{"_id":"6ac2b1a6338974b310098f54","slug":"swimmer-himanshu-to-showcase-his-mettle-in-japan-jhajjar-news-c-200-1-bgh1005-127832-2026-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"तैराक हिमांशु जापान में दिखाएंगे दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तैराक हिमांशु जापान में दिखाएंगे दम
विज्ञापन
बहादुरगढ़। हौसले बुलंद हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं। जन्म से दृष्टिबाधित रोहतक के तैराक हिमांशु नांदल ने इसे सच साबित कर दिखाया है। 18 अक्तूबर से जापान में होने वाले एशियन पैरा गेम्स में हिमांशु पदक जीतने के लिए पूल में उतरेंगे। वह बहादुरगढ़ की एचएल सिटी स्थित चैंपियंस स्पोर्ट्स एकेडमी में तैयारी कर रहे हैं।
हिमांशु ने वर्ष 2021 में जूडो छोड़कर पैरा स्विमिंग की दुनिया में कदम रखा। एस-11 कैटेगरी में उन्होंने अपनी पहचान बना ली। वर्ष 2022 की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ही स्वर्ण पदक जीतने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। वर्ष 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित चौथे एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वह फाइनलिस्ट रहे।
वर्ष 2024 में हिमांशु ने पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड हासिल किया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय दृष्टिबाधित तैराक बने। हालांकि कोटा सीमित होने के कारण उन्हें पेरिस पैरालंपिक में खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
विज्ञापन
वर्ष 2025 में सिंगापुर वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में दो स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचे। हैदराबाद नेशनल पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 100 मीटर बैकस्ट्रोक में स्वर्ण पदक जीतने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए और बेस्ट स्विमर का खिताब हासिल किया।
हिमांशु की इस सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष और कोच रणबीर शर्मा का मार्गदर्शन है। दृष्टिबाधित तैराक के लिए पूल में दिशा, टर्न और रिदम बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। कोच की एडॉप्टिव तकनीकों और हिमांशु की मेहनत ने इन चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया।
हिमांशु के पिता बलवान हरियाणा के मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम में पुलिस अधिकारी हैं। व्यस्त जिम्मेदारियों के बावजूद वह बेटे के साथ देश-विदेश की प्रतियोगिताओं में मौजूद रहे। हिमांशु का कहना है कि खिलाड़ी की तैयारी के दौर में सरकारों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। पेरिस पैरालंपिक का क्वालिफिकेशन मार्क हासिल करने के बावजूद उन्हें टॉप्स योजना में शामिल नहीं किया गया।
अब हिमांशु की नजरें जापान के एशियन पैरा गेम्स और लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक पर हैं। जापान में वह 50, 100 और 400 मीटर फ्रीस्टाइल के अलावा 100 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 200 मीटर आईएम में पदक के लिए उतरेंगे।
हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं हरियाणा तैराकी संघ के महासचिव अनिल खत्री ने कहा कि हिमांशु हरियाणा ही नहीं, देश की धरोहर हैं और उन्हें विश्वास है कि वह जापान से देश के लिए पदक लेकर लौटेंगे।
हिमांशु ने साबित कर दिया है कि मंजिल देखने के लिए आंखें ही जरूरी नहीं, मजबूत इरादे और अटूट विश्वास भी काफी हैं।
विज्ञापन
हिमांशु ने वर्ष 2021 में जूडो छोड़कर पैरा स्विमिंग की दुनिया में कदम रखा। एस-11 कैटेगरी में उन्होंने अपनी पहचान बना ली। वर्ष 2022 की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ही स्वर्ण पदक जीतने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। वर्ष 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित चौथे एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वह फाइनलिस्ट रहे।
विज्ञापन
वर्ष 2024 में हिमांशु ने पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड हासिल किया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय दृष्टिबाधित तैराक बने। हालांकि कोटा सीमित होने के कारण उन्हें पेरिस पैरालंपिक में खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।
विज्ञापन
वर्ष 2025 में सिंगापुर वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में दो स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचे। हैदराबाद नेशनल पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर फ्रीस्टाइल, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 100 मीटर बैकस्ट्रोक में स्वर्ण पदक जीतने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए और बेस्ट स्विमर का खिताब हासिल किया।
हिमांशु की इस सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष और कोच रणबीर शर्मा का मार्गदर्शन है। दृष्टिबाधित तैराक के लिए पूल में दिशा, टर्न और रिदम बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। कोच की एडॉप्टिव तकनीकों और हिमांशु की मेहनत ने इन चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया।
हिमांशु के पिता बलवान हरियाणा के मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम में पुलिस अधिकारी हैं। व्यस्त जिम्मेदारियों के बावजूद वह बेटे के साथ देश-विदेश की प्रतियोगिताओं में मौजूद रहे। हिमांशु का कहना है कि खिलाड़ी की तैयारी के दौर में सरकारों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। पेरिस पैरालंपिक का क्वालिफिकेशन मार्क हासिल करने के बावजूद उन्हें टॉप्स योजना में शामिल नहीं किया गया।
अब हिमांशु की नजरें जापान के एशियन पैरा गेम्स और लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक पर हैं। जापान में वह 50, 100 और 400 मीटर फ्रीस्टाइल के अलावा 100 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 200 मीटर आईएम में पदक के लिए उतरेंगे।
हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं हरियाणा तैराकी संघ के महासचिव अनिल खत्री ने कहा कि हिमांशु हरियाणा ही नहीं, देश की धरोहर हैं और उन्हें विश्वास है कि वह जापान से देश के लिए पदक लेकर लौटेंगे।
हिमांशु ने साबित कर दिया है कि मंजिल देखने के लिए आंखें ही जरूरी नहीं, मजबूत इरादे और अटूट विश्वास भी काफी हैं।