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क्या महिलाएं अधिक  समझदार होती हैं? लाखों लोगों के आंकड़े इस सवाल का दिलचस्प जवाब

Tue, 20 Oct 2026 05:22 AM IST
ज्योति भास्कर मैरी एम. हॉसफेल्ड
मैरी एम. हॉसफेल्ड Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 20 Oct 2026 05:22 AM IST
सार

क्या भावनात्मक रूप से समझदार होना केवल महिलाओं की खूबी है? दशकों के शोध और लाखों लोगों के आंकड़े इस सवाल का दिलचस्प जवाब देते हैं। वर्ष 2019 में 58 अध्ययनों के विश्लेषण में पाया गया कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रशिक्षण के जरिये बेहतर बनाया जा सकता है।

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Are women more sensible Data from millions of people provides an interesting answer to this question
भावनात्मक बुद्धिमत्ता के मामले में महिलाओं की स्थिति पर अध्ययन - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-ग्राफिक्स

विस्तार

जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं, जो भावनात्मक रूप से समझदार (इमोशनली इंटेलिजेंट) हो, तो आपके मन में किसका ख्याल आता है? ऐसा व्यक्ति, जो माहौल को भांप लेता हो और मुश्किल समय में किसी दोस्त से क्या कहना चाहिए, यह जानता हो।

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बहुत से लोगों के मन में ऐसे व्यक्ति की छवि एक महिला की बनती है। यह धारणा इतनी प्रचलित है कि इसे लगभग एक स्थापित तथ्य माना जाता है। पर क्या महिलाएं वास्तव में पुरुषों की तुलना में भावनात्मक रूप से अधिक समझदार होती हैं? डॉ. वेरा हैम्पेल के सह-नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में 1995 से 2023 तक के शोध की समीक्षा की गई। इसमें 76 देशों के छह लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों को शामिल किया गया।
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निष्कर्ष के अनुसार, औसतन महिलाएं भावनात्मक बुद्धिमत्ता के मामले में पुरुषों से अधिक अंक हासिल करती हैं। भावनात्मक बुद्धिमत्ता का अर्थ अपनी व दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने और नियंत्रित करने की क्षमता है।
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अध्ययन में महिलाओं की बढ़त मुख्य रूप से दूसरों की भावनाओं को समझने व संभालने में दिखाई दी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि हर महिला इस मामले में हर पुरुष से बेहतर होती है। दिलचस्प बात यह है कि बच्चों में यह अंतर वयस्कों की तुलना में कम है और पिछले तीन दशकों में इसमें कमी आई है।

इससे संकेत मिलता है कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता केवल जन्मजात गुण नहीं, बल्कि अभ्यास और अनुभव से विकसित होने वाला कौशल भी है। दूसरे शोधों के अनुसार, माता-पिता अक्सर लड़कियों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने और दूसरों की भावनाओं को समझने के लिए अधिक प्रोत्साहित करते हैं, जबकि लड़कों को भावनाएं दबाकर रखने की सीख मिलती है।

वर्ष 2019 में 58 अध्ययनों के विश्लेषण में भी पाया गया कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रशिक्षण के जरिये बेहतर बनाया जा सकता है। यानी पुरुष भी इस कौशल को सीख सकते हैं। हालांकि, महिलाओं की भावनात्मक समझ को अक्सर उनकी स्वाभाविक विशेषता मान लिया जाता है।


परिणामस्वरूप, उनसे दूसरों के विवाद सुलझाने, परेशान सहकर्मियों को संभालने और तनावपूर्ण माहौल शांत करने की अपेक्षा की जाती है, पर इस भावनात्मक श्रम को उचित पहचान या पुरस्कार नहीं मिलता। आखिरकार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। यह एक ऐसा कौशल है, जिसे हर व्यक्ति सीख सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम दूसरों की भावनाओं को समझने का अभ्यास करें और इसे एक मूल्यवान क्षमता के रूप में पहचानें।               -साथ में जोचेन मेंगेस (द कन्वर्सेशन)

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