बार के बजट में मोदी सरकार ने एमएसएमई के लिए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन गठन की बात कही है। इनके माध्यम से अब क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिए जाने पर जोर है। एमएसएमई को अब 5 की जगह 10 करोड़ रुपए तक का कवर दिया जाएगा। देश के निर्यात में एमएसएमई की भागीदारी 45% हो चुकी है। स्टार्टअप को भी 20 करोड़ रुपए तक का कवर
दिया जाएगा। सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की स्थापना की भी घोषणा की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि मैन्युफैक्चरिंग में देश में एमएसएमई सेक्टर का 36% योगदान है। इनकी संख्या अभी 5.7 करोड़ है और इसमें 7.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। छोटे उद्योगों को विशेष क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे, पहले साल 10 लाख कार्ड जारी होंगे।
एआई मिशन
पिछले साल मार्च में कैबिनेट ने भारत एआई मिशन के लिए 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन को मंजूरी दी थी। डीपसेक की लॉंच के बाद जिस तरह से एआई स्पेस में ग्लोबली प्रभाव पड़ा है, ऐसे में ये जरूरी है कि भारत में एआई सॉल्यूशन डिवेलप करने के लिए भारतीय कंपनियों को टैक्स छूट, प्रोत्साहन स्कीम का एलान हो।
जिस तरह से ट्रंप प्रशासन ने एआई में निवेश और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को फोकस करने को लेकर योजना बनाई है, वैसे ही ये जरूरी है कि भारत भी आईटी इंडस्ट्री को लेकर अपने स्टारगेट प्रोग्राम को विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
वास्तव में इस बजट में विज्ञान,तकनीक और शोध के क्षेत्र में प्रगति और सुधार के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया है। विकसित देशों की तर्ज पर पिछले कई सालों से लगातार यह मांग उठती आ है कि विज्ञान और तकनीक को कम से कम जीडीपी का 2 प्रतिशत बजट आवंटन होना चाहिए लेकिन अभी भी यह देश के कुल जीडीपी के एक प्रतिशत से भी कम है। जिसको तत्काल बढ़ाने की जरुरत है।
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