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दूसरा पहलू: कैंसर से लड़ाई और एक बड़ा खुलासा

Mon, 19 Oct 2026 11:57 PM IST
ज्योति भास्कर जॉन एडी ला मार्का
जॉन एडी ला मार्का Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 19 Oct 2026 11:57 PM IST
सार

दुनियाभर में कैंसर के लाखों मामलों की वजह कुछ खास संक्रमण हैं। शोध में सामने आया कि पांच प्रमुख संक्रमण 20 से ज्यादा तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

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विस्तार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक नए शोध के मुताबिक वर्ष  2024 में दुनिया भर में कैंसर के कुल मामलों में से लगभग 12 फीसदी मामले किसी न किसी संक्रमण की वजह से हुए। 'द लैंसेट ऑन्कोलॉजी' में छपे इस अध्ययन में अलग-अलग तरह के कैंसरों के 23 लाख नए मामलों को संक्रमण से जोड़ा गया। इनमें से ज्यादातर मामले बीमारी फैलाने वाले सिर्फ पांच तरह के बैक्टीरिया की वजह से हुए। ये हैं- हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (चार फीसद), ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी (चार फीसद), हेपेटाइटिस-बी (दो फीसद), एपस्टीन-बार वायरस (एक फीसद) और हेपेटाइटिस-सी (एक फीसद से कम)। ये संक्रमण 20 से ज्यादा अलग-अलग तरह के कैंसर का कारण बन सकते हैं। शोध में इस संबंध के पीछे की आणविक प्रक्रियाओं (मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म) का बारीकी से अध्ययन किया गया। वायरस जिस कोशिका (होस्ट सेल) को संक्रमित करता है, उसके जीन को सीधे या परोक्ष रूप से बदल देता है। इससे उस कोशिका के बेकाबू होकर बढ़ने और अंत में कैंसर में तब्दील होने का खतरा बढ़ जाता है।
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वायरस मुख्य रूप से तीन तरीकों से ऐसा कर सकते हैं। पहला तरीका है कोशिका की खुद को खत्म करने (जैसे टीपी53 प्रोटीन को निष्क्रिय करके) या विभाजित होना बंद करने (जैसे आरबी प्रोटीन को निष्क्रिय करके) की क्षमता को खत्म कर देना। आमतौर पर वायरस से संक्रमित होने पर एक स्वस्थ कोशिका ऐसा करती है। दूसरा तरीका है कि वायरस का अपने डीएनए को मेजबान कोशिका (होस्ट सेल) के डीएनए में डाल देना। इससे गलती से वे जीन खराब हो सकते हैं, जो कोशिका के खत्म होने या विभाजन को नियंत्रित करते हैं। तीसरा तरीका यह है, जब वायरस में खुद ऐसा जीन होता है, जो कैंसर का कारण बनता है। इसे ऑन्कोजीन कहते हैं। वायरस व कैंसर के बीच संबंध ही आधुनिक कैंसर विज्ञान का आधार है। हालांकि कैंसर सिर्फ वायरस से ही नहीं होता। बैक्टीरिया या परजीवी (पैरासाइट्स) से होने वाले संक्रमण से भी कैंसर हो सकता है। अध्ययन में एक चिंताजनक बात यह सामने आई कि संक्रमण से होने वाले लगभग 75 फीसदी कैंसर के मामले कम व मध्यम आय वाले देशों में पाए गए। बचाव के उपाय भी अहम भूमिका निभाते हैं, जिनमें टीकाकरण, कंडोम का उपयोग और बीमारी की जांच शामिल हैं। हालांकि गरीब देशों में टीकाकरण जैसे व्यापक कार्यक्रमों की उपलब्धता सीमित हो सकती है, इसलिए कैंसर से लड़ने में इन तक पहुंच बराबरी का एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।  
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