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योगी जी सुनिए ! चित्रकूट की पेयजल समस्या दूर  कर सकता है यह भागीरथ प्रयास

Tue, 15 Oct 2019 08:44 AM IST
Anuj Dwivedi अनुज द्विवेदी
Updated Tue, 15 Oct 2019 08:44 AM IST
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Bhagiratha effort can solve the drinking water problem of Chitrakoot
बुन्देलखण्ड हमेशा से किसानों की आत्महत्या, सूखा, पलायन और पेयजल संकट के लिए जाना जाता रहा है । - फोटो : pixabay

बुन्देलखण्ड हमेशा से किसानों की आत्महत्या, सूखा, पलायन और पेयजल संकट के लिए जाना जाता रहा है । इन समस्यायों में सबसे अहम है पेयजल समस्या जिसे अगर समय रहते दूर किया जाए तो हर समस्या का अंत किया जा सकता है । यहां जल ही जीवन जैसी लोकोक्ति चरितार्थ होती है । बुन्देलखण्ड के चित्रकूट जिले का पाठा इलाका पेयजल संकट से हमेशा परेशान रहता है । ऐसे में इसके निवारण हेतु अब तक न ही सिस्टम और न ही सियासत के पास कोई ठोस मॉडल है । हालांकि, जनता की तरफ से एक ऐसा मॉडल आया है जिसने तेजी से जनता के बीच जगह बनानी शुरू कर दी है । 

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पाठा का कस्बा मानिकपुर जहां एक तरफ पानी की किल्लत से जूझ रहा है। यहां 25 हजार की आबादी होने के बावजूद जल संस्थान मानिकपुर यहां से 10-15 किमी दूर सेमरदहा के नलकूपो से शहरवासियों की प्यास बुझा रहा है । लेकिन सारे प्रयास नाकाफी सिद्ध हो जाते हैं । जब कभी बिजली , कभी तकनीकी कमी से या पानी की कमी से हफ़्तों तक नलों में पानी नहीं आता । वही, दूसरी ओर मानिकपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत करौहा के दक्षिणी पुर्वी भाग में बरदहा नदी से मिलने वाली अनेक्सी नदी में बांध बनाने के पर्याप्त संसाधन है । यदि अनेक्सी नदी में एक बांध बनाया जाए तो इस जिले की पेयजल समस्या और सिंचाई की समस्या दूर हो सकती है ।
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यह विंध्यांचल पर्वत की दो श्रेणियों के बीच मध्य प्रदेश से उतरकर चौरी के जंगल से होकर आती है जिसमे सिरसहाई नदी , तेलिया नदी , डेलुआ नदी, पन्ना झरना एवं बन्दरचुआ बहरा तथा अन्य कई छोटे नाले मिलते हैं। जो करौंहा तक आते- आते अगम जलराशि में मिल जाते हैं । यही आगे बरदहा नदी में मिलकर रानीपुर गिदुरहा, चमरौंहा, सकरौंहा में भारी तबाही मचाते हैं । यदि करौहा के गजना पहाड़ एव कल्यानपुर ग्राम पंचायत के चूडा पहाड़ को जोड़कर एक किमी तक का बांध जिसकी ऊंचाई 50 मीटर लगभग की जाए जो करौहा से कारिगोही तक 16×3.5 =50 वर्गकिमी झील के बराबर जलभराव होगा तथा ओवरफ्लो नगना ( ग्राम पंचायत जारोमाफी) से होगा । जिससे न केवल पेयजल समस्या और सिंचाई समस्या खत्म होगी बल्कि 200 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी किया जा सकता है । साथ ही यह क्षेत्र पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित होगा ।
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Bhagiratha effort can solve the drinking water problem of Chitrakoot
सन 1972 में सिंचाई विभाग द्वारा इस बांध को बनाने के लिए 50 मज़दूरों से 10 दिनों तक पेड़ों की कटाई का कार्य कराया गया । - फोटो : amar ujala

इस नदी का पानी बरदहा नदी में टिप्पुरी बाबा (कल्यानपुर ग्राम पंचायत) नामक स्थान पर मिलता है और रानीपुर गिदुरहा, सकरौंहा, चमरौहां में भीषण तबाही मचाता है । बरसात में यह गांव महीनों संपर्क से कटे रहते हैं । बांध बन जाने से यहां बाढ़ की समस्या से निजात मिलेगी । वही दूसरी ओर चौंरी के जंगल मे पानी भर जाने से दस्यु समस्या भी समाप्त होगी । बांध का पानी नहर के माध्यम से राजापुर , बरगढ़, कर्वी तथा जिले के हर गांव तक बाणसागर परियोजना जैसे ले जाया जा सकता है ।

करौंहा ग्राम पंचायत अन्तर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय करौहा में कार्यरत प्रधानाध्यापक कुंजबिहारी तिवारी ने बताया कि इस क्षेत्र में पानी की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में बांध बनाने के संसाधन मौजूद हैं । जो कि दस्यु समस्या होने की वजह से प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है । 

सन 1972 में सिंचाई विभाग द्वारा इस बांध को बनाने के लिए 50 मज़दूरों से 10 दिनों तक पेड़ों की कटाई का कार्य कराया गया । जिसमें महावीर कोल, राममनोहर ,ददोली निवासी करौंहा के आदि कुछ मजदूर आज जीवित हैं और उस समय की दास्तां बताते हैं। बाद में यह योजना बन्द करके पाठा रिसॉर्ट डैम के नाम से 1972-76 बरदहा डैम बनाया गया जो यहां से पांच किमी पश्चिम पर्वत के बाहर की ओर है । जबकि इस डैम में इतना जलभराव नही होता है । बरदहा नदी यही से शुरू होती है ।

खास बात ये है कि जब भी बांध बनाये जाते हैं उसमें सैकड़ो गांव डूब जाते हैं और अरबों रुपये का मुआवजा दिया जाता है जैसा कि बाणसागर परियोजना में 300 गांव डूब गए और लाखों लोग विस्थापित हुए और अरबों रुपये मुआवजा दिया गया । जबकि इस बांध के निर्माण में एक भी घर नही डूबता है । कोई भी खेतिहर जमीन नहीं है जिसका मुआवजा देना हो । केवल वन भूमि है । तो फिर सरकार को इस ओर क्यों नही ध्यान देना चाहिए ।

इससे पाठा की तस्वीर बदल जाएगी और जिले में पेयजल संकट दूर हो जायेगा । पूरे जिले के लगभग पांच सैकड़ा गांव में पेयजल समस्या पूरी तरह दूर हो जाएगी । इस सम्बंध में ग्राम प्रधान करौंहा तुलसीदास ,ग्राम प्रधान जारोमाफी के महिपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बांध बन जाने से यह क्षेत्र पंजाब और हरियाणा की तरह खुशहाल हो जायेगा । हमारा सरकार से अनुरोध है कि इस सम्बंध में समुचित कार्यवाही की जाए । वहीं ,जिला पंचायत सदस्य छोटेलाल द्वारा बताया गया कि मैंने पूर्व में प्रभारी मंत्री महेंद्र सिंह को इस बारे में अवगत कराया था लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई । मैं मुख्यमन्त्री से अनुरोध करता हूं की इस बांध का सर्वे कराकर इसे बनवाया जाए जिससे इस क्षेत्र को मुख्य धारा में लाया जा सके ।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण ): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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