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क्या तकनीकी शिक्षा में नई क्रांति ला पाएगी केंद्र सरकार की 'MERIT' योजना?

Tue, 19 Aug 2025 01:20 PM IST
शशांक द्विवेदी शशांक द्विवेदी
Updated Tue, 19 Aug 2025 01:20 PM IST
सार

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, केंद्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान सुधार मेरिट योजना को मंजूरी दी है।
  • अगले पांच वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना 275 संस्थानों को लाभान्वित करेगी। 

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A New Era in Technical Education Central Government's 'MERIT' Scheme to Transform Students Futures
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

What is Merit Scheme? केंद्र सरकार ने हाल ही में बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान सुधार मेरिट (MERIT) योजना को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले पांच वर्षों में 4,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इससे देश के लगभग साढ़े सात लाख विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। यह योजना देश के 275 तकनीकी शिक्षण संस्थानों में लागू होगी, जिनमें 175 इंजीनियरिंग कॉलेज और 100 पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य न केवल तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है, बल्कि छात्रों को बहु-विषयक, व्यावहारिक और उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान करना भी है।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसे इसी वित्तीय वर्ष से शुरू किया गया है। 2029-30 तक कुल 4,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसकी आधी राशि 2,100 करोड़ रुपये का प्रबंध विश्व बैंक से ऋण लेकर किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और शासन में सुधार करना है।
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वर्तमान में देश में तकनीकी शिक्षा की स्थिति
भारत में तकनीकी शिक्षा का ढांचा काफी व्यापक है। देश में आईआईटी, एनआईटी, सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ-साथ पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों का बड़ा नेटवर्क है। हर साल लाखों छात्र तकनीकी कोर्सों में दाखिला लेते हैं।
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भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा लंबे समय तक युवाओं की पहली पसंद रही है। 'डॉक्टर या इंजीनियर' बनना दशकों तक माता-पिता और छात्रों का सपना रहा है। इसी मांग को देखते हुए 2000 के बाद देश में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति पलट गई है, अब हर साल लाखों सीटें खाली रह जाती हैं। यह समस्या सिर्फ छोटे शहरों के कॉलेजों में ही नहीं, बल्कि कई पुराने और स्थापित संस्थानों में भी देखने को मिल रही है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) के आंकड़ों के अनुसार, देश के कई राज्यों में इंजीनियरिंग सीटों का 30% से 50% तक हिस्सा खाली रह जाता है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से लेकर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह प्रवृत्ति स्पष्ट है। प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली सीटों का संकट केवल एक शैक्षिक समस्या नहीं, बल्कि यह देश के तकनीकी मानव संसाधन विकास पर भी असर डाल रहा है। यदि समय रहते शिक्षा की गुणवत्ता, उद्योग से तालमेल और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर सुधार नहीं किए गए, तो यह संकट और गहराएगा। शिक्षा संस्थानों, सरकार और उद्योग—तीनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इंजीनियरिंग शिक्षा फिर से रोजगारपरक, गुणवत्तापूर्ण और छात्रों के लिए आकर्षक बन सके।


कुछ गंभीर चुनौतियां-

  • रोजगार की कमी- तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद बड़ी संख्या में स्नातक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं मिल पाता।
  • पाठ्यक्रम का पुराना ढांचा- कई संस्थानों में पाठ्यक्रम अभी भी पुराना है और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपडेट नहीं है।
  • व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी- प्रयोगशालाओं, वर्कशॉप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
  • अनुसंधान व नवाचार में पिछड़ापन- अनुसंधान कार्य और पेटेंट के मामले में भारत के तकनीकी संस्थान अब भी अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे हैं।
  • शहरी-ग्रामीण असमानता- ग्रामीण क्षेत्रों के तकनीकी संस्थानों में संसाधनों, फैकल्टी और तकनीकी उपकरणों की भारी कमी है।



मेरिट योजना के उद्देश्य और विशेषताएं
बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान सुधार मेरिट (MERIT) योजना का उद्देश्य छात्रों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रबंधन, डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, पर्यावरण विज्ञान, और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों से भी जोड़ना। छात्रों और फैकल्टी को उच्चस्तरीय रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता। प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक वर्कशॉप की स्थापना। उद्योग के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करना और छात्रों के लिए इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट और रोजगार के अवसर पैदा करना। कमजोर क्षेत्रों के तकनीकी संस्थानों को अतिरिक्त फंड और विशेषज्ञ सहयोग देना है।

तकनीकी शिक्षा के स्तर को बेहतर करने के उपाय
पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण, हर तीन वर्ष में पाठ्यक्रम की समीक्षा और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप अपडेट करना। नई उभरती तकनीकों- जैसे 5G, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, ग्रीन एनर्जी को पढ़ाई में शामिल करना है। कॉलेजों में रिसर्च लैब और इनोवेशन सेंटर स्थापित करना है।छात्रों और शिक्षकों को पेटेंट फाइल करने के लिए प्रोत्साहन देना है। शिक्षकों के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम और इंडस्ट्री एक्सपोजर, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, उद्योग के साथ मजबूत साझेदारी ,उद्योग-प्रायोजित कोर्स और वर्कशॉप आयोजित करना है। कंपनियों के साथ 'जॉब-रेडी स्किल' आधारित प्रशिक्षण। ग्रामीण और छोटे शहरों के संस्थानों पर ध्यान वहां आधुनिक लैब और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना। छात्रों को ऑनलाइन लर्निंग और वर्चुअल लैब की सुविधा देना है।

छात्र-केंद्रित शिक्षा
प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन और उद्यमिता प्रशिक्षण। बहु-विषयक टीम प्रोजेक्ट्स, जिससे छात्र विविध क्षेत्रों का अनुभव ले सकें। कुशल और उद्योग-तैयार मानव संसाधन मेरिट योजना से निकलने वाले छात्र केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल वाले होंगे। इंडस्ट्री से जुड़ी शिक्षा मिलने पर छात्रों की रोजगार-योग्यता बढ़ेगी। भारत वैश्विक तकनीकी नवाचार के मानचित्र पर मजबूत स्थिति बना सकेगा। पिछड़े इलाकों में भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा की पहुँच बढ़ेगी।

तकनीकी शिक्षा किसी भी देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास की रीढ़ होती है। मेरिट योजना इस दिशा में एक ठोस कदम है, जो न केवल शिक्षा के स्तर को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि इसे उद्योग और समाज की जरूरतों से भी जोड़ेगी। यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल तकनीकी शिक्षा में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि नवाचार और अनुसंधान में भी दुनिया में अग्रणी स्थान हासिल करेगा।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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