फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   America passes bill over treatment of Uighurs china angry

अमेरिका के इस कदम से बौखलाया चीन, आमने-सामने ट्रंप और जिनपिंग

Thu, 05 Dec 2019 04:41 PM IST
Rajesh Badal राजेश बादल
Updated Thu, 05 Dec 2019 04:41 PM IST
विज्ञापन
America passes bill over treatment of Uighurs china angry
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपती शी जिनपिंग - फोटो : फाइल

एशिया के स्वयंभु चौधरी चीन के माथे पर बल पड़े हैं। शिन जियांग प्रांत के उइगर मुसलमानों के मानवाधिकार छीनने से दुनिया का चौधरी अमेरिका खफा है। उसने अपनी संसद के निचले सदन में एक विधेयक पास किया है। यह विधेयक मुसलमानों के हक छीनने वालों पर प्रतिबंध की मांग करता है। चीन इससे तिलमिलाया हुआ है। उसका कहना है कि यह आंतरिक मामलों में दख़ल है।

विज्ञापन


इस विधेयक के पक्ष में 407 और विरोध में सिर्फ़ एक मत पड़ा। अब सीनेट इसे अपनी मंजूरी देगी। उसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर मुहर लगाएंगे। विधेयक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इस व्यवहार की निन्दा करता है। अमेरिका ने चीन में अल्पसंख्यकों के इस उत्पीड़न के विरोध में करीब 30 चीनी कंपनियों पर पहले ही पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद चीनी अफसरों को वीज़ा नहीं देने का ऐलान किया था।
विज्ञापन


ग़ौरतलब है कि शिनजियांग के दस लाख से अधिक मुस्लिमों के धार्मिक,राजनीतिक,सामाजिक और आर्थिक अधिकार छीन लिए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि वे कुरान में कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के मुताबिक़ अपने धर्म में बदलाव करें। करीब दो बरस पहले शिन ज़ियांग यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रोफेसर ताशपोलत तियिक को चीनी पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया था और तब से उनकी कोई ख़बर नहीं है ।आशंका है कि उन्हें मार डाला गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैसे चीन का तर्क मासूम सा लगता है कि यह उसके अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप है। वह भारत के कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को भारत का आंतरिक मामला नहीं मानता। वह म्यांमार के रोहिंग्या मसले में भी दख़ल देता है।
 

America passes bill over treatment of Uighurs china angry
चीन में उइगर समुदाय के अल्पसंख्यक मुसलमान - फोटो : BBC

अफगानिस्तान में तालिबान के साथ गलबहियां डालकर उन्हें समझौते की मेज़ पर लाने के प्रयास करता है। पाकिस्तान में विरोध के बावजूद अपने बैंक खोलता है,अपनी भाषा मंदारिन सीखने के लिए लोगों को बाध्य करता है। नेपाल में भी मंदारिन के लिए माहौल बनाया गया और उइगर मुसलमानों के मसले में  नाक पर मक्खी भी नहीं बैठने देता।

दरअसल, चीन की नीति में यह अजीब सा विरोधाभास है। पाकिस्तान भी इस मामले में चीनी पिछलग्गू है। वह अनेक देशों के मुस्लिमों की हालत पर आंसू बहाता है, लेकिन चीनी मुसलमानों की दुर्दशा पर उसकी घिग्घी बंध जाती है।

दरअसल, परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा करती है। इस पर भरोसा करें तो निष्कर्ष यह है कि चीन के अल्पसंख्यक अब तक के सबसे बड़े ख़तरे का सामना कर रहे हैं। वहां का यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट शी जिन पिंग की 2015 की नीति के मुताबिक़ काम कर रहा है। इसके तहत मुसलमानों,बौद्ध और ईसाईयों को कम्युनिस्ट पार्टी  की नीतियां अपनाना ज़रूरी है। बीते दिनों इस्लामिक एसोसिएशन की वेबसाइट पर एक ड्राफ्ट जारी हुआ था। इससे चीनी मुसलमान बेहद ग़ुस्से में हैं।
 

America passes bill over treatment of Uighurs china angry
चीन में उइगर मुस्लिमों को लेकर खबरे पहले भी बाहर आती रहीं हैं। - फोटो : फाइल फोटो

पश्चिमी प्रान्त शिनजियांग के गुप्त कैम्प में दस लाख मुस्लिम क़ैद करके रखे गए हैं। हज़ारों लोग दाढ़ी या हिज़ाब के कारण हिरासत में हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह बताया गया है। चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में सरकार के चहेते मुस्लिम नेताओं ने अपनी क़ौम के सदस्यों से अपील की थी कि वे अपने धर्म का  चीनीकरण करने में सहयोग दें।

इस्लाम में मार्क्सवादी विचारधारा को शामिल करें, मस्जिदों में चीनी झंडा लगाएं वगैरह-वगैरह। संगठन की रिपोर्ट में भी इसे स्वीकार किया गया था। बीते दिनों निगझिया प्रान्त की एक मस्जिद को गिराने गए चीनी अफसरों को भारी विरोध सहना पड़ा था। मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद घेर ली। अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा।

बताया गया कि मस्जिद के गुंबद सारी दुनिया की मस्जिदों की तरह प्याज के आकार के थे। चीन में सरकारी नियमों के मुताबिक़ कम्युनिस्ट पार्टी की घोषित डिज़ाइन पर ही मस्जिद बन सकती है। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed