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एशिया कप से सबक ले टीम इंडिया, वरना टी-20 वर्ल्ड कप में लुटिया डूबना निश्चित है

Wed, 07 Sep 2022 11:01 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Wed, 07 Sep 2022 11:01 AM IST
सार

एशिया कप के लिए जिस टीम का चयन किया गया, उसमें अधिकांश वही चेहरे थे, जो पिछले कई सालों से नजर आ रहे हैं। नए खिलाड़ियों के नाम पर सूर्यकुमार यादव, अर्शदीप सिंह, रवि विश्नोई और आवेश खान टीम में शामिल किए गए। रवींद्र जडेजा के चोटिल होने पर अक्षर पटेल भेजे गए, पर वो भी बाहर ही बैठे रहे।

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Asia Cup 2022 India Need To learn From Asia Cup otherwise India Will not win in T20 world cup
भुवनेश्वर कुमार उस लय में बॉलिंग नहीं कर पाए, जहां से वो टीम को जिताकर ले जा सकते थे। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आईपीएल के शेर दुबई में ढेर... जी हां, कुछ ऐसा ही हुआ है टीम इंडिया के साथ। दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद भारत एशिया कप से करीब-करीब बाहर ही हो गया है। पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच छोड़ दें तो शेष मैचों में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। दरअसल, हमारे खिलाड़ियों की मंशा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ज्यादा अपने आईपीएल करियर को लेकर है, जहां पैसा बरस रहा है। 

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क्या है नतीजा?

आईपीएल में ही खिलाड़ी पसीना बहा रहे हैं। भारतीय कंट्रोल क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) भी कुछ नया नहीं कर पा रहा है। न तो नए खिलाड़ियों को बहुत अधिक मौका ही मिल रहा है, ना ही नए प्रयोग हो रहे हैं। नतीजा सबके सामने है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इस शर्मनाक प्रदर्शन की जिम्मेदारी कोई नहीं लेगा। स्टार खिलाड़ियों के आगे जैसे बीसीसीआई भी दबी हुई है।

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एशिया कप के लिए जिस टीम का चयन किया गया, उसमें अधिकांश वही चेहरे थे, जो पिछले कई सालों से नजर आ रहे हैं। नए खिलाड़ियों के नाम पर सूर्यकुमार यादव, अर्शदीप सिंह, रवि विश्नोई और आवेश खान टीम में शामिल किए गए। रवींद्र जडेजा के चोटिल होने पर अक्षर पटेल भेजे गए, पर वो भी बाहर ही बैठे रहे। 

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प्रयोग जीरो

बल्लेबाजी का क्रम भी वैसा ही था, जो पिछले कई मैचों से चला आ रहा है, यानी प्रयोग जीरो हुआ। एशिया कप से पहले कप्तान बदल-बदल के टीम विदेशी दौरों पर भेजी जा रही थी। हार्दिक पांड्या का बतौर कप्तान प्रयोग सफल रहा था। हार्दिक को एशिया कप में कप्तानी का मौका दिया जाना चाहिए था, लेकिन रोहित शर्मा के स्टारडम के दबाव में संभवतः बीसीसीआई फैसला लेने से हिचक गई।


जसप्रीत बुमराह की कमी टीम को महसूस हुई, क्योंकि पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ हार का बड़ा कारण अंतिम ओवरों में गेंदबाजी रही। खासकर भुवनेश्वर कुमार उस लय में बॉलिंग नहीं कर पाए, जहां से वो टीम को जिताकर ले जा सकते थे। अंतिम दोनों मुकाबलों में 19वां ओवर बड़ा अहम था, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ भुवनेश्वर ने 19वें ओवर में 19 रन और श्रीलंका के खिलाफ 19वें ओवर में 14 रन देकर मैच ही खत्म कर दिया। 

सीनियर खिलाड़ी का निराशाजनक प्रदर्शन

भुवनेश्वर जैसे सीनियर खिलाड़ी से ऐसे लचर प्रदर्शन की उम्मीद फैंस को नहीं थी। खासकर जो वाइड गेंदें उन्होंने 19वें ओवर में फेंकीं, वह काफी निराशाजनक था। नए नवेले अर्शदीप ने दोनों ही मैचों में अंतिम ओवर में अच्छा प्रदर्शन किया। पाकिस्तान के खिलाफ हार से रोहित शर्मा ने सबक नहीं लिया। कुछ वही स्थिति श्रीलंका के खिलाफ अहम मैच में बनी थी। रोहित चाहते तो 19वां ओवर अर्शदीप से करा सकते थे। वो चूक गए।

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केएल राहुल ने चार मैचों में सिर्फ 70 रन ही बनाए - फोटो : सोशल मीडिया

केएल राहुल नहीं कर पाए कमाल

उप कप्तान केएल राहुल पूरे टूर्नामेंट में असफल साबित हुए। बतौर ओपनर वो कोई कमाल नहीं दिखा सके। चार मैचों में राहुल ने 70 रन ही बनाए। श्रीलंका के खिलाफ रोहित ने जरूर हॉफ सेंचुरी लगाई, लेकिन बाकी मैचों में उनका प्रदर्शन बेहद निम्नस्तरीय रहा। विराट कोहली दो मैचों को छोड़कर सुपर फ्लॉप साबित हुए। सूर्यकुमार यादव ने भी साधारण प्रदर्शन किया। हार्दिक पांड्या पाकिस्तान के खिलाफ जीत दिलाकर हीरो बन गए थे, पर बाकी मैचों में वो कामयाब नहीं रहे। 

खासकर गेंदबाजी में उनकी जबरदस्त पिटाई हुई। तीन मैचों में हार्दिक ने गेंदबाजी की और 12 ओवर फेंककर 104 रन दे डाले। ऋषभ पंत के आगे मौका था, जो उन्होंने गंवा दिया। खासकर श्रीलंका के खिलाफ अंतिम ओवर में वो मौका चूक गए। सोशल मीडिया पर जमकर पंत को ट्रोल किया जा रहा है कि महेंद्र सिंह धोनी से सीखो। यजुवेंद्र चहल को भरपूर मौका मिला, पर लगता है, अब उनकी गेंदों में चौंकाने वाले तत्व समाप्त हो गए हैं।

एशिया कप से सीख जरूरी

टी-20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के लिए एशिया कप के सबक जरूरी हैं। आईपीएल ने खिलाड़ियों की एक पूरी फौज तैयार करा दी है। कई युवा खिलाड़ी हैं, जिनका प्रदर्शन आईपीएल में शानदार रहा है।

ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, नितिश राणा, देवदत्त पडिक्कल, यशस्वी जयसवाल, प्रसिद्ध कृष्ण, खलील अहमद जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाना चाहिए। चूंकि, अब समय बेहद कम है। इसलिए बीसीसीआई को टी-20 वर्ल्ड कप के लिए गंभीरता से खिलाड़ियों का चयन करना होगा। कुछ साहसिक फैसले लेने की जरूरत है। 

खासकर सीनियर खिलाड़ियों को लेकर। रोहित शर्मा, केएल राहुल, विराट कोहली, भुवनेश्वर कुमार, यजुवेंद्र चहल जैसे वरिष्ठों को लेकर पुनर्विचार करना होगा। केवल पूर्व के प्रदर्शन के आधार पर लंबे समय तक खिलाड़ियों को मौका देते रहने का लॉजिक सही नहीं है। विशेषकर टी-20 वर्ल्ड कप में युवाओं पर भरोसा जताने की आवश्यकता है। वरना घर में कागजी शेरों वाली हमारी टीम का दुबई जैसा हाल होने वाला है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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